जम्मू: जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज चौथे दिन भी जारी है।
प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में कार्यरत करीब 1500 से 1600 इंटर्न डॉक्टरों के सामूहिक कार्य बहिष्कार के चलते स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। विशेष रूप से बाह्य रोगी विभाग (OPD) की नियमित सेवाओं पर इसका सीधा असर देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों की प्रमुख मांग है कि उनके वर्तमान मासिक स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपये प्रति माह किया जाए।
⏳ 7 वर्षों से नहीं बढ़ा स्टाइपेंड: रेजिडेंट डॉक्टरों पर बढ़ा अतिरिक्त काम का बोझ
डॉक्टरों की मांग और अस्पतालों की स्थिति:
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लंबे समय से उपेक्षा: आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि पिछले करीब सात वर्षों से उनके मानदेय या स्टाइपेंड में कोई तर्कसंगत बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि वे इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी, इनडोर वार्ड और नाइट ड्यूटी जैसी अति-आवश्यक सेवाओं में दिन-रात मुस्तैद रहते हैं।
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अस्पतालों पर दबाव: इंटर्न डॉक्टरों के अनुपस्थित रहने से जम्मू स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज (GMC) सहित अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में नियमित व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।
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रेजिडेंट डॉक्टरों पर भार: कार्य व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सीनियर व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को अतिरिक्त घंटों तक ड्यूटी करनी पड़ रही है।
📉 मरीजों की संख्या में भारी गिरावट: सरकार की ओर से वार्ता की पहल नहीं
प्रशासनिक उदासीनता और स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल:
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ओपीडी में कमी: हड़ताल के तीसरे दिन (बुधवार) को जम्मू जीएमसी की ओपीडी में मंगलवार की तुलना में मरीजों की आमद में 292 की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई, क्योंकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को परामर्श में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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बातचीत का अभाव: डॉक्टरों ने असंतोष जताते हुए कहा कि हड़ताल के चार दिन बीतने के बावजूद प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मांगों के समाधान अथवा गतिरोध समाप्त करने के लिए कोई औपचारिक वार्ता या ठोस पहल नहीं की गई है।
✊ ‘लिखित आदेश मिलने तक हड़ताल रहेगी जारी’: JKSA ने भी दिया खुला समर्थन
छात्र संगठन का समर्थन और आंदोलन की रूपरेखा:
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लिखित आश्वासन पर अड़े: इंटर्न डॉक्टरों ने दो-टूक कहा है कि वे किसी मौखिक आश्वासन के आधार पर काम पर नहीं लौटेंगे; जब तक सरकार स्टाइपेंड संशोधन का आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं करती, उनका अनिश्चितकालीन प्रदर्शन जारी रहेगा।
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छात्र संगठन का साथ: जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने भी डॉक्टरों के इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए उनकी मांग को पूरी तरह से जायज, तार्किक और समय की मांग बताया है।
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मरीजों की परेशानी: 31 अगस्त से प्रारंभ हुई इस हड़ताल के चलते दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों और तीमारदारों को ओपीडी टिकट और नियमित जांचों के लिए घंटों कतारों में जूझना पड़ रहा है।
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