ईरान को बड़ा झटका! आखिरी किला भी हो गया ध्वस्त, हूती हो गए बागी, तेहरान आर्मी की नहीं सुन रहे बात, मध्य-पूर्व में नया भूचाल
ईरान का आखिरी मजबूत किला यमन भी उसके हाथ से निकल गया है. दरअसल, ईरान हूती विद्रोहियों के जरिए यमन पर कंट्रोल कर रहा था, लेकिन अब हूती विद्रोहियों ने ईरान की बात को सुनने से इनकार कर दिया है. हूती के विद्रोही ईरान के अधिकारियों के निर्देश नहीं सुन रहे हैं.
ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ ने ईरान के अधिकारियों के हवाले से एक रिपोर्ट की है. इसमें कहा गया है कि पहले ईरान के निर्देश पर हूती के विद्रोही लाल सागर में जहाजों पर निशाना साध रहे थे, लेकिन कुछ दिनों से वे ईरान के निर्देश को नहीं मान रहे हैं. इसकी वजह से ईरान परेशान है.
ईरान के अधिकारियों का कहना है कि हूती के विद्रोही ऐसा व्यवहार कर रहे हैं, जैसे हम कभी उनसे संपर्क में ही नहीं थे. हूती के विद्रोही हमसे बात भी नहीं करना चाहते हैं.
ईरान का प्रॉक्सी संगठन है हूती
हूती ईरान का प्रॉक्सी संगठन है. उसे ईरान से फंड और हथियार मिलते हैं. हूतियों को ईरान मिसाइल, ड्रोन और बंदूक देता रहा है. बदले में हूती लाल सागर में इजराइल जाने वाले सभी जहाजों को मार गिराता है. हूती विद्रोहियों का साल 2014 से ही यमन पर कंट्रोल है.
हूती को सऊदी अरब का भी दुश्मन माना जाता है. हूती के विद्रोही सऊदी के तेल क्षेत्र में भी हमला करते रहे हैं, लेकिन बदले परिस्थिति में हूती के विद्रोहियों ने ईरान का ही साथ छोड़ दिया है. अब ईरान हूती विद्रोहियों को मनाने में जुटा है.
ईरान ने हूती विद्रोहियों को मनाने का जिम्मा कुर्द्स फोर्स के कमांडर अब्दोलरेजा शाहलई को सौंपा है. शाहलई का काम हूती के विद्रोहियों को मनाना है. ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक कमांडर भी सना गए थे, लेकिन बात नहीं बन पाई थी.
ईरान के हाथ से कैसे निकला हूती?
1. 2014 में हूती विद्रोहियों ने यमन पर कब्जा किया. तब से उसे ईरान से फंड मिलता रहा. ईरान उसे हथियार और सैटेलाइट जानकारी भी उपलब्थ करा रहा था. ईरान हूती विद्रोहियों के अलावा हमास और हिजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी संगठन भी तैयार कर रखा था. इन्हीं प्रॉक्सी संगठनों के जरिए 2023 में इजराइल पर अटैक किया गया, लेकिन यह प्रयोग उलटा पड़ गया.
इजराइल ने 2025 के मध्य तक हमास और हिजबुल्लाह को घुटनों पर ला दिया. दोनों संगठनों के शीर्ष नेतृत्व को मार दिया. इतना ही नहीं हूती के दूसरे सबसे बड़े कमांडर की भी इजराइल ने हत्या कर दी. यही वजह है कि अब हूती सतर्क हो गया है. हूती ईरान से बात कर अपनी मुसीबत नहीं बढ़ाना चाहता है.
2. ईरान कमजोर स्थिति में है. अमेरिका ने स्ट्राइक कर उसके परमाणु योजना को लगभग खत्म कर दिया है. रूस और चीन भी खुलकर ईरान का साथ नहीं दे रहा है. मिडिल ईस्ट में नए समीकरण भी बन रहे हैं. यह सबको देखते हुए हूती रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं. हूती के विद्रोही खुद को नए सिरे से संगठित कर रहे हैं. इजराइल से सीधी दुश्मनी लेने से बच रहे हैं.
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.