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ब्रम्ह मुहूर्त में अभी भी सभी के कष्टों को देखने आते हैं देवर्षी नारद, प्रसन्नता के लिए करना चाहिए पूजा, जानिए क्या है पूजा की विधि और उपाय …

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रायपुर. भविष्य पुराण के अनुसार, मनुष्य के दाएं यानी सीधे हाथ में 5 ऐसी जगह होती हैं जो बहुत ही खास होती हैं. धर्म ग्रंथों में इन्हें 5 तीर्थ कहा गया है. इन तीर्थों से ही मनुष्य देवताओं, पितृ व ऋषियों को जल चढ़ाते हैं.
1. देवतीर्थ- इस तीर्थ का स्थान चारों उंगलियों के ऊपरी हिस्से में होता है. इस तीर्थ से ही देवताओं को जल अर्पित करने का विधान है.

2. पितृतीर्थ- तर्जनी (पहली उंगली) और अंगूठे के बीच के स्थान को पितृतीर्थ कहते हैं. इससे पितरों को जल अर्पित किया जाता है.
3. ब्राह्मतीर्थ- हथेली के निचले हिस्से (मणिबंध) में ब्राह्मतीर्थ होता है. इस तीर्थ से आचमन (शरीर शुद्धि के लिए पानी पीना) किया जाता है.
4. सौम्यतीर्थ- यह स्थान हथेली के बीचों-बीच होता है. भगवान का प्रसाद व चरणामृत इसी तीर्थ पर लेते हैं व यहीं से ग्रहण भी करते हैं.
5. ऋषितीर्थ- कनिष्ठा (छोटी उंगली) के नीचे वाला हिस्सा ऋषितीर्थ कहलाता है. विवाह के समय हस्तमिलाप इसी तीर्थ से किया जाता है.
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, नारद मुनि ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक माने गए हैं. ये ब्रह्म-मुहूर्त में सभी जीवों की गति देखते हैं और अजर-अमर हैं. भगवद-भक्ति की स्थापना तथा प्रचार के लिए ही इनका आविर्भाव हुआ है. उन्होंने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया है.
देवर्षि नारद धर्म इसी कारण सभी युगों में, सब लोकों में, समस्त विद्याओं में, समाज के सभी वर्गो में नारद जी का सदा से प्रवेश रहा है. देवो से लेकर सभी के कष्टों को जानकर भगवान से उनके दुख का वर्णन कर उनके लिए सुख का रास्ता निकालने का कार्य नारद ने किया. भगवान नारद अभी भी ब्रम्ह मुहूर्त में सभी के कष्ट देखने आते हैं अतः अगर किसी के जीवन में कष्ट है तो उसे आज के दिन ब्रम्ह तीर्थ से ब्रम्ह मुहूर्त में भगवान नारद के लिए अर्ध्य देना चाहिए और अपने दुखों को उन्हें सुनाना चाहिए.
इस प्रकार करने से भगवान नारद शिव-पार्वती जी के सामने आपके दुखो का वर्णन कर आपके लिए उन दुख को कम करने और सुख को बढ़ाने का प्रयत्न करेंगे. इस लिए आज प्रातःकाल ब्रम्ह मुहूर्त में जागकर स्नान आदि से निवृत होकर भगवान नारद की प्रसन्नता के लिए पूजा करना चाहिए.
पूजा विधि
नारद और विष्णु का विधिवत पंचोपचार पूजन करें. पीतल के दिए में घी का दीपक जलायें, धूप जलायें, हल्दी से तिलक करें, पीले फूल चढ़ाएं, मोतीचूर के लड्डु का भोग लगाएं, पूजा के बाद भोग का ब्राह्मण को दान करें.
मंत्रः
॥ॐ नमो नारदाय नमः॥ का 108 जाप करें. सभी तीर्थो से भगवान नारद को अर्ध्य देकर आरती करने के उपरांत दान करें एवं प्रसाद लें, उपरांत अपने मन के भावों को भगवान नारद से कहें.
उपाय
नारद पर चढ़ा लाल सुनहरा पेन जेब में रखने से परीक्षा में सफलता मिलेगी.
नारद जी पर चढ़े 2 मौली घर के मेन दरवाजे पर बांधने से पारिवारिक क्लेश से मुक्ति होती है.
नारद पर चढ़ी केसर से रोज तिलक करने से बुद्धि का विकास होता है .

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