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दुश्मनों की अब खैर नहीं! ड्रोन से लैस होंगे भारतीय सेना के टैंक, ‘शौर्य स्क्वाड्रन’ बना हाईटेक ताकत

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भारतीय सेना ने अपने टैंक रेजिमेंट्स में ड्रोन टेक्नोलॉजी को शामिल करते हुए नई शौर्य स्क्वाड्रन की शुरुआत की है. इसका मकसद युद्धों में टैंकों की क्षमता बढ़ाना है. यह कदम भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. बताया जा रहा है कि सेना ने यह फैसला हाल के युद्धों से सबक लेकर लिया है.

बीते दिनों अमेरिका-इजराइल और ईरान, रूस-यूक्रेन युद्ध, ऑपरेशन सिंदूर और गाजा संघर्ष जैसे युद्धों से समझ में आया कि अब सिर्फ टैंक, तोप और पैदल सेना से युद्ध नहीं जीता जा सकता. पैदल सेना और तोपखाने के बाद अब भारतीय सेना के बख्तरबंद रेजिमेंट भी अपनी अलग ड्रोन यूनिट बनाने जा रहे हैं. इन्हें शौर्य स्क्वाड्रन का नाम दिया गया है. इसका मकसद युद्धों में टैंकों की क्षमता बढ़ाना है. सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस पहल को और तेजी दी गई. इससे पहले इन्फैंट्री में अश्नी प्लाटून भी बनाई गई थीं.

6 शौर्य स्क्वाड्रन तैयार, ताकत का प्रदर्शन

सूत्रों के मुताबिक, सेना ने करीब 6 शौर्य स्क्वाड्रन तैयार कर लिए हैं, जिन्हें अलग-अलग कमांड्स में तैनात भी किया जा रहा है. इन स्क्वाड्रन का काम ड्रोन के जरिए दुश्मन की निगरानी करना, टारगेट पर हमला करना और रियल-टाइम जानकारी जुटाना है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के बबीना में हुए Amogh Jwala Exercise में इन शौर्य स्क्वाड्रन की ताकत का प्रदर्शन किया गया. इस युद्धाभ्यास में टैंक, अटैक हेलीकॉप्टर, फाइटर जेट और ड्रोन को एक साथ इस्तेमाल कर मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की क्षमता को परखा गया.

क्या है शौर्य स्क्वाड्रन?

शौर्य स्क्वाड्रन एक कंपनी स्तर की ड्रोन यूनिट है. उसे सीधे टैंकों के साथ फ्रंटलाइन पर काम करना है. एक आर्मर्ड कंपनी में करीब 10-12 टैंक और 100 से ज्यादा सैनिक होते हैं. बताया जा रहा है कि इन स्क्वाड्रन में सैनिकों को खास तौर पर ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी जा रही है. इनके पास सर्विलांस ड्रोन, अटैक ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे आधुनिक हथियार हैं. ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ हमले ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, माइंस बिछाने और हटाने, सप्लाई और मेडिकल मदद जैसे कामों में भी किया जाएगा. ड्रोन को टैंकों के साथ जोड़ने से सेना को दुश्मन की पोजिशन, मूवमेंट और हथियारों की सटीक जानकारी मिलेगी, जिससे हमले और ज्यादा प्रभावी हो सकेंगे.

टैंक और ड्रोन गेम चेंजर

फिलहाल भारतीय सेना के पास 67 से ज्यादा आर्मर्ड यूनिट्स हैं, जिनमें 5000 से ज्यादा टैंक शामिल हैं. इनमें T-90 भीष्म, T-72 अजेय और अर्जुन Mk1A जैसे टैंक शामिल हैं. सेना अब आने वाले समय में शौर्य स्क्वाड्रन की संख्या और बढ़ाने की तैयारी में है, जिससे टैंक रेजिमेंट्स की ताकत और भी बढ़ सके. मौजूदा जंगों को देखते हुए कहा जा रहा है कि हर लड़ाई में ड्रोन अब बहुत जरूरी हो गए हैं. वे अब गेम चेंजर बन चुके हैं. जिसने मार्डन वॉर फेयर की दिशा ही बदल दी है. लिहाजाअब सेना ने तय किया है कि वह सिर्फ टैंक या आर्मर्ड व्हीकल पर निर्भर नही रहेंगे बल्कि ड्रोन से लैस होकर अपनी मारक क्षमता को और घातक बनायेंगे .

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