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मिडिल ईस्ट पर मंडराया महायुद्ध का खतरा: अमेरिका की ‘जंग’ में पिसेंगे ये 8 मुस्लिम देश, ईरान तनाव से मचेगा हाहाकार

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. ईरान में इन दिनों विरोध प्रदर्शन बढ़ रहा है. जानकारी के मुताबिक, देश में अब तक विरोध प्रदर्शन में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. वहीं, हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं. ट्रंप कह चुके हैं कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा जाएगा तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा. अमेरिका की धमकी के बाद अब ईरान ने भी धमकी दे दी है. ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका तेहरान पर हमला करता है, तो ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल पर अटैक करेगा.

हाल ही में ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका तेहरान पर हमला करता है, तो ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल को जवाबी कार्रवाई के लिए वैध टारगेट (‘legitimate targets’) मानेगा. वो इन पर अटैक करेगा. इसी बीच जानते हैं कि अमेरिका के मिडिल ईस्ट के किन देशों में सैन्य ठिकाने हैं.

किन 8 देशों में मचेगा त्राहिमाम

अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है तो मिडिल ईस्ट के इन 8 देशों में त्राहिमाम मचेगा. ईरान की इस चेतावनी से यह आशंका बढ़ गई है कि मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने, जो पहले से ही तनाव में हैं वहां बड़ा संघर्ष हो सकता है.

रॉयटर्स एजेंसी के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को अपने वरिष्ठ सलाहकारों से ईरान को लेकर विकल्पों पर चर्चा करने वाले हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इन विकल्पों में सैन्य हमले, गुप्त साइबर हथियारों का इस्तेमाल, प्रतिबंधों को और सख्त करना और सरकार विरोधी समूहों को ऑनलाइन मदद देना शामिल है.

ट्रंप ने रविवार को कहा कि वो ईरान में इंटरनेट बहाल करने को लेकर अरबपति एलन मस्क से बात करने की योजना बना रहे हैं. ट्रंप के ईरान पर अटैक करने की चेतावनी के बीच अब ईरान भी अलर्ट मोड पर है और उसने भी पहले ही वॉर्निंग दे दी है. अमेरिका के मिडिल ईस्ट में 8 सैन्य ठिकाने हैं. बहरीन, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित हैं.

कतर

2025 में, मिडिल ईस्ट में लगभग 40 हजार से 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. ये सैनिक बड़े स्थायी सैन्य ठिकानों और छोटे फॉरवर्ड बेस, दोनों में तैनात हैं. जिन देशों में सबसे ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, उनमें कतर, बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हैं. ये अमेरिकी सैन्य ठिकाने हवाई और नौसैनिक अभियानों, क्षेत्रीय सप्लाई और लॉजिस्टिक्स, खुफिया जानकारी जुटाने और पूरे इलाके में सैन्य ताकत दिखाने के लिए बेहद अहम माने जाते हैं.

दोहा के पास स्थित अल उदैद एयर बेस मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है. लगभग 24 हेक्टेयर में फैले इस बेस में अमेरिकी सेंट्रल कमांड का फॉरवर्ड मुख्यालय मौजूद है और करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक यहां तैनात हैं. यही से अमेरिका मिस्र (पश्चिम) से लेकर कज़ाख़स्तान (पूर्व) तक फैले बड़े इलाके में अपने सैन्य अभियानों का संचालन करता है.

अपने बड़े आकार और रणनीतिक महत्व के चलते यह बेस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ताकत दिखाने का केंद्र माना जाता है और किसी भी तनाव या संघर्ष के बढ़ने की स्थिति में यह एक संभावित निशाना भी बन सकता है.

बहरीन

नैवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन में अमेरिकी नौसेना का फिफ्थ फ्लीट स्थित है, जो खाड़ी क्षेत्र, लाल सागर और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में समुद्री अभियानों की निगरानी करता है. यह बेस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे बेहद अहम समुद्री रास्तों की निगरानी के लिए बहुत अहम है.

कुवैत

कुवैत में कैंप अरिफजान अमेरिकी सेनाओं के लिए एक अहम लॉजिस्टिक्स और सप्लाई केंद्र के रूप में काम करता है, जो पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों को समर्थन देता है. वहीं, अली अल सलेम एयर बेस हवाई अभियानों में मदद करता है और ईंधन भरने और परिवहन की सुविधाएं उपलब्ध कराता है. ये दोनों ठिकाने इराक, सीरिया और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी अभियानों को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं.

यूएई

संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी के दक्षिण में स्थित अल धाफरा एयर बेस, जिसे यूएई वायुसेना के साथ साझा किया जाता है, अमेरिकी वायुसेना का एक बेहद अहम ठिकाना है. इस बेस ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ कई अहम अभियानों में समर्थन दिया है. यहां अमेरिकी वायुसेना की बड़ी टुकड़ियां तैनात हैं, जिनमें खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस) इकाइयां शामिल हैं.

इराक

इराक में अनबार प्रांत स्थित ऐन अल-असद एयर बेस और उत्तरी क्षेत्र में मौजूद एरबिल एयर बेस अमेरिकी सैन्य अभियानों और इराकी और कुर्द बलों के साथ सहयोग के लिए अहम हैं. साल 2020 में ईरान ने ऐन अल-असद बेस पर मिसाइल हमले किए थे, जो ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी कार्रवाई में मौत के जवाब में किए गए थे.

सऊदी अरब

रियाद के दक्षिण में स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस में अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियां तैनात हैं और यह लड़ाकू विमानों के संचालन में मदद करता है. ईरान के करीब होने की वजह से यह बेस मध्यम दूरी की मिसाइलों की रेंज में आता है, इसलिए किसी भी संघर्ष की स्थिति में इसका रणनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है.

जॉर्डन

अम्मान की राजधानी से करीब 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में अजराक इलाके में स्थित मुवाफ्फक अल साल्ती एयर बेस में अमेरिकी एयर फोर्स सेंट्रल की 332वीं एयर एक्सपेडिशनरी विंग तैनात है. अमेरिकी कांग्रेस लाइब्रेरी की 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह यूनिट लेवेंट क्षेत्र में सैन्य अभियानों को अंजाम देती है.

मिस्र

काहिरा में अमेरिका के कोई लड़ाकू विमान नहीं हैं, लेकिन अब्बासिया में NAMRU-3 नाम की लैब है (infectious-disease laboratory), जो विदेशी संक्रामक रोगों पर काम करती है. 2023 में सूडान में इबोला फैलने पर इस लैब ने मदद की. इससे दिखता है कि अमेरिका सिर्फ सेना से ही नहीं, बल्कि हेल्थ और साइंस के जरिए भी क्षेत्र में एक्टिव है.

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