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ये आग आगे और फैलेगी… बांग्लादेश हिंसा पर एक नोबेल पुरस्कार विजेता ने दूसरे नोबेल विनर को क्या समझाया?

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बंग्लादेश में अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं. अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है. बांग्लादेश हिंसा पर नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने दूसरे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता से देश के मौजूदा हालात को लेकर अपील की है. कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि आज मानवाधिकार दिवस है, मैं अपने साथी यूनुस से अपील करता हूं कि बांग्लादेश की स्थिति को लेकर देश को संबोधित करें, और जल्द से जल्द हालात सुधारने को लेकर काम करें.

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि मैं बांग्लादेश की चिंताजनक स्थिति से बहुत परेशान हूं, अगर आज बांग्लादेश की स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो ये आग और आगे तक फेल सकती है, कई अन्य देशों को अपनी चपेट में ले सकती है.

उन्होंने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में, मैं अपने साथी और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस से बिना किसी देरी के राष्ट्र को संबोधित करने की अपील करता हूं. मुझे यकीन है कि वह लाखों लोगों के मानवाधिकारों के खिलाफ होने हिंसा को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाएंंगे.

बंग्लादेश में अल्पसंख्यकों के हालात चिंंताजनक

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से बांग्लादेश में शिक्षा और बाल अधिकारों के मुद्दों पर कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों से जुड़ा हूं. हमेशा विश्वास और सांप्रदायिकता को पहले महत्व देता हूं. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर ताजा हमलों और धार्मिक स्थलों की बर्बरता के कारण अनगिनत लोग आज डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं. उन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं . ये स्थिति चिंंताजनक है.

उन्होंने आगे कहा कि यदि अस्थिर स्थिति को तत्काल कंट्रोल में नहीं किया गया, तो इसकी आग बांग्लादेश से कहीं आगे तक फैल जाएगी. जिससे सबको खतरा होगा. पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में कहीं भी अल्पसंख्यकों का दमन और मानवाधिकारों का उल्लंघन हमारी सामूहिक चेतना पर हमला है. इसे जल्द से जल्द रोका जाना चाहिए.

बांग्लादेश में निशाने पर अल्पसंख्यक

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही अल्पसंख्यकों के हालात खराब बने हुए हैं. यहां लगातार उनकी दुकानों, मकानों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है. इसके साथ ही इंस्कॉन संत चिन्मय कृष्णदास प्रभु को गिरफ्तार कर जेल में बंद किया गया है. कृष्णदास की गिरफ्तारी के बाद से ही अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले तेज हो गए हैं.

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