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महाराष्ट्र निकाय चुनाव: निर्विरोध जीत पर चुनाव आयोग का डंडा, जांच होगी— ‘दबाव था या फिर लालच’?

महाराष्ट्र की 29 नगरपालिकाओं में 2869 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं. इस चुनाव में 33,606 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. हालांकि, चुनाव से पहले ही 66 पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं. निर्विरोध निर्वाचित होने वालों में कल्याण डोंबिवली नगर निगम के उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक है. ऐसा पहली बार हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं और इससे हलचल मच गई है.

विपक्ष की तरह सत्ताधारी दल ने भी इस मामले की जांच की मांग की है. वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इस पर गंभीरता से ध्यान देते हुए इस संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

राज्य में 9 साल बाद नगरपालिका चुनाव हो रहे हैं. इसलिए, सभी राजनीतिक दलों ने जीत के लिए कमर कस ली है. कुछ जगहों पर गठबंधन बन चुके हैं. कुछ जगहों पर तो खुद को मित्र कहने वाले दल भी आपस में भिड़ रहे हैं. हालांकि, चुनाव परिणाम आने से पहले ही राज्य में 68 पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं. इतनी बड़ी संख्या में पार्षदों के निर्विरोध चुने जाने से हलचल मची हुई है. जीतने वालों में से अधिकांश सत्ताधारी दल के हैं.

क्या कोई दबाव था?

विपक्ष ने इन सभी घटनाओं पर नाराजगी जताई है. सत्ताधारी दल ने भी मामले की जांच की मांग की है. वहीं, राज्य चुनाव आयोग ने उन नगरपालिकाओं से रिपोर्ट मांगी है जहां से उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं. निर्विरोध चुनावों पर विस्तृत रिपोर्ट दें. उम्मीदवारों ने अपना नाम कब वापस लिया? क्या उन पर कोई दबाव था? क्या उन्हें प्रलोभन दिया गया था? या उन पर किसी प्रकार का दबाव डाला गया था? राज्य चुनाव आयोग ने संबंधित अधिकारियों को जानकारी देने का आदेश दिया है.

रिपोर्ट कौन देगा?

एक अधिकारी ने बताया कि राज्य चुनाव आयोग ने रिपोर्ट मांगी है. अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट जमा होने और उसकी जांच होने के बाद ही चुनाव आयोग निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा करेगा. अधिकारी ने यह भी बताया कि कांग्रेस, जनता दल (सेकुलर) और आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुंबई के कोलाबा के तीन वार्डों में उम्मीदवारों को आवेदन दाखिल करने से रोकने के लिए दबाव डाला गया. अधिकारी ने यह भी बताया कि यह रिपोर्ट रिटर्निंग ऑफिसर, चुनाव प्रभारी और पुलिस कमिश्नर से मांगी गई है.

भाजपा नेता ने भी जांच की मांग

भाजपा नेता और राज्य मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी इस मामले की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा, “इस मामले की जांच होनी चाहिए. हमारे उम्मीदवारों को स्थानीय मुद्दों पर समर्थन मिला. अन्य उम्मीदवारों ने भी उनका समर्थन किया. इसीलिए वे निर्विरोध चुने गए. महागठबंधन के और अधिक सदस्य क्यों शामिल हुए? हमारे पार्षदों और दो इंजन वाली सरकार की वजह से विकास की राजनीति होगी. स्थानीय जनता और विपक्षी उम्मीदवारों को यह बात पता चल गई है. इसीलिए उन्होंने हमारा समर्थन किया है.”

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसा नहीं होता कि कोई किसी पर दबाव डाले और कोई अपना नामांकन वापस ले ले. महाराष्ट्र एक प्रगतिशील राज्य है. जिन उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस लिया है, उन्होंने वहां के विकास के मुद्दे पर ऐसा किया है. यह एक अच्छा कदम है. राज्य में ऐसा कदम उठाया जाना चाहिए. इससे विकास को गति मिलती है.

संजय राउत ने भी बोला हमला

ठाकरे समूह के सांसद संजय राउत ने इस पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि ये 66 उम्मीदवार निर्विरोध कैसे चुने गए. बराबर कीमत, बराबर जुर्माना का नया पैटर्न आ गया है. यह उसी का नतीजा है. एमएनएस के मनोज घरात को दी गई रकम बहुत बड़ी है. आप विश्वास नहीं करेंगे कि कितना पैसा दिया गया है. आवेदन वापस लेने की अंतिम तिथि आखिरी दिन दोपहर 3 बजे तक थी, लेकिन चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया था कि अगर आवेदन देर से भी वापस लिया जाता है, तो पिछली समय सीमा को दरकिनार करते हुए उसे स्वीकार कर लिया जाए.

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