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विधवा मां का संघर्ष देख बेटे ने उठाया बेबसी दूर करने का बीड़ा, ऐसे बदल रहा महिलाओं की जिंदगी

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सदियों से विधवा महिलाओं का संघर्ष एक छिपी हुई आपदा रहा है, जिन्हें समाज द्वारा अनदेखा और उपेक्षित किया जाता रहा है. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक अध्ययन ‘नॉट लीविंग विडोज बिहाइंड’ के अनुसार, दुनिया में 285 मिलियन विधवाएं गरीबी, अशिक्षा, बीमारी और सामाजिक अन्याय सहित गंभीर कठिनाइयों का सामना करती हैं. इन 285 मिलियन में से भारत में रहने वाली विधवाओं की संख्या करीब 46 मिलियन है.

देशभर की विधवा महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी वित्तीय स्वतंत्रता के लिए लूम्बा फाउंडेशन ने आज दिल्ली में ‘Her Skill , Her Future’ कार्यक्रम की शुरुआत की है, जिसका लक्ष्य है भारत में 1 लाख महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए रणनीतिक कार्यक्रम कार्यान्वयन के साथ-साथ जमीनी स्तर पर ऐसी महिलाओं को समाज के मुख्य धारा में लाना है.

राजिंदर पॉल लूम्बा ने की थी फाउंडेशन की स्थापना

ऐसी महिलाओं के समावेशी विकास को बढ़ावा देने और उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के अलावा फाउंडेशन यह सुनिश्चित करेगा कि ‘Her Skill Her Future’ पहल न केवल विधवा महिलाओं के व्यक्तिगत जीवन में बदलाव लाए, बल्कि उनके परिवारों और समाज में भी इनके लिए सकारात्मक परिवर्तन का रास्ता बनाए.

लूम्बा फाउंडेशन की स्थापना 1998 में यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की मौजूदगी में लार्ड राजिंदर पॉल लूम्बा ने की थी. उनकी दिवंगत मां पुष्पा वती लूम्बा 37 साल की कम उम्र में विधवा हो गई थीं. राजिंदर लूम्बा, जो उस समय केवल 11 साल के थे, ने अपनी मां द्वारा विधवा के रूप में झेले गए कष्ट और भेदभाव को प्रत्यक्ष रूप से देखा.

भारतीयों के लिए गर्व की बात: स्मृति ईरानी

एक सफल उद्योगपति होने के बाद राजिंदर ने दुनियाभर की विधवा महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का बीड़ा उठाया है. कार्यक्रम को संबोधित कर रहीं भारत सरकार की पूर्व महिला और बाल विकास मंत्री और फाउंडेशन की उपाध्यक्ष स्मृति ईरानी ने इस इनिशिएटिव के लिए फाउंडेशन की तारीफ की.

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या वाले दिन को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया. जबकि दुनिया की विधवा महिलाओं को अपलिफ्ट करने के लिए एक मिशन के रूप में काम कर रहे लूम्बा फॉउंडेशन के प्रयासों से यूनाइटेड नेशन ने करीब 10 साल पहले 23 जून को अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस घोषित किया है. इसी तारीख को राजिंदर पॉल लूम्बा की मां विधवा हुई थीं. यह हम सब भारतीयों के लिए गर्व की बात है. फाउंडेशन की अध्यक्ष शेरी ब्लेयर ने भी फाउंडेशन की ओर से 1998 से ही लगातार किए जा रहे काम और भविष्य की रूपरेखा के बारे में बताया.

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