Local & National News in Hindi

13 लाख का बिल, 16 डायलिसिस भी फेल: दो साल की बेटी की मासूम बात सुन परिवार बेबस होकर रो पड़ा

5

‘पापा घर ले चलो…’ बस यही दो शब्द थे, जिन्हें सुनकर सुशांत ठाकरे रो पड़े थे. वो दो साल की नन्ही बेटी योजिता की आवाज थी- कमजोर, थकी हुई, मगर अब भी उम्मीद भरी. लेकिन उस पल सुशांत नहीं जानते थे कि उनकी बेटी की यह जिंदगी का आखिरी संवाद होगा. छिंदवाड़ा के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाले टीचर सुशांत ठाकरे की आंखों में आंसू हैं, वे कहते हैं कि मैंने 13 लाख खर्च किए, दिन-रात दौड़ता रहा… लेकिन अपनी बेटी को नहीं बचा सका. सरकार अब 4 लाख दे रही है, पर मेरी बेटी तो वापस नहीं आएगी.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.