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नेपाल छोड़िए, एक साल में इन 94 देशों में कमजोर हो गया लोकतंत्र, पूरी लिस्ट

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नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ भड़के युवाओं का आंदोलन अचानक राजनीतिक तूफान बन गया. महज दो दिन में ही हालात इतने बिगड़े की प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा. अब पूरा नेपाल सेना के कंट्रोल में है. 17 साल पहले नेपाल ने राजशाही से लोकतंत्र की ओर कदम बढ़ाया था, लेकिन आज वहां फिर राजशाही वापसी की मांग गूंजने लगी है.

लेकिन यह सिर्फ नेपाल की कहानी नहीं है. दुनिया के कई लोकतांत्रिक देश भी पिछले एक साल में कमजोर हुए हैं. स्टॉकहोम स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (IDEA) की रिपोर्ट द ग्लोबल स्टेट ऑफ डेमोक्रेसी 2025 इसका सबूत देती है.

94 देशों में लोकतंत्र कमजोर

रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में 173 देशों का विश्लेषण किया गया. इनमें से 94 देशों में लोकतंत्र कमजोर हुआ और केवल एक तिहाई देशों ने ही प्रगति दर्ज की. रिपोर्ट कहती है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा असर फ्री एंड फेयर इलेक्शन, न्याय तक पहुंच और प्रभावी संसद के क्षेत्र में देखने को मिला.

अमेरिका भी पिछड़ा

लोकतंत्र की इस रिपोर्ट में अमेरिका की स्थिति भी चिंता जनक बताई गई. प्रतिनिधित्व में अमेरिका 35वें स्थान और अधिकारों में 32वें स्थान पर है. केवल भागीदारी के मामले में ही वह टॉप-10 (6वें स्थान) में है. रिपोर्ट का कहना है कि हाल के चुनावों और राजनीतिक घटनाओं ने अमेरिकी लोकतंत्र की सेहत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

अफ्रीका और यूरोप में सबसे ज्यादा गिरावट

लोकतंत्र की गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा अफ्रीका (33%) और फिर यूरोप (25%) में देखा गया. वेस्ट एशिया को लोकतंत्र के मामले में सबसे कमजोर पाया गया. हालांकि, यूरोप अब भी शीर्ष रैंकिंग में छाया रहा. डेनमार्क एकमात्र ऐसा देश रहा जो लोकतंत्र के चारों पैमानों प्रतिनिधित्व, कानून का राज, भागीदारी और अधिकारों में टॉप-5 में रहा. जर्मनी, नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड और लक्समबर्ग भी ऊंचे स्थान पर रहे.

प्रेस की आजादी पर सबसे बड़ा संकट

रिपोर्ट ने सबसे गंभीर खतरे के रूप में प्रेस फ्रीडम में 50 साल की सबसे बड़ी गिरावट को बताया. 2019 से 2024 के बीच 43 देशों में मीडिया स्वतंत्रता घट गई. अफगानिस्तान, म्यांमार और बुर्किना फासो सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में रहे. यहां पत्रकारों पर हमले, केस और सेंसरशिप तेजी से बढ़ी.

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