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रतन टाटा का ही नहीं पूरे देश का फेवरेट था ये ‘धुरंधर’, 2025 में टूटी कमर

बजट फैशन चेन जूडियो और प्रीमियम ब्रांड वेस्टसाइड को चलाने वाली टाटा ग्रुप की दिग्गज रिटेल कंपनी ट्रेंट के शेयर एक शर्मनाक स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं. साल 2025 में ट्रेंट का शेयर निफ्टी में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला स्टॉक बन गया है. कभी अपना लोहा मनवा रहे इस मल्टीबैगर स्टॉक में इस साल 43 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे इसका मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कम हो गया है. साथ कंपनी की वैल्यूएशन घटकर 1.45 लाख करोड़ रुपए रह गई है.

यह जबरदस्त बिकवाली उस स्टॉक के लिए एक आश्चर्यजनक उलटफेर का संकेत है जो कभी रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का पसंदीदा था. अब टाटा ग्रुप की उन तीन कंपनियों का नेतृत्व कर रहा है, जिनके शेयरों में मौजूदा साल में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है. टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल कंपनी के शेयर 22 फीसदी नीचे हैं. जबकि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस के शेयरों में 21 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है.

कंपनी के शेयरों में आई इस तबाही की सबसे बड़ी वजह आक्रामक तरीके से ज्यादा से ज्यादा स्टोर खोलना है, जो मौजूदा स्टोर्स को नुकसान पहुंचा रहा है. कंजंप्शन में कमी शहरी डिमांड को प्रभावित कर रही है. साथ कंप्टीशन लगातार बढ़ रहा है, जिसकी वजतह से फैशन रिटेल में जूडियो की डॉमिनेंस खतरे में पड़ती हुई दिखाई दे रही है.

स्टोर्स में इजाफे ने दिया झटका

बर्नस्टीन के एलालिस्ट जिग्नांशु गोर ईटी की रिपोर्ट में कहते हैं कि स्टोर नेटवर्क का अत्यधिक सघनीकरण सेल्स ग्रोथ में गिरावट का एक प्रमुख कारण है. साथ ही ट्रेंट की एक्सटेंशन रणनीति में एक महत्वपूर्ण चूक को उजागर करते हैं. मार्च 2024 से, ज़ूडियो ने आक्रामक रूप से 285 नेट स्टोर जोड़े हैं, जिससे उसका नेटवर्क 539 से बढ़कर 824 आउटलेट हो गया है. लेकिन इस ग्रोथ की एक कीमत चुकानी पड़ी. 58% मौजूदा स्टोर अब उसी शहर में स्थित एक नए जूडियो से प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं.

पिनकोड लेवल पर, 11 फीसदी स्टोर अब सेम कस्टमर्स के लिए सहयोगी आउटलेट्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं—यह एक रणनीतिक भूल है जो वित्तीय वर्ष 2026 में ही उलटने लगी है, जहां नेटवर्क का केवल 3 फीसदी हिस्सा समान-पिन ओवरलैप का सामना कर रहा है.

कंजंप्शन में कमी

दलाल स्ट्रीट के दिग्गज सौरभ मुखर्जी, जिनकी पीएमएस फर्म मार्सेलस ट्रेंट में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है, भी इस मुश्किल स्थिति को स्वीकार करते हैं. ईटी की रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि कंजंप्शन में मंदी ट्रेंट सहित सभी को प्रभावित कर रही है. हालांकि उनका कहना है कि कंपनी ने रिलायंस रिटेल और आदित्य बिड़ला फैशन रिटेल जैसे प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में समान स्टोर सेल्स ग्रोथ को बेहतर बनाए रखा है. उन्होंने कहा कि ट्रेंट में एक बड़ी हिस्सेदारी के साथ हम बहुत आरामदायक स्थिति में हैं और कंजंप्शन डिमांड को दोबारा जीवित करने के लिए 2026 तक निरंतर राजकोषीय प्रोत्साहन पर दांव लगा रहे हैं.

जूडियो का प्रभुत्व खतरे में

बर्नस्टीन के अनुसार, बजट फैशन चेन, जिसने असंगठित कंपनियों से हिस्सेदारी हासिल करके ट्रेंट के ग्रोथ को बढ़ाया, अभी भी मजबूत ब्रांड अपील और मजबूत गूगल सर्च रुचि और सोशल मीडिया जुड़ाव के साथ, मजबूत ब्रांड अपील रखती है. लेकिन नए प्रवेशकों, यूस्टा, स्टाइल यूनियन, ओडब्ल्यूएनडी और इंट्यून ने सामूहिक रूप से 358 स्टोर खोले हैं, जिनमें पिनकोड ओवरलैप जूडियो के नेटवर्क के 27 फीसदी हिस्से को प्रभावित करता है.

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि ज़ूडियो की बाजार हिस्सेदारी वर्तमान 1.5 फीसदी से लंबी अवधि में बढ़कर 5 फीसदी हो जाएगी, क्योंकि उनका तर्क है कि अधिकांश प्रतिस्पर्धियों ने “अभी तक मज़बूत स्टोर अर्थशास्त्र स्थापित नहीं किया है” और ज़ूडियो की कॉस्ट—नो विज्ञापन, मिनि​मम छूट, और प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में दोगुनी सेल्स—एक मज़बूत खाई बनाती है. गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि ज़ूडियो को अपने मॉडल को अनुकूलित करने में पांच साल से ज़्यादा का समय लगा, इससे पहले कि विस्फोटक ग्रोथ शुरू हो.

कैसा रहा दूसरी तिमाही में प्रदर्शन ?

हाल के वित्तीय आंकड़े मिले-जुले संकेत दे रहे हैं. वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में, ट्रेंट का राजस्व साल-दर-साल (YoY) 15.9% बढ़कर 4,818 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें वेस्टसाइड और ज़ूडियो का संयुक्त राजस्व 20.9% बढ़कर 3,939 करोड़ रुपये रहा. EBITDA 26.5% बढ़कर 817 करोड़ रुपये हो गया, जबकि मार्जिन 150 आधार अंक बढ़कर 17% हो गया, जो स्ट्रांग ऑपरेशन और कॉस्ट अनुशासन को दर्शाता है. पैट 11.4 फीसदी बढ़कर 373 करोड़ रुपये हो गया. लेकिन स्टोर अपग्रेड और सख्त प्राइसिंग कंप्टीशन के कारण फूड और किराना सेगमेंट 2.1 फीसदी गिरकर 879 करोड़ रुपए रह गया.

बर्नस्टीन का मानना ​​है कि ट्रेंट की रेवेन्यू ग्रोथ अभी निचले स्तर पर है. वित्त वर्ष 2026 में 19 फीसदी और वित्त वर्ष 2028 तक 20 फीसदी CAGR का अनुमान है, जो अलग-अलग स्टोरों में समान बिक्री में सुधार, निरंतर नेटवर्क विस्तार और बेहतर कंज्यूमर डिमांड के कारण संभव हो पाया है. हालांकि, मार्जिन “पीक पर” हैं और आगे की ग्रोथ मामूली रहने की उम्मीद है. प्रबंधन लंबी अवधि की रणनीति बना रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी ऐसे विकल्प चुनने पर विचार कर रहा है, जो उसके ब्रांडों को लंबी अवधि में लाभ पहुंचाएं, भले ही इससे शॉर्टटर्म नुकसान ही क्यों न हो.

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