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शहडोल के लिए ऐतिहासिक दिन! मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ अपना ब्लड सेंटर, अब MBBS की सीटें भी होंगी डबल; जानें आम जनता को क्या होगा फायदा

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शहडोल: शहडोल मेडिकल कॉलेज के लिए शक्रवार का दिन बहुत बड़ा रहा. लंबे अरसे से जिसका इंतजार था आखिर वह पूरा हुआ. प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने शहडोल जिले में ब्लड सेंटर का फीता काटकर शुभारंभ किया है. क्योंकि मेडिकल कॉलेज में इसकी बहुत ज्यादा जरूरत थी. अब जरूरतमंदों को कहीं और जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मेडिकल कॉलेज में ही ब्लड मिल जाएगा. उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मेडिकल कॉलेज में सीटें बढ़ाने की योजना पर भी जानकारी दी.

शहडोल मेडिकल कॉलेज को बड़ी सौगात
उपमुख्यमंत्री और शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि, ”शहडोल मेडिकल कॉलेज में ब्लड सेंटर की स्थापना हो गई है. इसमें 600 यूनिट ब्लड स्टोरेज की क्षमता रहेगी. ब्लड सेपरेशन के माध्यम से एक व्यक्ति जब ब्लड डोनेट करेगा तो चार लोगों का उसका फायदा मिल सकेगा. शहडोल मेडिकल कॉलेज के लिए ये एक बहुत बड़ी सुविधा है जिसका शुभारंभ हो गया है.”

शहडोल मेडिकल कॉलेज में बढ़ेगी सीटें
शहडोल मेडिकल कॉलेज के ब्लड सेंटर के शुभारंभ के अवसर पर राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि, ”शहडोल मेडिकल कॉलेज में सीटें बढ़ाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है, यहां अभी एमबीबीएस की 100 सीटें हैं, जिसे बढ़ाकर 200 सीट करने की योजना है. इसके अलावा शहडोल मेडिकल कॉलेज में 6 सीटें हैं, उसे 71 सीट करने की योजना है. इसके लिए नेशनल मेडिकल कमिशन में आवेदन भी लगा दिया गया है. इस तरह से अब शहडोल मेडिकल कॉलेज जो बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना जाता है, वो ऊंचाइयों पर पहुंचेगा और यहां आदिवासी अंचल में मरीजों को इसका फायदा मिल सकेगा.”

इलेक्ट्रिक शॉक देकर बचाई महिला की जान
शहडोल जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों के हाथ बड़ी सफलता लगी है. टप्पू बाई नाम की एक मरीज जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी. तभी इलेक्ट्रिक शॉक देकर शहडोल जिला चिकित्सालय की टीम ने उसकी जान बचाई. जहां अब उसका निरंतर उपचार चल रहा है.

शहडोल जिला चिकित्सालय की सिविल सर्जन डॉक्टर शिल्पी सराफ बताती हैं कि, ”उमरिया जिले के अमेलिहा गांव पाली की रहने वाली टप्पू बाई यादव गंभीर तौर पर बीमार थीं, जिन्हें उपचार के लिए शहडोल जिला चिकित्सालय में अचानक ही भर्ती कराया गया था. उनकी कंडीशन बहुत खराब थी.

डॉक्टर ने टप्पू बाई की पहले अलग अलग जांच कराई, जिसमें पाया गया कि टप्पू बाई को हार्ट की बीमारी है और उसका स्वास्थ्य बहुत ज्यादा खराब है. फिर डॉक्टरों की टीम ने टप्पू बाई को 120 जूल का इलेक्ट्रिक शॉक दिया. जैसे ही ये शॉक दिया गया, उनके जान में जान आ गई. फिर सभी आपातकालीन दवाइयां डॉक्टर की निगरानी में देनी शुरू कर दी गई. आलम ये था कि टप्पू बाई यादव का दिल फिर से धड़कने लगा, जिसे देखकर उनके परिजनों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई.”

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