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हरियाणा में 155 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र मुख्य केंद्रों में होंगे अपग्रेड, WCD मंत्रालय ने दी मंजूरी

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चंडीगढ़ (हरियाणा): महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने हरियाणा में संचालित 155 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को पूर्ण/मुख्य आंगनबाड़ी केंद्रों के रूप में अपग्रेड करने की आधिकारिक स्वीकृति दे दी है।

इस निर्णय से राज्य के ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों में बाल पोषण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और अधिक मजबूत होगा। अपग्रेडेशन के बाद इन केंद्रों के बुनियादी ढांचे, वित्तीय आवंटन और मानदेय ढांचे में बड़ा सकारात्मक बदलाव आएगा।

💼 कार्यकर्ताओं के केंद्रीय भत्ते में ₹1,000 की वृद्धि, नई सहायिकाओं की होगी नियुक्ति

मानदेय, भत्ते और नई नियुक्तियों का विवरण:

  • कार्यकर्ता भत्ता वृद्धि: अपग्रेड किए गए केंद्रों में तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का केंद्रीय भत्ता 3,500 रुपये से बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

  • सहायिकाओं की तैनाती: प्रत्येक अपग्रेड केंद्र पर एक-एक अतिरिक्त आंगनबाड़ी सहायिका की नई नियुक्ति की जाएगी।

  • सहायिकाओं का मानदेय व वर्दी भत्ता: नव-नियुक्त सहायिकाओं को 2,250 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। इसके साथ ही उन्हें प्रतिवर्ष 1,000 रुपये का विशेष वर्दी भत्ता भी प्रदान किया जाएगा।

💊 दवा किट, उपकरण और वार्षिक खर्चों के बजट में भारी बढ़ोतरी

संसाधनों और सुविधाओं का विस्तार:

  • दवा किट खर्च दोगुना: इन केंद्रों के लिए आवश्यक दवा किट का वार्षिक बजट 750 रुपये से बढ़ाकर सीधे 1,500 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है।

  • फर्नीचर व उपकरण फंड: आधुनिक उपकरण और नए फर्नीचर की व्यवस्था के लिए प्रति 5 वर्ष की अवधि में 3,000 रुपये का अतिरिक्त वित्तीय अनुदान मिलेगा।

  • अन्य प्रशासनिक व्यय: केंद्रों के रोजमर्रा के अन्य खर्चों का वार्षिक बजट 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति वर्ष किया गया है।

  • 300 दिन पूरक पोषण: पंजीकृत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को वर्ष में कुल 300 दिनों तक नियमित पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा।

💰 ₹69.36 लाख आएगा कुल खर्च: केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 का अनुपात

वित्तीय रूपरेखा और प्रशासनिक पक्ष:

  • कुल बजट आवंटन: महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक प्रियंका सोनी के अनुसार, इन 155 अपग्रेडेड केंद्रों के संचालन पर कुल 69.36 लाख रुपये का वार्षिक खर्च आएगा।

  • केंद्र-राज्य हिस्सेदारी: इस योजना के तहत वित्तीय भार का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

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