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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर लगा सरकारी बैन रद्द; ‘आर्टिकल 21 का उल्लंघन’

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चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार के 10 जून के उस विवादास्पद आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसमें राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर सितंबर तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।

अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल सरकारी सेवा में होने के आधार पर नागरिकों के एक पूरे वर्ग की निजी विदेश यात्रा पर रोक लगाना स्पष्ट रूप से मनमाना और असंवैधानिक है।

📜 ‘बेवजह राई का पहाड़ बनाया’: अनुच्छेद 21 के तहत विदेश यात्रा मौलिक अधिकार

न्यायालय की तल्ख टिप्पणी और संविधान का हवाला:

  • संवैधानिक मर्यादा: न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि वर्तमान मामले के तथ्य यह दर्शाते हैं कि सरकार ने ‘बेवजह राई का पहाड़ बनाया’, जो हमारे संवैधानिक न्यायशास्त्र में पूरी तरह अस्वीकार्य है।

  • अनुच्छेद 21 का उल्लेख: अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के नज़ीरों का हवाला देते हुए दोहराया कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

  • असंगत प्रतिबंध: अदालत ने पाया कि सरकार द्वारा निजी यात्राओं पर लगाया गया यह पूर्ण प्रतिबंध उसके बताए गए उद्देश्य की तुलना में बेहद असंगत है।

👩‍⚕️ पीजीआईएमएस रोहतक की नर्सिंग ऑफिसर की याचिका पर फैसला: ऑस्ट्रेलिया जाने की मिली अनुमति

मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता का पक्ष:

  • व्यावसायिक परीक्षा के लिए आवेदन: रोहतक स्थित पीजीआईएमएस (PGIMS) में 23 फरवरी 2021 से कार्यरत एक नर्सिंग अधिकारी ने ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य नियामक एजेंसी द्वारा आयोजित ‘ऑब्जेक्टिव स्ट्रक्चर्ड क्लिनिकल एग्जामिनेशन’ (OSCE) के लिए आवेदन किया था।

  • वीजा मिलने के बाद छुट्टी से इनकार: वैध वीजा और अनुमति मिलने के बाद जब याचिकाकर्ता ने 18 अगस्त से अर्जित अवकाश (Earned Leave) मांगा, तो अधिकारियों ने 10 जून के सरकारी आदेश का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया था। अदालत ने अब उन्हें ऑस्ट्रेलिया जाने की औपचारिक अनुमति देने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

🌐 सरकार की दलील खारिज: मितव्ययिता के नाम पर नहीं छीनी जा सकती निजी स्वतंत्रता

सरकारी पक्ष और अदालत का निष्कर्ष:

  • सरकार का तर्क: राज्य सरकार के वकील ने दलील दी थी कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के चलते मितव्ययिता उपाय (Austerity Measure) के रूप में यह अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था, जिसमें केवल चिकित्सा कारणों से यात्रा को छूट दी गई थी।

  • तर्कसंगत संबंध का अभाव: अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपने उद्देश्य और कर्मचारियों की निजी विदेश यात्रा पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बीच कोई ठोस व तर्कसंगत संबंध साबित करने में विफल रही है।

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