दुनियाभर में तेल संकट की आहट! ईरान ने ‘होर्मुज’ के लिए रखी नई शर्त; अब डॉलर नहीं, इस करेंसी में होगा तेल का सौदा!
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सीमित रूप से जाने देने पर विचार कर रहा है. लेकिन इसके लिए एक शर्त रखी जा सकती है. ईरान सोच रहा है कि कुछ तेल टैंकरों को होर्मुज से गुजरने दिया जाए, लेकिन तेल का व्यापार अमेरिकी डॉलर की बजाय चीन की मुद्रा युआन में किया जाए. ये जानकारी एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने CNN को दी है. सूत्रों के मुताबिक, तेहरान इस समय एक नई योजना बना रहा है, जिसके जरिए वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही को नियंत्रित करना चाहता है. अगर यह योजना लागू होती है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में युआन का इस्तेमाल बढ़ सकता है.
3 साल में सबसे ज्यादा कीमत
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. इसी वजह से यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार को तुरंत प्रभावित करता है. हाल के तनाव के कारण तेल की कीमतें जुलाई 2022 के बाद सबसे ज्यादा स्तर तक पहुंच गई हैं. यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो गया था. तब भी तेल की कीमतें बढ़ी थीं.
दुनिया में ज्यादातर तेल का व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है. हालांकि रूस पर लगे प्रतिबंधों के बाद उसका कुछ तेल रूबल या युआन में भी बेचा जा रहा है. पिछले कुछ सालों में चीन लगातार कोशिश कर रहा है कि अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में युआन का इस्तेमाल बढ़े. खासकर सऊदी अरब से तेल खरीदते समय चीन कई बार युआन में भुगतान की बात कर चुका है. फिर भी फिलहाल अमेरिकी डॉलर ही दुनिया की सबसे मजबूत और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है. युआन को अभी तक वैश्विक बाजार में उतनी स्वीकृति नहीं मिली है.
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से रूस को फायदा
दरअसल, ईरान ने युद्ध शुरू होने के कुछ समय बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही को रोक दिया था. इससे दुनिया में तेल की कमी की चिंता बढ़ गई. इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए रूस के तेल सेक्टर पर लगे कुछ प्रतिबंधों में आंशिक ढील दी. इससे रूस को तेल बेचकर ज्यादा कमाई होने लगी. माना जा रहा है कि यह पैसा रूस अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में लगाएगा, जिससे यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध पर भी असर पड़ सकता है.
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