-थानों में आरक्षकों से लेकर उप निरीक्षकों की पदस्थापना की होगी समीक्षा
-5 साल से ज्यादा नहीं टिकेंगे एक थाने में
राष्ट्र चंडिका न्यूज़, भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस महकमे में पारदर्शिता और दक्षता लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा ने प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों (SP) और कमिश्नर भोपाल-इंदौर को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत थानों में तैनात आरक्षक से लेकर उप निरीक्षक (SI) स्तर तक के पुलिसकर्मियों की पदस्थापना की तत्काल समीक्षा करें। यह निर्देश 16 जून 2025 तक अनिवार्य रूप से पूरे करने और पदस्थापना आदेश जारी करने का समय निर्धारित किया गया है।
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर
डीजीपी मकवाणा का यह कदम पुलिसिंग में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी पुलिसकर्मी की एक ही थाने में अधिकतम सेवा अवधि 5 वर्ष होगी। इस अवधि के पूर्ण होने के बाद, उसी पद पर उसी थाने में उसकी पुनः पदस्थापना किसी भी कीमत पर नहीं की जा सकेगी। इस नियम का मुख्य उद्देश्य थानों में संभावित गुटबाजी, किसी विशेष पुलिसकर्मी के अत्यधिक प्रभाव या लंबी अवधि तक एक ही स्थान पर रहने से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को समाप्त करना है।आंतरिक सुधार की दिशा में मील का पत्थर
पुलिस विभाग में आंतरिक सुधारों के मद्देनजर इस निर्णय को एक मील का पत्थर माना जा रहा है। लंबे समय से ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं कि कुछ पुलिसकर्मी एक ही थाने में लंबे समय तक पदस्थ रहकर अपना प्रभाव स्थापित कर लेते हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं और कई बार यह पारदर्शिता को भी प्रभावित करता है। इस नए निर्देश से उम्मीद की जा रही है कि पुलिसकर्मियों को विभिन्न थानों में काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी कार्यशैली में विविधता आएगी और वे विभिन्न परिस्थितियों का सामना करने के लिए बेहतर ढंग से प्रशिक्षित होंगे।
पुलिस अधीक्षकों और कमिश्नरों पर जिम्मेदारी
डीजीपी के निर्देश के बाद अब सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और भोपाल-इंदौर के कमिश्नरों पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में पदस्थापनाओं की समीक्षा करनी होगी और नए आदेश जारी करने होंगे। इस प्रक्रिया से पुलिस बल में नई ऊर्जा और कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है, जिससे आम जनता को बेहतर पुलिसिंग का अनुभव मिल सकेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह निर्देश जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और क्या यह वास्तव में पुलिस विभाग में वांछित सुधार ला पाएगा।