Local & National News in Hindi

14वीं JPSC परीक्षा धांधली पर बाबूलाल मरांडी का सीएम हेमंत सोरेन पर तीखा हमला, बोले—’CID जांच सबूत मिटाने की साजिश’

27

रांची: राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री और वर्तमान में झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 14वीं जेपीएससी (JPSC) परीक्षा गड़बड़ी मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर करारा हमला बोला है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इस मामले में सीआईडी (CID) जांच सच को सामने लाने के लिए नहीं, बल्कि सबूतों को पूरी तरह मिटाने के लिए कराई जा रही है।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार ही इस पूरी गड़बड़ी की मुख्य सूत्रधार है। उन्होंने साफ किया कि राज्य सरकार का सीधा मतलब मुख्यमंत्री होता है। अगर मुख्यमंत्री इस पूरे मामले में पूरी तरह निष्पक्ष और पाक-साफ हैं, तो उन्हें सीबीआई (CBI) जांच से इतनी आपत्ति क्यों है? मुख्यमंत्री को तुरंत पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप देनी चाहिए।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि JPSC की 14वीं सिविल सर्विस परीक्षा की ओएमआर (OMR) शीट में गड़बड़ी का यह मामला कोई मामूली भूल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित घोटाला है। यह मेधावी युवाओं का भविष्य चौपट करने और अयोग्य व भ्रष्ट लोगों को अधिकारी बनाने के लिए रचा गया था। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देखने-सुनने में यह बहुत अच्छा लग रहा है कि राज्य सरकार त्वरित कार्रवाई कर रही है, सीआईडी जांच हो रही है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं, लेकिन सच यह नहीं है। सच्चाई यह है कि यह सब केवल लीपापोती और मामले को दबाने का प्रयास है।

🔍 सीआईडी जांच के नाम पर किया जा रहा आईवॉश, जांच पूरी होते ही बेनकाब होंगे बड़े चेहरे: बाबूलाल

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य के नौजवानों के साथ जो अन्याय किया गया है, वह बहुत बड़ा अपराध है। सीआईडी जांच छात्रों को न्याय दिलाने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के साथ धोखाधड़ी करने वाले माफियाओं को बचाने के लिए की जा रही है। सत्ता में बैठे लोग यह भली-भांति जानते हैं कि जिस दिन इस मामले की निष्पक्ष जांच हो जाएगी, उस दिन सारे बड़े चेहरे बेनकाब हो जाएंगे और इसके लपेटे में पर्दे के पीछे छिपे तमाम रसूखदार लोग गिरफ्त में आएंगे। इसलिए सीआईडी जांच के नाम पर केवल जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है।

📁 ‘सबूत मिटाने के लिए मारे जा रहे हैं छापे’, सीआईडी के ट्रैक रिकॉर्ड पर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि शराब घोटाले से लेकर जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) सहित अन्य मामलों में सीआईडी जांच के ट्रैक रिकॉर्ड का मूल्यांकन कर लीजिए, सारी स्थिति अपने आप स्पष्ट हो जाएगी। सीआईडी जांच की विश्वसनीयता का इतिहास रहा है कि वह कभी किसी तार्किक निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती और न ही समय पर चार्जशीट दाखिल कर पाती है। शराब घोटाले में कागजों का जिस प्रकार हेर-फेर किया गया, इस मामले में भी पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के आवास पर छापामारी व अन्य सारी कार्रवाई सब उसी कवायद का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सीआईडी अधिकारी सारे साक्ष्यों को समाप्त करने के लिए छापे मार रहे हैं।

📋 कमजोर धाराओं में दर्ज एफआईआर पर भी दागे सवाल, एफआईआर को सार्वजनिक करने की मांग

बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले में कहा कि जेपीएससी घोटाला मामले में एफआईआर (FIR) किसके बयान पर दर्ज की गई है, इसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। एफआईआर का पब्लिक डोमेन में न होना और इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत पंजीकृत न किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। जानबूझकर एफआईआर की धाराओं को कमजोर किया जा रहा है, ताकि बाद में दोषियों को इसका सीधा लाभ मिल सके।

👮 सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक की कार्यशैली पर खड़े किए गंभीर सवाल

उन्होंने सीआईडी के अपर महानिदेशक (ADG) मनोज कौशिक की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया और कहा कि मनोज कौशिक अभी मुख्यमंत्री के काफी पसंदीदा अफसर बने हुए हैं और उन्हें एक साथ तीन-तीन महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने मनोज कौशिक को सलाह देते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री के पूर्व के अधिकारियों का हश्र देख लें, उनका भी यही हाल होने वाला है। उन्होंने कहा कि सीआईडी झारखंड के होनहार बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना तुरंत बंद करे।

🚨 JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की अविलंब गिरफ्तारी की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि कर्नाटक के एक छात्र ने जनवरी माह में ही JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को पत्र लिखकर OMR शीट में गड़बड़ी और एजेंसी के कर्मचारी की संदिग्ध कारस्तानी के संबंध में आगाह किया था। इसके पूर्व भी रेंज अफसर परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जानकारी उन्हें दी गई थी, लेकिन दोनों मामलों में उन्होंने कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। केवल पद से इस्तीफा देकर वह अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकते। राज्य सरकार को एल. ख्यांग्ते के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें तत्काल गिरफ्तार करना चाहिए।

💸 ‘झारखंड में अफसर बनने के लिए देने पड़ते हैं 40 लाख रुपये’, बाबूलाल का सनसनीखेज दावा

बाबूलाल मरांडी ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड में एक प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए 40 लाख रुपये तक की घूस ली जाती है। उनके पास मौजूद जानकारी के अनुसार, पीटी (PT) परीक्षा पास कराने के लिए 5 लाख, मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए 25 लाख रुपये और साक्षात्कार (Interview) पास कराने के लिए 10 लाख रुपये—यानी कुल 40 लाख रुपये प्रति सीट वसूले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी संवेदनशील पदों पर ऐसे ही विवादित और भ्रष्ट अफसरों की तैनाती कर रखी है।

🏛️ पूरे मामले की निष्पक्ष CBI जांच की उठी पुरजोर मांग

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि झारखंड में जहां से राज्य के नीति-निर्धारकों और प्रशासनिक अधिकारियों का चयन होता है, अगर उसी गरिमामयी संस्थान में भ्रष्ट लोग बैठे रहेंगे तो झारखंड का भविष्य कभी नहीं संवर सकता। जब बुनियाद ही भ्रष्ट होगी तो राज्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगेगा? इसलिए बिना किसी विलंब के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सुपुर्द करें, ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सके और असली गुनहगारों को जेल भेजा जा सके।

📢 सीआईडी को बताया सरकार की कठपुतली, नौकरियों की बिक्री का लगाया आरोप

उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफा दिलवा देने से समाधान नहीं होता। सीआईडी पूरी तरह से राज्य सरकार की कठपुतली बनकर काम कर रही है। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड सरकार के शासनकाल में कोई भी भर्ती परीक्षा विवादों से परे नहीं रही है और राज्य में खुलेआम सरकारी नौकरियां बेची जा रही हैं। इस संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.