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खाट पर मरीज जाता है अस्पताल, शिवपुरी में सड़क के लिए तरस रहे ग्रामीण

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शिवपुरी: जिले की पिछोर विधानसभा के खनियाधाना जनपद पंचायत के मजरा बागपुरा गांव में बरसात के बाद जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है. यहां के निवासी मजबूरी और लाचारी में जिंदगी गुजारने पर मजबूर हैं. गांव में सड़क नहीं होने के चलते मरीज को खटिया पर लाद कर अस्पताल ले जाना पड़ता है. स्थानीय बच्चे पानी भरे हुए खेत से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं.

घर में कैद रहने को मजबूर ग्रामीण

मजरा बागपुरा गांव से आई तस्वीरें विकास की पोल खोल ही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर विकास यही है तो हम लोग बचपन से विकास देखते आ रहे हैं. मजरा बागपुरा और बहर्रा गांव में पक्की सड़क नहीं है. गांव में एक रास्ता है जो खेतों से होकर गुजरता है. भारी बारिश के चलते वह भी बंद हो गया है. स्थानीय लोग घरों में बंद रहने को मजबूर हैं. सड़क की मांग को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई, यहां तक कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी गांव वालों ने पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया. लेकिन मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई.

तत्काल कार्रवाई का आश्वासन

खनियाधाना जनपद के सीईओ मेघराज राज मीणा ने कहा, “हमें तस्वीरों के माध्यम से गांव की स्थिति के बारे में जानकारी मिली है. हम एक टीम बनाकर गांव में भेजेंगे. गांव में जाकर यह टीम पूरी तरह से अपनी जांच करेगी. गांव में किन चीजों की आवश्यकता उसकी टीम के द्वारा रिपोर्ट बनाई जाएगी. उसके आधार पर तत्काल कार्रवाई करेंगे.”

2 लोग सहित नदी में बही ट्रैक्टर ट्रॉली

दूसरा मामला, कोलारस विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है. यहां मध्य प्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाली सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब आठ साल पहले बनाई गई थी. हालांकि सड़क में पड़ने वाली नदी में पुलिया का निर्माण नहीं किया गया. ऐसे में बारिश के दिनों में करीब 15 गांवों के लोगों को जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करना पड़ता है. गुरुवार को सेवन निवासी हिम्मत गुर्जर और सागर सिंह गुर्जर दोनों भाई ट्रैक्टर लेकर गिट्टी लाने जा रहे थे. अचानक नदी पार करते समय ट्रैक्टर नदी में धस गया.जानकारी के अनुसार, ट्रैक्टर को निकालने के लिए गांव से एक गाड़ी बुलाई गई, लेकिन जब तक ट्रैक्टर को निकाला जाता, तब कर नदी में पानी भर गया. जिससे ट्रैक्टर-ट्राली सहित दोनों भाई पानी में बह गए. हालांकि दोनों को ग्रामीणों ने बचा लिया. पंचायत सचिव महेश ओझा ने बताया कि नदी पर पुल बनाना पंचायत का काम नहीं है, लेकिन यह हमारे पंचायत क्षेत्र में आता है. हम संबंधित नेताओं और अधिकारियों को कई बार पुल बनवाने का प्रस्ताव बनाकर भेज चुके हैं. परंतु इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया.

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