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पंजाब पुलिस बनाम X Corp: वकील का अकाउंट ब्लॉक करने के आदेश पर हाईकोर्ट पहुंचा एक्स, प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

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चंडीगढ़: पंजाब में सोशल मीडिया कंटेंट और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर पंजाब पुलिस तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X Corp’ के मध्य एक नया कानूनी विवाद खड़ा हो गया है।

एक स्थानीय वकील के सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए पंजाब पुलिस द्वारा जारी किए गए आदेशों को X Corp ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी है। कंपनी का तर्क है कि राज्य पुलिस द्वारा जारी किए गए ये ब्लॉकिंग आदेश भारतीय साइबर कानून और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना दिए गए थे। यह पूरा मामला वकील निखिल सराफ के उन पोस्ट से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं।

📜 ‘छवि खराब करने का आरोप लगा दिए गए थे 3 ब्लॉकिंग आदेश’: X Corp का दावा

पुलिसिया नोटिस और कंपनी के दावे का विवरण:

  • लगातार 3 आदेश: X Corp के अनुसार, पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम डिवीजन ने 29 जुलाई से 1 अगस्त 2025 के बीच कंपनी को तीन अलग-अलग ‘ब्लॉकिंग ऑर्डर’ प्रेषित किए थे।

  • कार्रवाई की चेतावनी: इन आधिकारिक नोटिसों में वकील निखिल सराफ की विशिष्ट पोस्ट हटाने का निर्देश दिया गया था और ऐसा न करने की स्थिति में कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

  • पुलिस का तर्क: पुलिस का प्राथमिक रुख था कि उक्त सामग्री पंजाब पुलिस की सार्वजनिक छवि और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की साख व विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने वाली थी।

🔒 दबाव में ब्लॉक किया गया अकाउंट, रिट याचिका मिलने के बाद किया गया बहाल

अकाउंट पर कार्रवाई और बहाली का घटनाक्रम:

  • अगस्त 2025 में ब्लॉकिंग: पुलिस की लगातार चेतावनियों के दबाव में कंपनी ने 6 अगस्त 2025 को निखिल सराफ के संबंधित अकाउंट को प्रतिबंधित (ब्लॉक) कर दिया था।

  • जून 2026 में बहाली: बाद में रिट याचिका की औपचारिक कानूनी प्रति प्राप्त होने पर 2 जून 2026 को कंपनी ने समीक्षा के उपरांत उक्त अकाउंट को पुनः बहाल (अनब्लॉक) कर दिया।

🏛️ ‘IT एक्ट की धारा 69A का नहीं हुआ पालन’: हाईकोर्ट में X Corp की मुख्य दलील

कानूनी प्रक्रिया और न्यायालयीन अधिकार क्षेत्र के बिंदु:

  • धारा 69A का उल्लंघन: हाईकोर्ट में अपनी दलील रखते हुए X Corp ने कहा कि किसी भी ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक करने का अधिकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69A और उससे संबंधित ब्लॉकिंग नियमों के तहत केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास है।

  • सीधे आदेश पर रोक: कंपनी ने दलील दी कि कोई भी राज्य सरकार या राज्य पुलिस विभाग निर्धारित कानूनी ढांचे को दरकिनार कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सीधे ब्लॉकिंग आदेश जारी नहीं कर सकता।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का हवाला: X ने अपनी दलीलों के समर्थन में बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि डिजिटल कंटेंट ब्लॉकिंग में तय कानूनी प्रक्रियाओं और वैधानिक अधिकार क्षेत्र का पालन अनिवार्य है। अब हाईकोर्ट यह तय करेगा कि पुलिस के ये आदेश विधिसम्मत थे या नहीं।

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