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Tech News Updates: व्हाट्सऐप पर आया बिल पेमेंट फीचर, NPCI के रिकॉर्ड UPI आंकड़ों के बीच मेटा ने लॉन्च की नई सर्विस

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नई दिल्ली: सोशल मीडिया दिग्गज मेटा के स्वामित्व वाले लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप ने भारत में यूटिलिटी बिल पेमेंट सुविधा को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है।

इस नई सुविधा के अंतर्गत उपयोगकर्ता मैसेजिंग ऐप छोड़े बिना ही अपने दैनिक घरेलू बिलों जैसे बिजली, पानी, एलपीजी गैस, फास्टैग, बीमा और क्रेडिट कार्ड बिल का सुरक्षित भुगतान कर सकेंगे। व्हाट्सऐप ने स्पष्ट किया कि ‘भारत कनेक्ट’ (पूर्व में BBPS) नेटवर्क के साथ साझेदारी में शुरू की गई इस सेवा के माध्यम से देश भर के 22,722 से अधिक अधिकृत बिल जारी करने वाले संस्थानों तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराई गई है।

📈 अगस्त 2026 में UPI का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 24.51 अरब ट्रांजैक्शन के साथ नया शिखर

डिजिटल भुगतान के आधिकारिक आंकड़े:

  • मासिक रिकॉर्ड: एनपीसीआई (NPCI) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में यूपीआई प्रोसेसिंग ने नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया है, जिसमें कुल ट्रांजैक्शन संख्या 24.51 अरब दर्ज की गई।

  • लेनदेन का मूल्य: इस अवधि में कुल 29.82 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय लेन-देन दर्ज हुई, जो जुलाई की तुलना में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।

  • सालाना उछाल: पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 22% तथा कुल मूल्य में 20% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है, जिससे औसत दैनिक लेन-देन बढ़कर 79.1 करोड़ तक पहुंच गया है।

⚡ चैट इंटरफेस में ही निपटाएं सारे काम: एंड्रॉइड और आईओएस दोनों पर रोलआउट जारी

प्लेटफॉर्म की उपलब्धता और आसान संचालन:

  • चरणबद्ध उपलब्धता: कंपनी ने बताया कि यह सुविधा पूरे भारत में चरणबद्ध तरीके से जारी की जा रही है और आगामी हफ्तों में एंड्रॉइड तथा आईओएस के सभी सक्रिय वर्जनों पर सुलभ हो जाएगी।

  • एक ही स्थान पर नियंत्रण: उपयोगकर्ता चैट होम स्क्रीन पर शीर्ष पर दिए गए ‘रुपये’ (₹) आइकन पर टैप करके बिलर्स जोड़ सकते हैं, पिछले भुगतानों का विवरण देख सकते हैं और आगामी देय तिथियों को ट्रैक कर सकते हैं।

  • सुरक्षित माध्यम: उपभोक्ता अपनी प्राथमिक पसंद के अनुसार यूपीआई, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से तुरंत भुगतान संपन्न कर सकते हैं।

🚇 ‘संदेश भेजने जितना आसान होगा बिल भरना’: मेटा इंडिया प्रमुख अरुण श्रीनिवास का बयान

मेटा का दृष्टिकोण और डिजिटल समावेशन:

  • दैनिक जीवन का हिस्सा: मेटा (भारत) के प्रबंध निदेशक एवं क्षेत्रीय प्रमुख अरुण श्रीनिवास ने कहा कि व्हाट्सऐप पहले से ही बातचीत, नागरिक सेवाओं, मेट्रो टिकट और रिचार्ज का माध्यम बना हुआ है।

  • अलग ऐप्स से मुक्ति: उन्होंने कहा कि इस नई सुविधा का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को विभिन्न बिलों के लिए अलग-अलग ऐप्स डाउनलोड करने और देय तिथियों के झंझट से मुक्ति दिलाना है।

  • ग्रामीण पहुंच: कंपनी का लक्ष्य देश के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों तक डिजिटल यूटिलिटी पेमेंट्स को चैट जितना सहज बनाकर पहुंचाना है।

🛠️ व्हाट्सऐप बिल पेमेंट के प्रमुख फीचर्स और इस्तेमाल करने की आसान प्रक्रिया

उपयोगकर्ता मार्गदर्शिका और सुविधाएं:

  • ऑटोमैटिक बिल फेच: जिन बिलर्स का भुगतान पहले किया जा चुका है, उनके बिल स्वतः फेच होकर स्क्रीन पर दिखेंगे।

  • मल्टीपल अकाउंट्स: एक ही सर्विस प्रोवाइडर के अंतर्गत घर, दुकान अथवा कार्यालय के अलग-अलग उपभोक्ता खातों को एक साथ प्रबंधित किया जा सकता है।

  • भुगतान का सीधा तरीका:

    • व्हाट्सऐप खोलकर होम स्क्रीन पर स्थित ‘₹’ आइकन पर टैप करें।

    • बिल श्रेणी और संबंधित बिलर का चयन करें।

    • उपभोक्ता खाता संख्या दर्ज कर विवरण की पुष्टि करें।

    • स्क्रीन पर प्रदर्शित बिल राशि की जांच करें।

    • भुगतान विधि (UPI/कार्ड) चुनकर प्रक्रिया पूर्ण करें।

🌐 एक दशक में 12,000 गुना बढ़ा UPI: वैश्विक स्तर पर 49% रियल-टाइम पेमेंट्स भारत में

यूपीआई नेटवर्क का विस्तार और वैश्विक साख:

  • दशक की ऐतिहासिक यात्रा: अप्रैल 2016 में 21 बैंकों के साथ शुरू हुए यूपीआई नेटवर्क से अब 700 से अधिक बैंक जुड़े हैं। वित्त वर्ष 2016-17 में 2 करोड़ ट्रांजैक्शन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 24,161 करोड़ के पार पहुंच गया।

  • वैश्विक दबदबा: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार, विश्वभर में होने वाले कुल रियल-टाइम पेमेंट्स वॉल्यूम का लगभग 49% हिस्सा अकेले भारत के यूपीआई द्वारा प्रोसेस किया जाता है।

  • अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता: वर्तमान में यूपीआई यूएई, सिंगापुर, फ्रांस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस और कतर सहित 8 देशों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

  • खुदरा पैठ: कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में मर्चेंट पेमेंट्स (P2M) की हिस्सेदारी 63% है, जिनमें 86% लेन-देन ₹500 से कम के हैं, जो आम जनजीवन में डिजिटल भुगतान की गहरी स्वीकार्यता को प्रमाणित करते हैं।

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