अशोकनगर: देव प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर शनिवार सुबह अशोकनगर में ब्रह्म मुहूर्त के समय एक अद्भुत नजारा देखने को मिला. जहां हजारों की संख्या में महिलाएं उपस्थित होकर हाथों में दीप लेकर विशाल प्रभात फेरी में शामिल हुईं. यह आयोजन प्रदेश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी अपनी पहचान बन चुका है.
हजारों महिलाएं दीप प्रभात फेरी में हुई शामिल
देव प्रबोधिनी एकादशी के पावन अवसर पर शुक्रवार की सुबह अशोकनगर का वातावरण भक्ति और प्रकाश से आलोकित हो उठा. इस अवसर पर पंडित कैलाशपति नायक के नेतृत्व में भव्य प्रभातफेरी का आयोजन किया गया, जो शहर की धार्मिक परंपराओं का अद्भुत उदाहरण बना. इस प्रभातफेरी में लगभग 3000 से अधिक महिलाओं ने हाथों में दीपक लेकर भाग लिया.
1990 से निकाली जा रही है प्रभात फेरी
सुबह 4 बजे से ही नगर के घरों के बाहर दीप जगमगाने लगे. हर गली, हर मोहल्ला दीपों से सुसज्जित नजर आया. इसी बीच हजारों महिलाएं राजराजेश्वर मंदिर पर एकत्रित हुईं, जहां 4:45 बजे पंडित कैलाशपति नायक ने शंखनाद कर देव प्रबोधिनी एकादशी शोभायात्रा का शुभारंभ किया. यह प्रभातफेरी सन 1990 से लगातार निकाली जा रही है.
जय विष्णु भगवान उद्घोष से गूंज उठा शहर
यह शोभायात्रा राजराजेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कृष्ण मंदिर गढ़ी तक पहुंची. पूरी यात्रा के दौरान महिलाएं दीपक लिए भक्ति गीतों का गायन करती रहीं. दीपों से पूरा नगर जगमगा उठा और वातावरण “जय विष्णु भगवान” के जयघोषों से गूंज उठा.
वृंदावन की तरह दिखा शहर का नजारा
यात्रा के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर यात्रियों का स्वागत किया. जिन घरों और मार्गों से शोभायात्रा निकली गई, वहां दीपों की रौशनी से अनुपम दृश्य देखने को मिला. पूरा अशोकनगर इस मौके पर एक धार्मिक तीर्थ स्थल में परिवर्तित हो गया. इस दौरान अशोक नगर का दृश्य वृंदावन की तरह नजर आ रहा था.
सब कार्यों की शनिवार से होगी शुरुआत
धार्मिक मान्यता के अनुसार, देव प्रबोधिनी एकादशी वह दिन है जब भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं, और इसी दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है.इस तरह की भव्य दीप प्रभातफेरी न केवल मध्य प्रदेश में, बल्कि विश्व स्तर पर भी सिर्फ अशोकनगर में ही आयोजित की जाती है. यह परंपरा ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होती है, जिसमें हजारों महिलाएं दीपक लेकर भगवान विष्णु के जागरण का प्रतीक बनती हैं. देव प्रबोधिनी एकादशी पर निकली यह प्रभातफेरी श्रद्धा, भक्ति और प्रकाश का अद्भुत संगम बनकर संपूर्ण नगर को आध्यात्मिक आलोक से सुसज्जित करती है.