Local & National News in Hindi

स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब की अनुमति नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की छात्रा की याचिका, दिया बड़ा फैसला

31

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या सिर पर स्कार्फ (Headscarf) पहनने की अनुमति मांगने वाली एक नाबालिग छात्रा की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने के लिए ठोस और पर्याप्त धार्मिक प्रमाण प्रस्तुत करने में असफल रही कि स्कूल परिसर में सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम धर्म की एक अनिवार्य धार्मिक प्रथा (Essential Religious Practice) है। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने कहा कि यदि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का ड्रेस कोड एकसमान, गैर-भेदभावपूर्ण और अनुशासन तथा संस्थान की पहचान बनाए रखने के उद्देश्य से लागू है, तो उसमें व्यक्तिगत आधार पर संशोधन या छूट की मांग नहीं की जा सकती।

🏫 प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल का मामला: 11वीं में प्रवेश और स्कार्फ की मांग

याचिका और विवाद का पृष्ठभूमि विवरण:

  • याचिकाकर्ता की मांग: यह मामला प्रयागराज के अत्तारसुइया स्थित प्रतिष्ठित टैगोर पब्लिक स्कूल का है। छात्रा ने अपनी मां के माध्यम से याचिका दाखिल कर 11वीं कक्षा में नियमित प्रवेश और निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ स्कार्फ पहनने की आधिकारिक अनुमति मांगी थी।

  • छात्रा का दावा: याचिका में तर्क दिया गया कि वह कक्षा 6 से 10वीं तक इसी स्कूल में अध्ययनरत रही और इस दौरान वह स्कार्फ पहनती थी, जिस पर पूर्व में स्कूल प्रबंधन द्वारा कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी।

  • स्कूल का पक्ष: स्कूल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि परिसर में सभी विद्यार्थियों के लिए एकसमान ड्रेस कोड लागू है। किसी एक छात्रा को अलग से छूट प्रदान करने से विद्यालय का आंतरिक अनुशासन, समानता और यूनिफॉर्म की व्यवस्था प्रभावित होगी।

📜 कर्नाटक हाईकोर्ट के 2022 के ऐतिहासिक फैसले का उल्लेख

अदालत द्वारा विधिक दृष्टांतों का संदर्भ:

  • पूर्व अनुमति कोई विधिक अधिकार नहीं: हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व की कक्षाओं में स्कार्फ पहनने पर स्कूल द्वारा टोक न लगाना छात्रा को भविष्य में इसे अनिवार्य रूप से पहनने का कोई स्थायी विधिक अधिकार नहीं देता।

  • कर्नाटक HC का फैसला: डिवीजन बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट की 2022 की फुल बेंच के उस फैसले को अत्यंत प्रभावशाली माना, जिसमें हिजाब को इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक हिस्सा नहीं माना गया था।

  • सर्वोच्च न्यायालय का संदर्भ: कोर्ट ने रेखांकित किया कि यद्यपि सुप्रीम कोर्ट के ‘आयशा शिफा’ मामले में खंडित फैसला (Split Verdict) आया था, लेकिन कर्नाटक हाईकोर्ट के तार्किक दृष्टिकोण से असहमति व्यक्त करने का फिलहाल कोई ठोस आधार नहीं है।

🛡️ समानता, धर्मनिरपेक्ष माहौल और अनुशासन बनाए रखना यूनिफॉर्म का मूल उद्देश्य

न्यायिक निष्कर्ष और याचिका का निपटारा:

  • धर्मनिरपेक्ष शैक्षणिक माहौल: अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि शैक्षणिक संस्थानों में यूनिफॉर्म लागू करने का मूल ध्येय विद्यार्थियों के बीच समानता, बंधुत्व, अनुशासन, संस्थान की विशिष्ट पहचान और एक स्वस्थ धर्मनिरपेक्ष माहौल को बनाए रखना है।

  • याचिका निरस्त: इन सभी कानूनी और अनुशासनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा की ओर से दायर रिट याचिका को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.