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ब्यास नदी के बदलते रुख ने की तबाही, किसान के बहे आशियाने..

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सुल्तानपुर लोधी: ब्यास नदी ने रुख क्या बदला, इसने हमें तबाह कर दिया है। जिस घर को बड़ी मेहनत और लगन से 30 लाख रुपए की लागत से बनाया था, आज उसे अपने ही हाथों से गिराया जा रहा है। ये शब्द गांव रामपुर गोरा की एक बुजुर्ग मां और उनके पति ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ब्यास नदी पहले ही हमारे 9 घरों को तबाह कर चुकी है और अब हमारा 10वां घर ब्यास नदी के तेज प्रहार का सामना कर रहा है और किसी भी समय नदी में बहता पानी इस घर को भी नष्ट कर सकता है, इसलिए हम अपने घर का सामान खुद ही हटा रहे हैं क्योंकि घर बह जाने वाला है, इसलिए हम बहुत भारी मन से यह काम खुद ही कर रहे हैं, यह सोचकर कि कम से कम कुछ सामान तो बच जाए।

मेरा घर बचा लो, प्रशासन से गुहार लगाई थी लेकिन मेरी गुहार नहीं सुनी

बुजुर्ग महिला ने भावुक शब्दों में कहा कि मेरा घर बचा लो, जिसके लिए मैंने बार-बार डिप्टी कमिश्नर से गुहार लगाई थी लेकिन प्रशासन ने सिर्फ चक्कर लगवाकर अपना कर्तव्य पूरा किया और मेरी गुहार नहीं सुनी। 3 महीने हो गए हैं रोते हुए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं। नदी बहुत करीब आ गई है। लोग कहते हैं कि जब मुसीबत आए तो छत पर चढ़कर चिल्लाओ, शायद सरकार के कानों तक बात पहुंचे, लेकिन यह सरकार न केवल अवाक है बल्कि मूक भी है, जिसे किसी से कोई सहानुभूति नहीं है। यह सरकार मदद देने तो दूर आई है, लेकिन इसे हमारा दुख-दर्द तक नहीं सुनाई दिया। सरकार चाहे तो क्या नहीं कर सकती? बाढ़ प्रभावित लोगों ने कहा कि सरकार का काम यह सुनिश्चित करना है कि उसके लोग खुश रहें। वे अपने रास्ते में आने वाली किसी भी मुसीबत को दूर कर सकते हैं, लेकिन जब भी यह आम आदमी पार्टी की सरकार बनती है, उल्टी गंगा बह रही है। इस सरकार ने अभी तक कोरी बयानबाजी, ड्रामा और गंदी राजनीति के अलावा कुछ नहीं किया है।

पीड़ित परिवारों ने कहा कि बांध बनाना सरकार का काम है, लेकिन यह अजीब सरकार है, पीड़ित परिवारों को खुद बांध बनाने को कह रही है, उन्हें उनके हाल पर छोड़ रही है। सरकार चाहे तो नदी से मुंह मोड़ सकती है। रोटी, कपड़ा और मकान सरकार की जिम्मेदारी है।  चुनाव में लोग हर आंसू और ढहे हुए घर का हिसाब लेंगे। पीड़ित परिवार ने कहा कि चुनाव में अब बस कुछ ही समय बचा है, जब ये नेता हमारे पास वोट मांगने आएंगे, तो हम उनसे हर आंसू और ढहे हुए घर की हर ईंट का हिसाब मांगेंगे। हम उन्हें गांवों में घुसने नहीं देंगे।

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