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फांसी या उम्रकैद! RG Kar मामले में इन धाराओं में दोषी सजय रॉय को क्या मिलेगी सजा?

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कोलकाता के आरजी कर रेप-मर्डर मामले में सियालदह कोर्ट के न्यायाधीश अनिर्बान दास ने शनिवार को आरोपी सिविक वॉलेंटियर संजय रॉय को दोषी करार दिया. कोर्ट सोमवार को रेप और हत्या मामले में सजा का ऐलान करेगा. सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अनिर्बान दास ने शनिवार को अदालत में संजय रॉय से कहा “मुझे लगता है कि इसके लिए आप ही जिम्मेदार हैं.”

अदालत ने मोबाइल टॉवर और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर शनिवार को संजय रॉय को दोषी पाया. सजा सोमवार को सुनाई जाएगी.

युवा लेडी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में अधिकतम सजा की मांग को लेकर आज कई लोगों ने अदालत परिसर में नारे लगाए. हालांकि, न्यायाधीश ने संजय रॉय को बताया कि संजय रॉय ने जो किया उसके लिए न्यूनतम सजा 10 वर्ष कारावास हो सकती है. यहां तक ​​कि मृत्युदंड भी हो सकता है.

इन धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया संजय रॉय

बता दें कि 8-9 अगस्त की रात को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की लेडी डॉक्टर की हत्या के एक दिन बाद संजय रॉय को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था. बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है.

सीबीआई ने आरजी कर मामले में संजय को एकमात्र आरोपी बनाया था. संजय रॉय को भारतीय दंड संहिता की धारा 64 (बलात्कार), 66 (बलात्कार के बाद मौत) और 103(1) (हत्या) के तहत दोषी ठहराया गया है.

न्यायाधीश दास ने नागरिक स्वयंसेवक संजय से कहा, “सीबीआई और गवाहों के बयानों के आधार पर मैं आपको दोषी मानूंगा.” आपकी अधिकतम सजा मृत्युदंड हो सकती है.” यह सुनकर संजय रॉ. ने कहा, ”मैंने कुछ नहीं किया.’ मेरे गले में रुद्राक्ष की माला है. एक बार मेरी बात सुने.” जज ने कहा, “मैं तुम्हें सोमवार को सुनूंगा.”

संजय रॉय की क्या हो सकती है सजा, जानें

बीएनएस धारा 64: बीएनएस में बलात्कार के लिए यह धारा है. इस धारा में बलात्कार के लिए कारावास की सजा का प्रावधान है. इसकी सज़ा 10 वर्ष से कम कारावास की नहीं होगी. अधिकतम सजा आजीवन कारावास हो सकती है. जुर्माना लगाया जा सकता है.

बीएनएस धारा 66: भारतीय दंड संहिता की इस धारा में कहा गया है कि यदि बलात्कार के कारण पीड़िता की मृत्यु हो जाती है या वह अक्षम हो जाती है, तो दोषी व्यक्ति को कारावास की सजा दी जाएगी. उस मामले में न्यूनतम सजा 20 वर्ष जेल होगी. अधिकतम सजा आजीवन कारावास हो सकती है.

बीएनएस की धारा 103 (1): यह धारा मुख्य रूप से हत्या की सजा से संबंधित है. यदि हत्या का दोषी पाया जाता है तो सजा मृत्युदंड या आजीवन कारावास हो सकती है.

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