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झारखंड में आरक्षण सुधार आंदोलन की 5 प्रमुख मांगें: व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर

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रांची (झारखंड): आरक्षण व्यवस्था में आवश्यक सुधार और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से झारखंड में आरक्षण सुधार आंदोलन ने पांच प्रमुख मांगें उठाई हैं।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी इस पहल का उद्देश्य किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय के संवैधानिक अधिकारों को छीनना या समाप्त करना नहीं है, बल्कि आरक्षण और सामाजिक न्याय की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तर्कसंगत और वास्तविक जरूरतमंदों के लिए प्रभावी बनाना है।

📜 UGC Equity Regulations 2026 की समीक्षा और SC/ST एक्ट में जरूरी संशोधन की मांग

संस्थानों में निष्पक्षता और कानूनों के दुरुपयोग पर रोक:

  • UGC इक्विटी रेगुलेशंस 2026: आंदोलनकारियों ने यूजीसी (UGC) के वर्ष 2026 के इक्विटी रेगुलेशंस की विस्तृत समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में जातिगत आधार पर किसी भी छात्र के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और शिकायतों की जांच पूर्णतः निष्पक्ष व पारदर्शी प्रक्रिया से हो।

  • SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम: आंदोलनकारियों ने मांग रखी कि वास्तविक पीड़ितों को कानून का शत-प्रतिशत संरक्षण मिले, किंतु झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों और दुरुपयोग को रोकने के लिए अधिनियम में आवश्यक संशोधन व पूर्व जांच की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

🎯 IIT, IIM और मेडिकल में मेरिट की सुरक्षा: आरक्षण में क्रीमीलेयर व्यवस्था पर विचार

उच्च शिक्षा और चयन प्रक्रिया में सुधार:

  • मेरिट और शैक्षणिक गुणवत्ता: आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल कॉलेजों, केंद्रीय तथा राज्य विश्वविद्यालयों में सीट आवंटन और चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाने की मांग की गई है, ताकि आरक्षण के साथ-साथ योग्यता, मेहनत और गुणवत्ता को भी उचित स्थान मिल सके।

  • SC/ST वर्ग में क्रीमीलेयर: आंदोलनकारियों का तर्क है कि एससी/एसटी वर्ग में भी क्रीमीलेयर व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए, जिससे आरक्षण का लाभ केवल साधन संपन्न लोगों तक सीमित न रहकर उसी वर्ग के अंतिम और सबसे पिछड़े व्यक्ति तक पहुंचे।

👨‍👩‍👧‍👦 ‘एक परिवार-एक आरक्षण-एक बार’ की नीति पर राष्ट्रीय चर्चा की मांग

समान अवसर और व्यापक प्रतिनिधित्व:

  • सीमित परिवारों तक लाभ न रहे: आंदोलन की एक प्रमुख मांग ‘एक परिवार-एक आरक्षण-एक बार’ के सिद्धांत पर राष्ट्रीय स्तर पर खुली चर्चा कराने की है।

  • वंचितों को अवसर: आंदोलनकारियों का कहना है कि एक ही परिवार द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी लाभ लेने से अन्य वंचित परिवार पीछे छूट जाते हैं, इसलिए उन परिवारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिन्हें अब तक इस व्यवस्था का लाभ नहीं मिल सका है।

📢 ‘संवैधानिक दायरे में हो सुधार’: आंदोलन प्रतिनिधि सुमित दुबे का बयान

उद्देश्य और भविष्य की रूपरेखा:

  • आरक्षण सुधार आंदोलन के प्रतिनिधि सुमित दुबे ने कहा कि वे किसी के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका लक्ष्य आरक्षण प्रणाली की विसंगतियों को दूर करना है।

  • उन्होंने मांग की कि उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में मेरिट और पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाए तथा इन सभी 5 सूत्री मांगों पर संवैधानिक एवं कानूनी दायरे में व्यापक विमर्श कर सकारात्मक सुधार किए जाएं।

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