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NCP विलय का काउंटडाउन शुरू था, फिर अजित पवार के निधन ने कैसे बदल दी पूरी स्क्रिप्ट? इनसाइड स्टोरी!

अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत में पिछले 3 दशक से अहम खिलाड़ी के रूप में रहे. अब उनके निधन के बाद भी राज्य की सियासत नए मोड़ पर आ गई है. कहा जा रहा है कि उनके निधन से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों घड़े आपसी विलय की बात कर रहे थे. दोनों दलों की ओर से कुछ लोग इस विलय का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ इसके विरोध में खड़े हैं. लेकिन पिछले 2-3 दिनों में एनसीपी के विलय को लेकर दोनों गुटों में मतभेद कल से ही सामने आने लगे हैं और अब लग रहा है जो विलय की बात जो करीब-करीब फाइनल हो गई थी, उस पर संकट के बादल आ गए हैं.

कहा जा रहा है कि शरद पवार गुट विलय को तैयार है. गुट के कुछ बड़े नेता राजेश टोपे और अनिल देशमुख खुलकर इस बारे में मीडिया में बयान भी दे रहे है. जबकि अजित पवार गुट फिलहाल कुछ खास नहीं कह रहा है. इस सवाल पर अजित पवार की एनसीपी का ओर से अब तक कुछ बात नहीं की गई है. ऐसे में एनसीपी के दोनों गुटों का तत्काल विलय होगा, ऐसा फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा.

शरद गुट को अभी भी विलय की आस

महायुति गठबंधन में शामिल अजित पवार की एनसीपी विलय के मसले पर ज्यादा उत्साहित नजर नहीं आ रही है, शरद पवार गुट अभी भी विलय की उम्मीद लगाए बैठा है. हालांकि, शरद गुट को अपेक्षित सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती नहीं दिख रही है. यही चीज शरद पवार की आज शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी दिखाई दी.

शरद पवार ने आज बारामती में कहा कि दोनों एनसीपी के विलय को लेकर खुद अजित पवार 12 फरवरी को घोषणा करने वाले थे. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने की कोई जानकारी नहीं है. इस बयान से ये साफ दिख रहा है कि अजित पवार गुट के नेता शरद पवार को लूप में लेकर काम नहीं कर रहे.

विलय को लेकर कई दौर की बैठक

शायद अजित पवार की एनसीपी आनन-फानन में अपनी पार्टी का उपमुख्यमंत्री पद पा लेना चाहती है ताकि आगे उसका कोई विधायक टूटे नहीं या फिर यहां-वहां न जाएं.

अजित पवार के जीवित रहते दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर पांचछह बैठकें हो चुकी थीं. शरद पवार गुट के एक वरिष्ठ नेता ने टीवी 9 भारतवर्ष से बातचीत में दावा किया कि 12 फरवरी को मुंबई में दोनों दलों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक बुलाकर विलय की घोषणा करने का फैसला लिया गया था.

चुनाव के बाद विलय का होना था ऐलान

दूसरी ओर, शरद पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष विधायक शशिकांत शिंदे ने भी कहा कि विलय को लेकर दोनों गुटों के बीच चर्चा हुई थी और स्वयं अजित पवार ने नगरपालिकाओं के चुनाव के बाद पार्टी के विलय का प्रस्ताव रखा था. बाद में जिलापरिषद चुनाव आ जाने के कारण यह मामला टल गया, लेकिन चुनाव के बाद फिर से बातचीत हुई और जिलापरिषद चुनाव के बाद विलय करने पर सहमति बनी थी.

शिंदे के इस बयान को इस रूप में देखा जा रहा है कि वे यह संकेत देना चाहते हैं कि विलय करने की इ्च्छा अजित पवार की भी थी और इसके जरिए वे उस पर जल्द फैसला लेने को लेकर दबाव बना रहे हैं. हालांकि, अजित पवार गुट फिलहाल विलय की जगह अपने नेता के निधन के बाद उत्पन्न हुई परिस्थितियों में पार्टी और सरकार में संतुलन बनाए रखने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है.

अजित गुट विलय को लेकर उत्साहित नहीं

एनसीपी दफ्तर में प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कल शुक्रवार को इस सवाल पर सिर्फ इतना कहा कि इस पर चर्चा बाद में होगी. अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने भी कहा कि विलय को लेकर उनकी अपने नेताओं के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है. तब उन्होंने कहा था, फिलहाल हमारे सामने सबसे अहम मुद्दा विधायक दल के नेता का चयन है.

वहीं, इसी गुट के प्रदेशाध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने कहा, हम इस समय शोक के माहौल में हैं. सभी विषयों पर चर्चा बाद में की जाएगी. इस पूरे मामले में भाजपा की भूमिका अहम हो गई है.

बीजेपी को फायदा, लेकिन दबाव नहीं

एनसीपी के दोनों गुटों के एकजुट होने के मामले में भाजपा की भूमिका भी अहम मानी जा रही है. अजित पवार गुट के पास फिलहाल केवल एक लोकसभा सांसद सुनील तटकरे हैं, जबकि शरद पवार गुट के पास आठ सांसद हैं. यदि दोनों गुट एकजुट होकर एनडीए में शामिल होते हैं तो इसका फायदा बीजेपी को केंद्र सरकार में मिल सकता है.

हालांकि, इस विषय में बीजेपी पर किसी तरह का सीधा दबाव नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में राजनीतिक संतुलन साधना पड़ सकता है.

आखिर विलय से क्यों बच रहा अजित गुट

विलय की स्थिति में शरद गुट के नेताओं को केंद्रीय या राज्य मंत्रिमंडल में कैसे शामिल किया जाए, यह सबसे बड़ा सवाल है. महाराष्ट्र में अजित पवार के अलावा महज एक मंत्री पद रिक्त है, जो बीजेपी के कोटे का है. यदि शरद पवार गुट के 3-4 नेताओं को मंत्री बनाना हो, तो अजित पवार गुट के कुछ मंत्रियों से इस्तीफा लेना पड़ेगा. ऐसा करने पर अंदरूनी नाराजगी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

ये बात अजित पवार गुट के नेता भली-भांति जानते हैं. एक बात और कि शरद गुट के विलय से अजित गुट के कई नेताओं का कद और पद दोनों कम हो जाएंगे. साथ ही शरद गुट में कई बड़े नाम और चेहरे ऐसे हैं जिनके साथ आने से अजित गुट के नेताओं के कद छोटे पड़ जाएंगे.

यही कारण है कि विलय को लेकर अजित गुट ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है. वो पहले अपने नेताओं को एकजुट कर सुनेत्रा पवार को नेतृत्व दे देना चाहता है ताकि विधायक और पदाधिकारी सब इस पवार परिवार के प्रति निष्ठावान बने रहें.

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