नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश): नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत मध्य प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान ने बेहद पारंपरिक और कलात्मक अंदाज में किया है।
कृषि प्रधान भारत की समृद्ध माटी और परंपरा को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करते हुए ग्राम सुपरली के किसान योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी ने अनाज के दानों से इन दिग्गज नेताओं के सजीव चित्र उकेरे हैं। किसान योगेंद्र पाल सिंह का कहना है कि वे अपनी इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों को ई-मेल और डिजिटल माध्यमों के जरिए नई दिल्ली स्थित संबंधित देशों के दूतावासों तक प्रेषित करेंगे, ताकि भारतीय किसान की यह कला और सम्मान उन तक पहुँच सके।
🖼️ पुतिन, शी जिनपिंग और प्रिंस सलमान: इन वैश्विक नेताओं की बनाई गईं सजीव तस्वीरें
अनाज से उकेरे गए प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों के चित्र:
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रूस व चीन के राष्ट्राध्यक्ष: कलाकृतियों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भव्य पोट्रेट शामिल हैं।
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पश्चिम एशिया के प्रमुख नेता: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस व प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के चित्र तैयार किए गए हैं।
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इंडोनेशिया और मिस्र: इसके अतिरिक्त इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी की तस्वीरें भी बड़ी सूक्ष्मता से बनाई गई हैं।
🎨 भारतीय कृषि संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास: कई दिनों की कठिन मेहनत
कलाकृति के निर्माण और उद्देश्य का विवरण:
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दिन-रात का समर्पण: किसान योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी पिछले कई दिनों से लगातार ब्रिक्स नेताओं की अनाज आधारित कलाकृतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए थे।
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संस्कृति का संदेश: उन्होंने बताया कि इस अनोखी कला का मुख्य उद्देश्य विश्व पटल पर यह संदेश देना है कि भारत में अनाज केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि जीवन दर्शन, परंपरा और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
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पारंपरिक स्वागत भाव: भारत के “अतिथि देवो भव:” के संस्कार को एक किसान की जीवनशैली से जोड़कर विदेशी मेहमानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया है।
🥣 मोटे अनाज (श्री अन्न) को बढ़ावा: रागी, कोदो, बाजरा और कुटकी का विशेष इस्तेमाल
प्रयुक्त सामग्री और प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरणा:
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पारंपरिक मोटे अनाजों का उपयोग: इन तस्वीरों को प्राकृतिक रंग और आकार देने के लिए रागी, बाजरा, राजगिरा, कोदो, कुटकी, धान, गेहूं, तिल और खसखस जैसे देसी अनाजों के दानों का संयोजन किया गया है।
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श्री अन्न मुहिम का प्रभाव: किसान सोलंकी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मिलेट्स (मोटे अनाज) के पोषण और उत्पादन को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय अभियान से वे बेहद प्रेरित हुए हैं।
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आकर्षक रूप: रासायनिक रंगों के बजाय विविध अनाजों के प्राकृतिक रंगों का संतुलन बनाकर इन चित्रों को अद्भुत और आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया है।
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