Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
MIDI Health Analysis: Honest Understanding of Profiles and Experts in 2026 ‘गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत के बाद पंजाब में गैंगस्टरों से संबंधित हत्याओं में भारी कमी, गोलीबारी ... मुख्य मंत्री ने हॉलैंड के महान हॉकी खिलाड़ी फ्लोरिस जान बोवेलैंडर से की मुलाकात, पंजाब के खिलाड़ियों... Road Accident: जिस घर से उठनी थी बेटे की बारात, वहां से उठी पिता की अर्थी; शादी के कार्ड बांटने निकल... Indore Viral News: गले में वरमाला और शादी का जोड़ा पहन DM ऑफिस पहुंचा दूल्हा, बोला- 'दुल्हन कैसे लाऊ... Bihar Bridge Collapse: तीन बार गिरे सुल्तानगंज पुल में 'वास्तु दोष'? निर्माण कंपनी अब करवा रही चंडी ... Kolkata Hospital Fire: कोलकाता के आनंदलोक अस्पताल में भीषण आग, खिड़कियां तोड़कर निकाले गए मरीज; पूरे... Kota British Cemetery: कोटा में हटेगा 168 साल पुराना 'विवादित' शिलालेख, भारतीय सैनिकों को बताया था '... Novak Djokovic Virat Kohli Friendship: विराट कोहली के लिए नोवाक जोकोविच का खास प्लान, भारत आकर साथ म... Salman Khan Vamshi Film Update: वामशी की फिल्म में सलमान खान का डबल रोल? हीरो के साथ विलेन बनकर भी म...

दिल्ली में वायु प्रदूषण का कहर: हर सातवीं मौत की वजह बन रही दूषित हवा, BP और डायबिटीज से भी बड़ा स्वास्थ्य संकट

दिल्ली… देश की राजधानी… जहां लाखों लोग रोज अपने सपनों को आकार देते हैं. हर रोज इस उम्मीद के साथ आते हैं कि ये शहर उनके हर सपने को पूरा करेगा और उनकी जिंदगी को बेहतरी के रास्ते पर लेकर जाएगा. दिल्ली के लोगों के इन्हीं सपनों के बीच एक ऐसी परेशानी भी है जो साइलेंट किलर बनकर उनकी जिंदगी को दिन-ब-दिन खोखला कर रही है. ये जहर हर पल हर वक्त दिल्ली के लोगों के आसपास है और सांस लेने की हर प्रक्रिया के साथ शरीर के अंदर जहर बनकर घुल रहा है. इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) की ओर से जारी आंकड़ों ने इस खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2023 में दिल्ली में हुई कुल मौतों में से लगभग 15% मौतें वायु प्रदूषण से जुड़ी थीं. यानी राजधानी में हर सात में से एक व्यक्ति की मौत की वजह जहरीली हवा रही है.

यह आंकड़ा केवल चौंकाने वाला ही नहीं, बल्कि विचार करने वाला भी है कि हम जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वही अब हमारी जान ले रही है. पिछले पांच वर्षों में ऐसे मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिला है, जो दर्शाता है कि स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. साल 2018 में वायु प्रदूषण से संबंधित मौतों की संख्या 15,786 थी, जो 2023 में बढ़कर 17,188 हो गई. इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली की हवा में मौजूद जहर हर साल और अधिक खतरनाक होता जा रहा है.

दिल्ली में जहरीली हवा तेजी से ले रही जान

इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) की नई रिपोर्ट बताती है कि साल 2023 में दिल्ली में करीब 17,188 लोगों की मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुईं. इसका मतलब है कि राजधानी में हर सात में से एक व्यक्ति की मौत की वजह जहरीली हवा थी. यह आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए भी है क्योंकि 2018 में प्रदूषण से जुड़ी मौतों की संख्या 15,786 थी और पांच साल में यह बढ़कर 17,188 तक पहुंच गई. यह दिखाता है कि हवा की गुणवत्ता सुधरने के बजाय लगातार खराब हो रही है. दिल्ली की हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण सांस के साथ शरीर में घुसकर दिल, फेफड़ों और नसों को नुकसान पहुंचाते हैं. व्यक्ति को इसका तुरंत पता नहीं चलता, लेकिन धीरे-धीरे उसका शरीर कमजोर होने लगता है.

प्रदूषण पहले से मौजूद बीमारी को बना रहा और गंभीर

हालांकि प्रदूषण सबसे बड़ा खतरा है, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है. GBD स्टडी, जो दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य रिपोर्टों में से एक मानी जाती है. रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में मौतों के अन्य बड़े कारणों में हाई ब्लड प्रेशर, शुगर यानी हाई फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज, ज्यादा कोलेस्ट्रॉल और मोटापा भी शामिल हैं. वर्ष 2023 में राजधानी में 14,874 लोग उच्च रक्तचाप के कारण, 10,653 लोग डायबिटीज से, 7,267 लोग बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के कारण और 6,698 लोग बढ़े हुए वजन या मोटापे से जुड़ी समस्याओं के कारण जान गंवा बैठे. यानी हवा में घुला जहर लोगों के शरीर में पहले से मौजूद बीमारियों को और गंभीर बना देता है. हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि प्रदूषण और मौतों के बीच सीधा और पक्का सबूत मिलना मुश्किल है, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि यह स्थिति हमें सतर्क होने के लिए काफी है. दिल्ली की हवा हमारी सबसे बुनियादी जरूरत- सांस को ही खतरे में डाल रही है. अगर हवा के स्तर को नियंत्रित करने और प्रदूषण घटाने के लिए सख्त और लगातार कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में यह खतरा और बढ़ सकता है और लोगों की उम्र और जीवन की गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ेगा.

