ग्वालियर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शराब दुकानों से संबद्ध अहातों को बंद किए जाने के बाद भी खुले में शराबखोरी पर अंकुश नहीं लग सका है।
अहाते बंद होने के बाद शराबियों ने दुकानों के बाहर की सड़कों, फुटपाथों और सीढ़ियों को ही अपना नया ठिकाना बना लिया है। हाथों में शराब की बोतलें और डिस्पोजल गिलास लिए लोग दिन के उजाले से लेकर देर रात तक खुलेआम जाम छलकाते दिखाई दे रहे हैं। इस बेखौफ शराबखोरी के कारण राहगीरों, विशेष रूप से महिलाओं और स्कूली छात्राओं को भारी असहजता और भय के माहौल से गुजरना पड़ रहा है। इसके साथ ही मुख्य मार्गों पर शराबियों के जमावड़े से यातायात अवरुद्ध हो रहा है और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बढ़ रही है।
📍 महाराज बाड़ा पर दिनदहाड़े जाम छलका रहे लोग: गोरखी के सामने बेखौफ दिखे शराबी
शहर के हृदय स्थल पर जमीनी पड़ताल:
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व्यस्ततम बाजार की स्थिति: महाराज बाड़ा ग्वालियर शहर का सबसे प्रमुख, प्राचीन और अत्यधिक भीड़भाड़ वाला व्यावसायिक केंद्र है, जहाँ गोरखी के सामने स्थित शराब दुकान के आसपास लोग खुलेआम खड़े होकर शराब पीते मिले।
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महिलाओं और परिवारों की आवाजाही: इस मुख्य मार्ग से दिनभर महिलाओं, बच्चों और परिवारों की सघन आवाजाही रहती है, इसके बावजूद शराब के शौकीन बिना किसी डर के डिस्पोजल गिलास में शराब पीते नजर आए।
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रोक-टोक का अभाव: मौके पर पुलिस या आबकारी विभाग का कोई भी जिम्मेदार अमला इन सार्वजनिक शराबियों को रोकने या टोकने के लिए मौजूद नहीं दिखा।
🪜 लक्ष्मणपुरा में सीढ़ियां बनीं शराबखोरी का अड्डा: काउंटर के ठीक बगल में महफिल
दुकानों के आसपास नियम-कायदों की धज्जियां:
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सीढ़ियों पर जमे शराबी: लक्ष्मणपुरा स्थित शराब दुकान की पड़ताल में भी स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई, जहाँ दुकान के आसपास बनी सीढ़ियों पर बैठकर लोग आराम से शराब पी रहे थे।
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दुकान काउंटर के पास मयखाना: यह समूची गतिविधि शराब दुकान के मुख्य बिक्री काउंटर के बिल्कुल समीप संचालित हो रही थी, जिससे स्पष्ट है कि संचालकों का भी इन पर कोई नियंत्रण नहीं है।
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प्रशासनिक निष्क्रियता: आबकारी नियंत्रण दस्ता अथवा स्थानीय पुलिस द्वारा खुले में नशा करने वालों के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है।
📜 नीति बदली पर नहीं बदली जमीनी तस्वीर: चारदीवारी से निकलकर सड़क पर आई शराबखोरी
नई आबकारी नीति के उद्देश्य और वास्तविक परिणाम:
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नीति का मूल उद्देश्य: प्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति लागू करते हुए शराब दुकानों से जुड़े आहातों को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया था, ताकि दुकानों के आसपास अनियंत्रित जमावड़े और असामाजिक गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाई जा सके।
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सड़क पर आया नशा: जमीनी हकीकत यह है कि आहाते बंद होने से शराबखोरी बंद नहीं हुई, बल्कि जो नशा पहले चारदीवारी के भीतर सीमित था, वह अब सार्वजनिक सड़कों, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों के मुहाने पर पहुंच गया है।
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कानून-व्यवस्था को चुनौती: व्यस्त बाजारों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में खुलेआम शराबखोरी से न केवल सामाजिक वातावरण दूषित हो रहा है, बल्कि यह स्थिति शहर की शांति, यातायात सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।
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