Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
‘गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत के बाद पंजाब में गैंगस्टरों से संबंधित हत्याओं में भारी कमी, गोलीबारी ... मुख्य मंत्री ने हॉलैंड के महान हॉकी खिलाड़ी फ्लोरिस जान बोवेलैंडर से की मुलाकात, पंजाब के खिलाड़ियों... Road Accident: जिस घर से उठनी थी बेटे की बारात, वहां से उठी पिता की अर्थी; शादी के कार्ड बांटने निकल... Indore Viral News: गले में वरमाला और शादी का जोड़ा पहन DM ऑफिस पहुंचा दूल्हा, बोला- 'दुल्हन कैसे लाऊ... Bihar Bridge Collapse: तीन बार गिरे सुल्तानगंज पुल में 'वास्तु दोष'? निर्माण कंपनी अब करवा रही चंडी ... Kolkata Hospital Fire: कोलकाता के आनंदलोक अस्पताल में भीषण आग, खिड़कियां तोड़कर निकाले गए मरीज; पूरे... Kota British Cemetery: कोटा में हटेगा 168 साल पुराना 'विवादित' शिलालेख, भारतीय सैनिकों को बताया था '... Novak Djokovic Virat Kohli Friendship: विराट कोहली के लिए नोवाक जोकोविच का खास प्लान, भारत आकर साथ म... Salman Khan Vamshi Film Update: वामशी की फिल्म में सलमान खान का डबल रोल? हीरो के साथ विलेन बनकर भी म... Crude Oil Supply: भारत के लिए खुशखबरी! इराक और सीरिया का 15 साल से बंद बॉर्डर खुला, क्या अब और सस्ता...

झारखंड का महुआ अब बनेगा ‘इंटरनेशनल ब्रांड’! फूड ग्रेन उत्पादन शुरू, दुनिया भर के बाजारों में मचेगी धूम

0

पलामू: झारखंड में फूड ग्रेन महुआ का उत्पादन शुरू हो गया है. इस महुआ को नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट में भेजने की तैयारी चल रही है. इसके लिए पलामू टाइगर रिजर्व और JHAMCOFED ने मिलकर इसके उत्पादन को लेकर एक योजना तैयार की है.

शुरुआती चरण में, झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में 200 पेड़ों को एडॉप्ट किया गया है, जिसमें बढ़निया गांव को इसका नोडल बनाया गया है. इसके लिए ग्रामीणों को फूड ग्रेन महुआ के उत्पादन की ट्रेनिंग दी गई है और एसओपी बताए गए हैं. जिसके बाद ग्रामीण इसका उत्पादन कर रहे हैं. महुआ का इस्तेमाल चॉकलेट और बिस्कुट जैसी कई डिश और पकवान बनाने में किया जाएगा और इसे बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा. पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में एक महुआ प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया जाएगा.

क्या है फूड ग्रेन महुआ?

झारखंड के विभिन्न इलाकों में मार्च में पेड़ों से महुआ के फूल गिरने लगते हैं. जिसके बाद ग्रामीण ये फूल चुनते हैं, लेकिन अक्सर उनमें मिट्टी और धूल मिल जाती है. इस तरह के महुआ से हाइजीनिक डिश बनाना बहुत मुश्किल है. फूड ग्रेन महुआ के लिए स्पेशल प्रोसिजर अपनाया गया है.

इसके तहत पलामू टाइगर रिजर्व में ग्रामीणों के बीच जाल का वितरण किया गया है. महुआ के फूल इसी जाल पर गिरते हैं, जिससे धूल और मिट्टी के कण फूल में नहीं मिल पाते. फिर इस महुआ को इसी जाल पर सुखाया जाता है. सूखने के बाद महुआ फूड ग्रेन के रूप में तैयार होता है. जिससे हाइजीनिक डिश तैयार किया जाता है. बाजार में ग्रामीण महुआ आमतौर पर 30 से 35 रुपये प्रति किलो बेचते हैं. पलामू टाइगर रिजर्व फूड ग्रेन महुआ 70 रुपये प्रति किलो खरीद रहा है. जो गांव वालों से इको डेवलपमेंट समिति के जरिए खरीदा जाता है.

