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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की, काशी विश्वनाथ कॉरीडोर मामले से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज : जल्दी ही बनेगा ये गलियारा

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लंबे समय से रुका हुआ काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण अब जल्दी हो सकेगा।  इसके निर्माण कार्य में कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई थी और इसे  रोकने के लिए हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल  की थी । लेकिन  इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने  इन्हें खारिज कर दिया। आपको  बता दें कि इससे पहले इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने एक मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और अगला आदेश आने तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, काशी में विश्वनाथ मंदिर से लेकर गंगा तक एक गलियारा बनाया जाना था जिसका मकसद यह था कि श्रद्धालु गंगा में स्नान कर आसानी से काशी विश्वनाथ के मंदिर पहुंच सकें। क्योंकि मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते बहुत सकरें हैं और श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में बहुत कठिनाई होती थी।  जिसे देखते हुए प्रधानमंत्री का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था कि इस रास्ते को चौंड़ा बनाने के साथ ही मंदिर के सौंदर्य को भी बढ़ाया जाएगा।

लेकिन जब इसक ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने का कार्य शुरू हुआ तो उसके आस -पास के घरों को खरीदकर ढहाया जाने लगा इसके अंदर कुछ पुराने  ऐतिहासिक मंदिर भी आ गए जिससे वहां के लोगों और उन मंदिर के  पुजारियों ने  आपत्ति जताई और इसके विरोध  में  कुल  सात याचिकाएं डाल दी। उनका कहना है कि अगर सरकार श्रद्धालुओं की सहूलियत चाहती है तो ब्रिज का  निर्माण क्यूं नहीं कर देती। लेकिन हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल और न्यायमूर्ति अमित थालेकर की दो सदस्यीय खंडपीठ ने बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए सातों याचिकाओं को खारिज कर दिया और मंदिर प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया ।

सीधे संपर्क में आएंगे, गंगा और काशी विश्वनाथ मंदिर

दरअसल काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के निर्माण के लिए दिसंबर 2017 में 600 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई थी और अब तक इसके लिए प्रशासन को 183 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। इसके तहत मंदिर के प्रांगण का विस्तार करने के लिेए कॉरिडोर को बनाना होगा , जिससे काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा नदी एक दूसरे के सीधे संपर्क में आ जाएंगे और लोग सीधे गंगा स्नान करने के बाद दर्शन करने आ सकेंगे।

हरिद्वार स्थिति हरि की पौड़ी की तर्ज पर  बनाए जा रहे इस कॉरिडोर के निर्माण  से पहले ही  यह परियोजना विवादों से  घिर गई थी।  इस योजना के तहत ललिता  घाट तक जाने वाले 700 मीटर के रास्ते के चौड़ीकरण में लगभग 300 माकानों को  ढहाया जाना था।

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