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झारखंड की सियासत का लिटमस टेस्ट है घाटशिला उपचुनाव! जानें कौन सा ‘निर्णायक फैक्टर’ तय करेगा हार-जीत

झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट पर हो रहा उपचुनाव राज्य के सियासी भविष्य के लिटमस टेस्ट से कम नहीं है. इस चुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और बीजेपी की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दाव पर है. नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया पूरी हो गई है. कुल 17 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनमें से 3 के नामांकन रद्द हुए हैं. मुकाबला झारखंड मुक्ति मोर्चा के योद्धा के रूप में दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के बेटे सोमेश चंद्र सोरेन और भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोल्हान टाइगर के नाम से जाने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन के बीच माना जा रहा है.

इसके अवाला जेएलकेएम उम्मीदवार रामदास मुर्मू, पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से पार्वती हंसदा, निर्दलीय उमीदवार परमेश्वर टुडू, श्रीलाल किस्कू, मनसा राम हांसदा, नारायण सिंह, विकास हेम्ब्रम, पंचानन सोरेन (भारत आदिवासी पार्टी (BAP), बसंत कुमार तोपनो (निर्दलीय), मनोज कुमार सिंह(निर्दलीय,)विक्रम किस्कु और रामकृष्ण कांति माहली, (निर्दलीय) कुल 14 उम्मीदवार चुनावी दंगल में किस्मत आजमा रहे हैं, जिसमें 9 निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल हैं.

इन 3 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द हुए

घाटशिला उपचुनाव को लेकर जिन 3 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द हुए उनमें मालती टुडू, मंडल मुर्मू और दुखीराम मार्डी शामिल हैं. चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, नाम वापसी की अंतिम तिथि 24 अक्टूबर है. उसी दिन दोपहर 3 बजे के बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह (सिंबल) आवंटित किए जाएंगे. इसके बाद सभी प्रत्याशी अपने-अपने चुनाव चिन्ह के साथ प्रचार अभियान में उतर जाएंगे.

बता दें कि घाटशिला उपचुनाव हेमंत सोरेन सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला उपचुनाव है. एक तरह से सरकार के कामकाज का यह लिटमस टेस्ट होने वाला है. उपचुनाव को लेकर 17 अक्टूबर को ही भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन ने भी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन दोनों ने नामांकन किया था. नामांकन के बहाने जनसभा कर एक-दूसरे को चुनौती देते हुए शक्ति प्रदर्शन कर चुनावी अखाड़े में पटकनी देने का संखनाद किया था.

दिग्गज नेताओं का घाटशिला में जमावड़ा

दोनों ही प्रत्याशियों के नामांकन के दौरान झारखंड के दिग्गज नेताओं का घाटशिला में जमावड़ा हुआ, जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी के नामांकन के दौरान स्वयं राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी कल्पना सोरेन, सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक के अलावा कांग्रेस पार्टी ने भी नामांकन के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए एकता का परिचय दिया था.

दूसरी तरफ बीजेपी उम्मीदवार के नामांकन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा,पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, राज्यसभा सांसद आदित्य साहू सहित पार्टी के अधिकांश सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक सहित एनडीए के घटक दल आजसु सुप्रीमो सुदेश महतो, जदयू और लोजपा (आर ) के नेता और पदाधिकारी भी नामांकन सभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर शक्ति प्रदर्शन करते हुए अपनी जीत को लेकर चुनावी शंखनाद का उद्घोष किया था.

घाटशिला उपचुनाव में ये हो सकते हैं बड़े फैक्टर

  • मईया सम्मान योजना का प्रभाव और महिला मतदाता घाटशीला उपचुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. राज्य सरकार की ये महत्वाकांक्षी योजना 2024 के विधानसभा चुनाव में गेम चेंजर रही थी. एक बार फिर ये उपचुनाव में चुनावी फैक्टर बन सकता है. चूंकि हेमंत सोरेन की सरकार 50 लाख से ज्यादा महिलाओं को प्रति महीने ₹2500 की आर्थिक सहायता इस योजना के तहत दे रही है.
  • चाहे बात दुर्गा पूजा की हो या दिवाली, छठ पूजा की महिलाओं को सरकार के द्वारा किए गए वादे के अनुरूप उनके खाते में ₹2500 हस्तानांतरित किए गए हैं, जो चुनाव में बड़ा फैक्टर बन सकता है.
  • इसके साथ ही महिला मतदाताओं के बीच कल्पना सोरेन की लोकप्रियता और घाटशिला उपचुनाव में कुल मतदाता की संख्या 2,55,823 है. जबकि महिला मतदाता पुरुषों के मुकाबले ज्यादा हैं. महिला मतदाताओं की संख्या 1,30,921 है. पुरुष मतदाता की संख्या 1,24,899 है.
  • भावनात्मक और सहानुभूति फैक्टर: पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के कारण ही घाटशिला सीट पर उपचुनाव हो रहा है. ऐसे में रामदास सोरेन के परिवार के प्रति जनता के बीच सहानुभूति जो चुनाव में एक बड़ा फैक्टर बन सकता है.
  • हेमंत सोरेन की सरकार के कार्यकाल के दौरान आदिवासियों पर बढ़ते अत्याचार, राज्य में हो रही बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण आदिवासी समाज की घटती जनसंख्या, आदिवासी समाज की जमीन की जबरन लूट, भ्रष्टाचार सहित कई ज्वलंत मुद्दों के बहाने भारतीय जनता पार्टी हेमंत सोरेन की सरकार को बैकफुट पर धकेलना की रणनीति पर काम कर रही है, जो भारतीय जनता पार्टी के लिए जीत में अहम फैक्टर हो सकता है.
  • पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन स्वयं एक बड़ा फैक्टर बन सकते हैं. लगभग चार दशकों तक चंपई सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के कोल्हान क्षेत्र में रणनीतिकार रहे हैं. ऐसे में उन्हें झारखंड मुक्ति मोर्चा की मजबूती और कमजोरी का बखूबी ज्ञान है, जिसका फायदा भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को चुनाव में मिल सकता है. हालांकि अब देखना होगा कि पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के वोट बैंक में कितना सेंधमारी कर पाते हैं.घाटशिला उपचुनाव को लेकर 11 नवंबर को मतदान होगा, जबकि 14 प्रत्याशियों के भाग का फैसला 14 नवंबर को घोषित होगा.

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