महुआ से बनी डिशेज और पकवानों को नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट में भेजने की तैयारी चल रही है. फूड ग्रेन महुआ के लिए एक एसओपी बनाया गया है. इसके लिए एक प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की भी योजना है. ग्रामीणों के बीच जाल बांटा गया है. पलामू टाइगर रिजर्व इको-डेवलपमेंट कमेटी के जरिए ये फूड ग्रेन महुआ खरीद रहा है. शुरुआती दौर में लगभग 200 पेड़ों को अडॉप्ट किया गया है और ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी गई है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ग्रामीण महुआ के लिए जंगल में आग नहीं लगाएंगे. इससे बनी आदिवासी डिशेज को भी प्रमोट किया जाएगा. स्थानीय ग्रामीण इससे कई पकवान भी बनाते हैं. – प्रजेशकांत जेना, उपनिदेशक, पीटीआर

पहली बार फूड ग्रेन महुआ का शुरू हुआ है उत्पादन

झारखंड में पहली बार फूड ग्रेन महुआ का उत्पादन शुरू हुआ है. गांव के लोग इसे लेकर उत्साहित हैं. पहली बार गांव के लोगों को इसकी ज्यादा कीमत मिलेगी. अब गांव के लोग पेड़ों के नीचे जाल लगाकर महुआ इकट्ठा कर रहे हैं. पलामू टाइगर रिजर्व इलाके में 180 गांव हैं. हर गांव के पास करीब 1,000 महुआ के पेड़ हैं. मार्च के पहले हफ्ते से अप्रैल तक गांव की पूरी अर्थव्यवस्था इसी पर निर्भर करती है. हर ग्रामीण जंगल में जाकर महुआ चुनता है. दो साल पहले गांव के लोगों के बीच जाल बांटने का प्लान बनाया गया था. यहीं से फूड ग्रेन महुआ के उत्पादन की नई शुरुआत हुई है.

जमीन में गिरने वाले महुआ को लोग खाने लायक नहीं समझते थे. अब हाइजीनिक तरीके से इसका उत्पादन शुरू हुआ है. इसके कई फायदे हैं. इसकी मांग नेशनल एवं इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ रही है. ग्रामीणों को इसके बारे में जानकारी दी गई है और उन्हें इसके फायदे भी बताएं गए हैं. – समीर, वनरक्षी

जाल से कई फायदे हो रहे हैं, महुआ चुनने में काफी वक्त लगता था लेकिन अब वक्त भी कम लग रहा है और इसके पैसे भी अधिक मिल रहे हैं. ग्रामीण काफी उत्साहित हैं. – मैरी, ग्रामीण, बढनिया

महुआ चुनने के लिए ग्रामीण लगाते हैं आग

दरअसल, महुआ चुनने के लिए ग्रामीण जंगल में आग लगाते हैं. पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में प्रति वर्ष 300 से भी अधिक आगजनी की घटनाएं रिकॉर्ड की जाती रही हैं. फूड ग्रेन महुआ के उत्पादन शुरू होने के बाद ग्रामीण जंगलों को कम नुकसान पहुंचाएंगे और वहां आग नहीं लगाएंगे.

ग्रामीण महुआ चुनने के लिए जंगल में आग लगा देते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. वे काफी उत्साहित हैं और अन्य ग्रामीणों को भी इससे जोड़ रहे हैं. उन्हें अब इसके पैसे भी अधिक मिल रहे हैं. महुआ चुनने में भी काफी आराम हो रहा है – लूकस टोप्पो, ग्रामीण

महुआ से बने भोजन स्वास्थ्य के लिए हैं काफी फायदेमंद

महुआ से बने भोजन भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इसके फूलों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व होते हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं. इसे प्रोसेस करके कई आयुर्वेदिक दवाएं भी बनाई जाती हैं. स्थानीय ग्रामीण बड़े चाव से महुआ के बने पकवान खाते हैं. महुआ के पेड़ को जीवनदायी वृक्ष भी कहा जाता है.

महुआ के कई फायदे हैं. इसमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन होता है. यह सेहत के लिए भी बहुत अच्छा होता है और इसे खाने से कई फायदे मिलते हैं. आयुर्वेद में महुआ को कल्प वृक्ष भी कहा जाता है, यह जीवन वृक्ष है. – डॉ. मनीष कुमार, आयुर्वेदिक डॉक्टर

अवैध शराब के निर्माण में होता है महुआ का इस्तेमाल

झारखंड-बिहार में महुआ सबसे अधिक शराब के लिए बदनाम है. ग्रामीण स्तर पर इससे बनी शराब का बड़े पैमाने पर कारोबार होता है. शराब कारोबारी ग्रामीणों से बेहद ही कम दर पर महुआ खरीदते हैं. सीजन की शुरुआत के साथ ही इससे जुड़े हुए लोग ग्रामीणों के बीच जाते हैं और महुआ खरीदने की कोशिश करते हैं. सीजन के अंत में इसकी कीमत बढ़ जाती है. 1942 के अकाल के दौरान अविभाजित बिहार में महुआ लोगों के जीने का एक बहुत ही बड़ा साधन बना था.

Leave A Reply

Your email address will not be published.