मुंबई में ₹9 प्रति लीटर महंगा होगा दूध: 1 सितंबर से ₹102 थोक भाव, खुदरा में ₹107 तक पहुंच सकती हैं कीमतें
मुंबई (महाराष्ट्र): त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले मुंबई के आम नागरिकों पर महंगाई की एक और मार पड़ने जा रही है। मुंबई दुग्ध उत्पादक संघ ने ताजे भैंस के दूध के थोक भाव में ₹9 प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। संघ द्वारा निर्धारित की गई ये नई दरें 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होंगी। इस संशोधन के बाद थोक बाजार में वर्तमान में ₹93 प्रति लीटर बिकने वाला ताजा भैंस का दूध बढ़कर ₹102 प्रति लीटर हो जाएगा। थोक कीमतों में इस उछाल के चलते खुदरा (रिटेल) बाजार में दूध के दाम ₹105 से लेकर ₹107 प्रति लीटर तक पहुंचने की प्रबल संभावना है।
दूध उत्पादक संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय में दुधारू पशुओं के मूल्यों के साथ-साथ उनके रखरखाव और चारे की लागत में भारी वृद्धि हुई है। विशेष रूप से पशु आहार जैसे दाना, तूर चूनी, चना चूनी, खली, सूखी घास और पिंडा के दामों में लगभग 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। उत्पादन लागत में इस तेज वृद्धि की भरपाई के लिए थोक दरों में इजाफा करना अनिवार्य हो गया था।
📈 ₹9 प्रति लीटर महंगा होगा दूध: खुदरा बाजार में ₹107 तक पहुंचने का अनुमान
मूल्य वृद्धि और खुदरा बाजार का गणित:
-
थोक भाव में बदलाव: ताजे भैंस के दूध का थोक मूल्य ₹93 से बढ़ाकर ₹102 प्रति लीटर तय किया गया है (एकमुश्त ₹9 प्रति लीटर की वृद्धि)।
-
खुदरा बाजार पर प्रभाव: वर्तमान में जो दूध खुदरा दुकानों पर ₹98 प्रति लीटर के आसपास मिलता है, वह स्थानीय विक्रेताओं के परिवहन खर्च और मुनाफे के बाद ₹105 से ₹107 प्रति लीटर तक बिक सकता है।
-
अंतिम रेट लिस्ट: खुदरा विक्रेताओं और संघ के बीच अंतिम विचार-विमर्श के बाद 31 अगस्त को आधिकारिक खुदरा मूल्य सूची जारी होने की संभावना है।
☕ डेयरी उत्पादों और त्योहारों के बजट पर पड़ेगा सीधा असर: 6 महीने लागू रहेंगी दरें
मार्केट इंपैक्ट और प्रभावी समय-सीमा:
-
मिठाइयों और चाय पर असर: दूध की कीमतों में उछाल का सीधा असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहेगा; बल्कि चाय, मिठाई, दही, लस्सी, पनीर और घी जैसे अन्य सभी डेयरी उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
-
त्योहारी मांग में जेब पर बोझ: आगामी त्योहारों के दौरान मिठाइयों और दूध उत्पादों की खपत कई गुना बढ़ जाती है, जिससे उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
-
छह महीने की समय-सीमा: संघ ने स्पष्ट किया है कि ये संशोधित दरें 1 सितंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक यानी कुल छह महीनों के लिए प्रभावी रहेंगी, जिसके बाद परिस्थितियों की समीक्षा कर अगला निर्णय लिया जाएगा।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.