हर साल बढ़ रहा प्रदूषण से मरने वालों का ग्राफ

प्रदूषण से हर साल मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. साल 2022 में प्रदूषण से 16523 लोगों की मौत हुई थी जबकि साल 2024 में मौत का आंकड़ा 17188 है. इसी तरह साल 2021 में 18392 लोगों की मौत प्रदूषण के चलते हुई, जबकि 2020 में ये आंकड़ा 17035 था. साल 2019 में ये आंकड़ा 15231 था जबकि साल 2018 में 15786 लोगों की मौत का कारण प्रदूषण बताया गया. इसी तरह हाई ब्लड प्रेशर से साल 2023 में 14874 लोगों की मौत हुई जबकि साल 2022 में ये आंकड़ा 14157 था. साल 2021 में ये आंकड़ा 18344 जबकि 2020 में ये संख्या 16726 थी. हाई ब्लड शुगर (डायबिटीज) से साल 2023 में 10653 लोगों की मौत हुई जबकि साल 2022 में 10335 लोगों की मौत की वजह डायबिटीज रही. साल 2021 में ये आंकड़ा 11843, साल 2020 में 11040, साल 2019 में 8935 और साल 2018 में ये आंकड़ा 8938 रहा.

सात सालों से दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी

स्विस संगठन IQAir की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली विश्व की सबसे प्रदूषित राजधानियों में लगातार सात साल से पहले स्थान पर है. ऐसा होना यह दिखाता है कि वायु प्रदूषण अब एक साधारण पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य संकट बन चुका है. राजधानी में लाखों वाहन, धूल से भरी निर्माण गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन और सर्दियों के दिनों में पराली के धुएं ने मिलकर हवा को भारी और जहरीला बना दिया है.

यह जहरीली हवा उन लोगों पर ज्यादा प्रभाव डालती है जो अधिक समय बाहर रहते हैं- जैसे ऑटो-रिक्शा चालक, ट्रैफिक पुलिसकर्मी, मजदूर, रेहड़ी-फेरी वाले, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग. लंबे समय तक इस तरह की हवा में सांस लेने से शरीर में बदलाव शुरू हो जाते हैं जो धीरे-धीरे गंभीर रूप लेते जाते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, यह प्रदूषण दिल, फेफड़ों और दिमाग की नसों पर गहरा असर डालता है.

PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण बने साइलेंट किलर

हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण इतने छोटे होते हैं कि वे न केवल फेफड़ों तक पहुंचते हैं बल्कि खून की धारा के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाते हैं. ये कण शरीर में लगातार सूजन पैदा करते हैं. यही सूजन आगे चलकर दिल के दौरे, दमा, स्ट्रोक, कैंसर और फेफड़ों की दीर्घकालिक बीमारियों का कारण बनती है. डॉक्टर बताते हैं कि प्रदूषण से होने वाली मौतें अचानक नहीं होतीं. यह एक धीमी और लगातार चलने वाली प्रक्रिया होती है.

दिल्ली में प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियों, एलर्जी, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं के मामले आम हो चुके हैं. अस्पतालों में शीतकाल के महीनों में ऐसे मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. बच्चों में दमा और सांस की तकलीफ पहले की तुलना में अब अधिक देखने को मिलती है. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि यह स्थिति आगे भी ऐसे ही जारी रही, तो आने वाली पीढ़ियों का फेफड़ों की क्षमता कम हो सकती है.

सर्दियों में क्यों और खतरनाक हो जाती है समस्या?

दिल्ली में वायु प्रदूषण पूरे साल बना रहता है, लेकिन सर्दियों में स्थिति अत्यंत गंभीर हो जाती है. मेडिकल और वातावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंड के दिनों में हवा भारी हो जाती है और जमीन के पास रुक जाती है. इससे प्रदूषण ऊपर की ओर नहीं जा पाता और शहर के ऊपर धुंध की परत बन जाती है. इसके अलावा, आसपास के राज्यों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं दिल्ली की हवा पर और बोझ डाल देता है. कई दिनों तक शहर का आसमान काला-भूरा दिखाई देता है. स्कूल बंद होने लगते हैं और लोग बाहर मास्क लगाकर निकलने को मजबूर होते हैं. इस दौरान दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स अक्सर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाता है, जिसका अर्थ होता है कि यह हवा स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी नुकसानदेह है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.