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Mandla News: मंडला के घायल तेंदुए ने तोड़ा दम, अस्पताल पहुंचने से पहले ही थमी सांसें

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मंडला: कान्हा टाइगर रिजर्व की दलदला बीट में घायल मिले नर तेंदुए की मौत हो गई है. शनिवार 14 फरवरी को गश्ती के दौरान वनकर्मियों को एक तेंदुआ दलदला बीट में घायल अवस्था में मिला था. जिसकी सूचना वन कर्मियों के गश्ती दल ने टाइगर रिजर्व प्रबंधन को दी थी. सूचना पर तत्काल एक टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए का रेस्क्यू कर प्राथमिक इलाज किया और उसे मुक्की अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में तेंदुए ने दम तोड़ दिया. जानकारों का कहना था कि तेंदुए की उम्र करीब 10 से 15 साल होती है. ऐसा प्रतीत होता है तेंदुआ अपनी आयु पूर्ण कर चुका था, जिससे उसकी मौत हो गई.

घायल तेंदुए की इलाज के दौरान हुई मौत

कान्हा टाइगर रिजर्व में लगातार तेंदुआ और वन्यजीवों की मौत हो रही है, जिससे रिजर्व प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं इन मौतों पर कान्हा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर तेंदुओं की मौत प्राकृतिक या फिर आपसी वर्चस्व की लड़ाई में होती है. वहीं जानकारों का मानना है पार्क प्रबंधन तेंदुए और अन्य वन जीवों की सुरक्षा व्यवस्था या अन्य संसाधनों पर ध्यान नहीं दे रहा है, जिसके चलते कान्हा टाइगर रिजर्व में लगातार वन्य जीवों की मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.

12 साल हो गई थी मृत तेंदुए की उम्र

कान्हा टाइगर रिजर्व के उप संचालक प्रकाश वर्मा ने बताया, “दलदला बीट में तेंदुआ घायल अवस्था में मिला था. जिसको रेस्क्यू कर वन कर्मी इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे. तभी रास्ते में तेंदुए की मौत हो गई.” साथ ही उन्होंने बताया, “तेंदुए की उम्र करीब 10 से 15 साल होती है. इस तेंदुए की उम्र 12 साल आंकी गई है. इससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह तेंदुआ अपनी आयु पूर्ण कर चुका था, जिस वजह से उसकी प्राकृतिक मौत हुई है.”

अलग-अलग कारणों से हुई तेंदुओं की मौत

जनवरी 2025 से लेकर अभी तक कोर जोन में 3 तेंदुए की मौत हुई है, तीनों की प्राकृतिक रूप से मृत्यु हुई है. इसमें कुछ तो बाघ के घनत्व वाला जो एरिया है उसमें तेंदुए बाघ से संघर्ष में मर जाते हैं. वहीं, कुछ तेंदुओं की प्राकृतिक रूप से मृत्यु होना पाया गया है. जैसा कि शनिवार 14 फरवरी वाली की घटना है.

12 से 15 साल होती है तेंदुए की आयु

वन अधिकारी प्रकाश वर्मा के मुताबिक तेंदुआ अपनी पूर्ण आयु कर चुका था, जिस वजह से उसकी मृत्यु हुई है. यह कोई अप्राकृतिक या शिकार वाली घटना नहीं है. यह प्राकृतिक मौत है क्योंकि वन्य प्राणियों की एक निश्चित उम्र होती है. जैसे तेंदुए की आयु 10-15 साल तक होती है. उनकी प्राकृतिक मौत 12 से 15 साल तक हो जाती है.”

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