Indore Metro News: टीबीएम मशीन से होगी भूमिगत सुरंग की खुदाई, गोयल नगर के रहवासियों ने हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर के बाद अब मेट्रो को जमीन के 90 फीट नीचे दौड़ाने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं. इंदौर मेट्रो के लिए अंडरग्राउंड टनल की खुदाई शुरू होने जा रही है, जो जमीन के अंदर 40 फीट से 90 फीट की गहराई तक खुदेगी. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा इस परियोजना को विस्तार दिया जा रहा है, और इंदौर में पहली बार टनल बोरिंग मशीन (TBM) के माध्यम से भूमिगत मेट्रो सुरंग का निर्माण किया जाएगा.
⚙️ 2. आधुनिक मिक्स्ड फेस शील्ड टीबीएम मशीन से होगा सुरंग का निर्माण, अंदर लगाई जाएंगी स्थायी प्रीकास्ट आरसीसी रिंग्स
दुनियाभर में अंडरग्राउंड मेट्रो रूट बनाने के लिए अत्याधुनिक टीबीएम यानी टनल बोरिंग मशीन का उपयोग किया जाता है, जो सबसे सुरक्षित और प्रभावी तकनीक मानी जाती है. यहां मिक्स्ड फेस शील्ड टीबीएम के जरिए लगभग 9 से 28 मीटर की गहराई में सुरंग बनाई जाएगी, जिसका व्यास करीब 5.8 मीटर होगा. मशीन के आगे बढ़ने के साथ ही सुरंग के भीतर स्थायी प्रीकास्ट आरसीसी रिंग्स लगाई जाएंगी, जिससे संरचना को अंदर से पूर्ण मजबूती मिलेगी.
🏘️ 3. गोयल नगर क्षेत्र में अंडरग्राउंड टनल की खुदाई का विरोध, स्थानीय रहवासियों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की कही बात
एक तरफ जहां मेट्रो प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं शहर के पूर्वी क्षेत्र में अंडरग्राउंड खुदाई शुरू होने से पहले ही स्थानीय स्तर पर विरोध के सुर उठने लगे हैं. गोयल नगर क्षेत्र के रहवासियों का कहना है कि टनल खुदाई के कारण उनके इलाके के 5 से 6 हजार मकान भूमिगत रूप से प्रभावित हो सकते हैं. रहवासियों का आरोप है कि मेट्रो कंपनी को काम शुरू करने से पहले चर्चा करनी चाहिए थी और घरों को नुकसान होने पर मुआवजे की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी, जिसके लिए वे हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर कर रहे हैं.
🛡️ 4. मेट्रो प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का किया दावा, 30 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों का होगा सर्वे और मॉनिटरिंग
तनाव और विरोध के बीच मेट्रो रेल के पीआरओ धीरज शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि निर्माण के दौरान आमजन और संरचनाओं की सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं. सुरंग निर्माण क्षेत्र के आसपास लगभग 30 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों का सर्वे किया जाता है और विशेष सेंसर लगाकर जमीन या भवनों में होने वाले मामूली बदलावों पर भी बारीकी से नजर रखी जाती है. प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक और असत्य जानकारी पर विश्वास न करें, क्योंकि निर्माण कार्य पूरी तरह से उच्च तकनीकी और सुरक्षा मानकों के तहत किया जा रहा है.
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