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Damoh News: 40 डिग्री की तपती गर्मी में 15KM दंडवत यात्रा, माता के दरबार पहुंचे श्रद्धालु

दमोह: दसौंदी ग्राम के बलखंडन माता के दरबार में लोग 15 किलोमीटर तक आस्था का दंड लगाते हैं. भीषण गर्मी में आस्था और विश्वास का यह दंड कई पीढ़ियों से चला आ रहा है. यह मंदिर तेंदूखेड़ा ब्लॉक में स्थित है. रामनवमी पर यहां हर साल मेला लगता है. इस खास दिन पर लोग दंडवत भरकर अपनी मन्नत पूरी करने आते हैं.

15 किमी से दंडवत पहुंचते हैं लोग

तेंदूखेड़ा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत दिनारी के दसौंदी गांव में वनखण्डन खेरमाता मंदिर है. यहां माता के दर्शनों के लिए लोग 15 किलोमीटर तक भरी गर्मी में दंडवत करते हुए पहुंचे. यह जिले का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां पर मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त दंड भरते हुए मंदिर में जाते हैं और अपनी भेंट रखकर माता के दर्शन करते हैं. सालों से यहां पर रामनवमी के अवसर पर विशाल मेला लगता है और उसी दिन भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद दंड भरकर मंदिर तक जाते हैं.

झुलसा देने वाली गर्मी में भी फीकी नहीं पड़ी आस्था

यह मंदिर अपनी विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र बिंदु है. बताया जाता है कि दसौंदी से वनखंडन माता मंदिर की दूरी करीब 15 किलोमीटर है. इस समय दमोह में करीब 40 डिग्री तापमान बना हुआ है. ऐसे में आज रामनवमी के अवसर पर गांव के सैकड़ों महिला-पुरुष, बच्चे और वृद्ध तपती सड़क पर दंड भरते हुए माता की दरबार में पहुंचते हैं. अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस झुलसा देने वाली गर्मी में जहां लोग नंगे पैर चलते हैं, तो छाले पड़ जाते हैं, उस वक्त दंड भरते हुए 15 किलोमीटर का सफर कितना कठिन होता होगा, लेकिन यह गर्मी और कठिनाई आस्था के सामने फीकी पड़ती दिखाई देती है.

जंगल के बीचे बीच बसा यह मंदिर

कभी जंगल के बीचो-बीच बसा यह मंदिर वनखंडन के नाम से जाना जाता था. जिसका अर्थ होता है वन में बसने वाली देवी, लेकिन अपभ्रंश होते-होते अब यह मंदिर बलखंडन माता के नाम से प्रसिद्ध हो गया है. इस ग्राम की 90 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है और यहां का हिंदू देवी माता मंदिर लोगों के लिए धर्म और आस्था का केंद्र है. चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर भक्त यहां खुले शरीर दंड भरकर दरबार तक जाते हैं और माता के चरणों में हाजरी लगाते है.

यहां पर जो भक्त दंड भरते हुए हाजिरी लगाते हैं, उनके लिए ऐसा नियम है कि वह केवल मर्म स्थल ढकने के लिए धोती लपेटते हैं, बाकि पूरा शरीर उनका खुला रहता है. ऐसे में दंड भरते समय उन्हें कंकड़, पत्थर, कांटे इत्यादि भी चुभ जाते हैं. इसके बाद भी उनकी आस्था और विश्वास पर जरा भी फर्क नहीं पड़ता है.

मनोकामना पूरी होने के बाद लगाई हाजिरी

दिनारी सरपंच प्रतिनिधि भोजराज जैन ने बताया कि “बलखंडन खेरमाता का मंदिर धार्मिक आस्थाओं के साथ चमत्कार का भी केंद्र है. यहां हर भक्त अपनी मनोकामना लेकर आते हैं. जिनकी मनोकामना पूर्ण होती है, वह चैत्र नवरात्र पर्व में दंड भरकर परिक्रमा करते हैं. वहीं नवमी को ज्वार विसर्जन के साथ प्रसाद वितरण व भंडारा होता है. जिसमें बड़ी संख्या में आसपास की ग्रामीण क्षेत्र से हजारों लोग पहुंचते हैं.”

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