झारखण्ड

Jharkhand News: डीजे पाबंदी के खिलाफ भाजपा विधायकों का प्रदर्शन, नेता प्रतिपक्ष ने लाउडस्पीकर और अज़ान का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरा

रांचीः बजट सत्र के दौरान झारखंड विधानसभा परिसर में हजारीबाग में मंगला जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर रोक और प्रशासनिक कारवाई का मुद्दा छाया रहा. जिला प्रशासन द्वारा डीजे को जब्त किए जाने के विरोध में भाजपा विधायक सरकार विरोधी नारे लगाते नजर आए. इस दौरान किसानों के धान खरीद और सरकारी राशन के वितरण में बड़े पैमाने पर हो रही अनियमितता को लेकर भाजपा विधायक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे.

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मौके पर कहा कि सरकार जान-बूझकर मार्च महीने तक धान की खरीद का समय सीमा रखती है, जिससे बिचौलिए लाभान्वित हो सके. उन्होंने कहा कि जिस तरह से कंप्यूटर ऑपरेटर के द्वारा फर्जी तरीके से किसानों के नाम पर धान खरीद का मामला पिछले दिनों प्रकाश में आया. इसके बावजूद भी सरकार नहीं चेती और मार्च महीने तक इस बिचौलिए के लिए जारी रखा.

लाउडस्पीकर से अजान सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या नहीं करता उल्लंघन- बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार को हर दिन लाउडस्पीकर के जरिए सुबह 4:30 बजे होनेवाले अजान से परहेज नहीं है. वहीं रामनवमी जैसे त्योहार में बजने वाले डीजे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर जब्त किया जा रहा है जबकि कोर्ट ने स्पष्ट रुप से कहा है कि रात 10 बजे से सुबह 06 बजे तक लाउडस्पीकर नहीं बजेगा. उन्होंने कहा कि इसी से सरकार की मानसिकता का पता चलता है कि वह किस तरह से भेदभाव कर रही है.

वहीं भाजपा विधायक शशि भूषण मेहता ने कहा कि रामनवमी का त्यौहार हरसोलश के साथ झारखंड में मनाया जाता है ऐसे में यदि गाजा बाजा के साथ लोग नहीं से मनाएंगे तो आखिर कैसे मनाएंगे प्रशासन को चाहिए कि डीजे की अनुमति दे और इसे ना रोके.भाजपा विधायक पूर्णिमा दास ने सरकार के कामकाज की आलोचना करते हुए कहा कि अपनी कमियों को छुपाने के लिए सदर में विभाग के मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक जोर-जोर से बोलने लगते हैं. जब भी यह जोर से बोलते हैं इसका मतलब है कि यह आपकी कमी को छुपाने के लिए ऐसा कर रहे हैं. आज हालात यह है कि राशन दुकान में किरोसिन तेल की बात छोड़िए चीनी, नमक जैसे जरूरी चीज नहीं मिल रही है, जो अनाज दिए जा रहे हैं उसमें भी गड़बड़ियां हैं जब यह सवाल उठाया जाता है तो सरकार के अधिकारी और मंत्री सुनने को तैयार नहीं होते हैं.

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