OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख: केंद्र को अंतरिम राहत से इनकार, 11 मार्च के फैसले पर मांगा गया था स्पष्टीकरण
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) क्रीमी लेयर निर्धारण से जुड़े 11 मार्च के ऐतिहासिक आदेश में स्पष्टीकरण और आवश्यक संशोधन के लिए उसी बेंच के गठन का अनुरोध किया।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में केंद्र को कोई भी अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि वे संबंधित पीठ से इस विषय पर विचार-विमर्श करेंगे। शीर्ष अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि सरकार पूर्व में पारित 11 मार्च के आदेश में संशोधन के साथ-साथ क्रीमी लेयर की मूल परिभाषा को भी बदलने की मांग कर रही है।
💼 केंद्र सरकार का पक्ष: ‘ड्राइवर-चपरासी के बच्चे भी आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगे’
केंद्र सरकार की दलीलें और चिंताएं:
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वेतन को आधार मानने पर आपत्ति: केंद्र सरकार का तर्क है कि यदि 11 मार्च के आदेश के अनुरूप केवल माता-पिता के वेतन को पैमाना माना गया, तो इससे व्यापक स्तर पर ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
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निम्न आय वर्ग पर संकट: सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में बैंक, पीएसयू या निजी क्षेत्र में कार्यरत ड्राइवर, चपरासी, क्लर्क आदि श्रेणी के कर्मचारियों के बच्चे भी आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगे।
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EWS और OBC NCL का अंतर समाप्त: केंद्र ने यह भी दलील दी कि इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर (OBC NCL) के बीच का अंतर लगभग समाप्त हो जाएगा।
📜 क्या था सुप्रीम कोर्ट का 11 मार्च का ऐतिहासिक फैसला?
सर्वोच्च अदालत के निर्णय के मुख्य बिंदु:
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समानता का सिद्धांत: जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया था कि क्रीमी लेयर तय करने के लिए माता-पिता के केवल वेतन को एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता।
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भेदभाव पर रोक: कोर्ट ने माना कि पीएसयू, बैंक या निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों को केवल इसलिए आरक्षण के लाभ से वंचित करना कि उनकी सैलरी सीमा से अधिक है, संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत प्रदत्त समानता के मौलिक अधिकार के विरुद्ध है।
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UPSC उम्मीदवारों को राहत: इस निर्णय से विशेष रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा के उन लगभग 100 ओबीसी अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी थी, जिनके दावों को डीओपीटी (DoPT) ने क्रीमी लेयर नियमों के तहत निरस्त कर दिया था।
🏛️ केंद्र ने SC से मांगे स्पष्ट दिशा-निर्देश, पूर्वव्यापी प्रभाव पर जताई चिंता
डीओपीटी की अपील और आगामी कदम:
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2016 के बाद के मामलों पर प्रभाव: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने वर्ष 2016 के बाद चयनित करीब 100 यूपीएससी उम्मीदवारों के दावों पर पुनर्विचार करने के अदालती आदेश के क्रियान्वयन को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
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पूर्वव्यापी प्रभाव का मुद्दा: सरकार ने फैसले के पूर्वव्यापी (Retrospective) प्रभाव और प्रशासनिक जटिलताओं के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट से उचित व व्यावहारिक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
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