छतरपुर। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गरबा आयोजनों को लेकर अपनी राय रखी है। माता बंबरबेनी के दर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का ध्यान रखा जाना चाहिए और आयोजकों को मुख्य द्वार पर कुछ विशेष सावधानियाँ बरतनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रवेश द्वार पर गोमूत्र छिड़काव जैसी परंपरागत प्रथाएँ अपनाई जा सकती हैं।
शास्त्री ने अपने उदाहरण में यह भी जोड़ा कि जिस तरह कुछ धार्मिक समुदाय कुछ यात्राओं में शामिल नहीं होते, वैसे ही सांस्कृतिक आयोजनों में भी अपनी-अपनी सीमाओं का सम्मान होना चाहिए — यह उनके बोलचाल के अंदाज में सामने आया। उनके इस बयान के बाद स्थानीय स्तर पर और राजनीति के गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि इस पर संगठनों और समुदायों की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग रही; कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था का मामला मानते हैं जबकि अन्य ने इसे समावेशी आयोजन के नज़रिए से देखा।
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