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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का नया पैंतरा: सर्विलांस से बचने के लिए अश्लील साइट्स और Tor आधारित सीक्रेट ऐप्स का इस्तेमाल

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जम्मू-कश्मीर: घाटी में ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए आतंकी नेटवर्क संचालन के खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवादियों और उनके पाकिस्तानी हैंडलर्स की एक नई और बेहद खतरनाक डिजिटल रणनीति का पर्दाफाश किया है।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठनों के हैंडलर्स अब सुरक्षा बलों की डिजिटल सर्विलांस और ट्रैकिंग से बचने के लिए सामान्य सोशल मीडिया के बजाय अश्लील वेबसाइट्स और विशेष एन्क्रिप्टेड एप्लीकेशन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

पीटीआई (PTI) के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद रियल-टाइम चैट और नियरबाय डेटिंग फीचर्स की आड़ में नए रंगरूटों को निर्देश दिए जा रहे हैं और आतंकी गतिविधियों का समन्वय किया जा रहा है।

🔒 टॉर नेटवर्क और बिना सिम वाले विदेशी ऐप्स पर बढ़ा भरोसा: प्राइवेसी टूल्स का दुरुपयोग

डिजिटल टूल्स और तकनीकी तरीका:

  • टॉर आधारित मैसेजिंग: आतंकी हैंडलर्स डेटा को एन्क्रिप्टेड नोड्स के जरिए रूट करने और अपनी पहचान छुपाने के लिए कोटेक्स और कॉनियन जैसे टॉर-बेस्ड (Tor-based) मैसेजिंग ऐप्स का सहारा ले रहे हैं।

  • बैन ऐप्स का इस्तेमाल: भारत में प्रतिबंधित कॉनियन के APK और अन्य विदेशी ऐप्स को वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) के जरिए अवैध रूप से डाउनलोड किया जा रहा है।

  • बिना नंबर वाले विदेशी ऐप: हैंडलर्स फ्रांस और वियतनाम के ऐसे प्राइवेसी ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें अकाउंट बनाने के लिए किसी सिम कार्ड या फोन नंबर की आवश्यकता नहीं होती।

🌐 डार्क वेब और गुप्त चैट फीचर्स: सर्विलांस से बचने के लिए बदला रूट

साइबर सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष चुनौतियां:

  • मूनचैट और PGP एन्क्रिप्शन: एजेंसियां मूनचैट जैसे गुमनाम प्लेटफॉर्म्स और चीनी मूल के PGP-एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर कड़ी नजर रख रही हैं, जो पारंपरिक यूजर रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह बायपास कर देते हैं।

  • Tor रिले नोड्स: सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, टॉर नेटवर्क डेटा के ओरिजिन और डेस्टिनेशन को छुपाने के लिए दुनियाभर के वालंटियर रिले नोड्स के जरिए ट्रैफिक को बाउंस करता है, जिससे आईपी एड्रेस ट्रैक करना बेहद जटिल हो जाता है।

  • युवाओं का ब्रेनवॉश: सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकी समूह घाटी के युवाओं को बरगलाने, कट्टरपंथी बनाने और नए लड़ाकों की भर्ती के लिए इन ऑफ-ग्रिड प्लेटफॉर्म्स का लगातार रुख कर रहे हैं।

🛡️ WhatsApp छोड़ RSA-2048 एन्क्रिप्शन और सेल्फ-डिस्ट्रक्ट मैसेजिंग पर शिफ्ट

तकनीकी एन्क्रिप्शन और सुरक्षा फीचर्स:

  • कन्वेंशनल ऐप्स से दूरी: आतंकी अब WhatsApp, Facebook Messenger और Signal जैसे मुख्यधारा के मैसेजिंग ऐप्स से पूरी तरह दूरी बना रहे हैं।

  • एडवांस्ड सिक्योरिटी: इसके स्थान पर वे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, सेल्फ-डिस्ट्रक्टिंग (गायब होने वाले) मैसेज और RSA-2048 जैसे सैन्य-ग्रेड एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम वाले प्लेटफॉर्म चुन रहे हैं, जिनका डेटा केवल यूजर की डिवाइस पर ही प्रोसेस होता है।

📶 2G नेटवर्क स्पीड में भी एक्टिव: वर्चुअल सिम कार्ड का डिजिटल जाल

कम इंटरनेट स्पीड और वर्चुअल पहचान का इस्तेमाल:

  • धीमी स्पीड पर कार्य: सुरक्षा एजेंसियों ने पाया है कि ये विशेष एप्लीकेशन्स घाटी में धीमी 2G या EDGE नेटवर्क स्पीड पर भी सुचारू रूप से कार्य करते हैं, जिससे दुर्गम इलाकों में भी संवाद बना रहता है।

  • वर्चुअल सिम कार्ड का प्रयोग: सुरक्षा बल विदेशी कंपनियों द्वारा तैयार किए गए वर्चुअल सिम कार्ड्स के इस्तेमाल को ट्रैक करने में जुटे हैं, जो बिना किसी फिजिकल सिम के स्मार्टफोन पर सक्रिय हो जाते हैं और डिजिटल फुटप्रिंट लगभग शून्य छोड़ते हैं।

  • पुलवामा हमले की तर्ज पर साजिश: उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 के पुलवामा आतंकी हमले की एनआईए (NIA) जांच में भी जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों द्वारा 40 से अधिक वर्चुअल सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि हुई थी।

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