ब्रेकिंग
छिंदवाड़ा में ठहाकों का 71वां साल! जब कवियों के व्यंग्य बाणों के सामने नेता भी हुए बेबस, प्रेमिका पर... Jabalpur News: जबलपुर में रजिस्ट्री और लीज का अजब-गजब खेल, अंग्रेजों के पुराने कानून से जनता बेहाल BJP Leader Death: एंबुलेंस के फर्श पर तड़पते रहे खून से लथपथ बीजेपी नेता, इलाज के दौरान मौत; ड्राइवर... MP News: सीधी के फाग गीतों में चढ़ा राजनीति का रंग, पीएम मोदी और स्थानीय सांसद पर लोक गायकों ने बांधे... दिल्ली वालों के लिए जरूरी खबर: राजघाट की ओर जाने वाले ये 5 मुख्य मार्ग प्रभावित, ट्रैफिक जाम से बचने... Bengaluru News: शादी के बाद पति के लिए छोड़ी नौकरी, फिर ससुराल में प्रताड़ना; बेंगलुरु में पूर्व महि... IND vs ENG Semifinal: वानखेड़े में इंग्लैंड से हिसाब चुकता करेगी टीम इंडिया? जानें सेमीफाइनल का पूरा... Bhooth Bangla: सेमीफाइनल से पहले अक्षय कुमार ने टीम इंडिया को दिया खास 'गुड लक', शिखर धवन के साथ की ... Punjabi Youtuber Killed in Canada: मशहूर यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की हत्या, हमलावरों ने घर में घुसकर ... ईरान हमले में भारत का नाम! क्या सच में अमेरिकी सेना ने किया भारतीय पोर्ट का उपयोग? विदेश मंत्रालय का...
मध्यप्रदेश

लाखों में कमाई! 3 मास्टर्स डिग्री वाले युवक ने शहर छोड़ जंगल में शुरू की हाईटेक फार्मिंग, जानिए कैसे?

शहडोल: इसे कहते हैं जहां चाह वहां राह. शहडोल जिला भले ही आदिवासी बहुल्य इलाका है, लेकिन अब यहां के आदिवासी युवा भी कमाल कर रहे हैं. अपने मन मुताबिक अपना करियर बना रहे हैं और लाखों रुपए कमा कर लखपति बन रहे हैं. आज बात एक ऐसे ही किसान की जो तीन मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद नौकरी की तलाश में नहीं गया बल्कि जंगल में हाईटेक हॉर्टिकल्चर को अपनाकर लाखों रुपए कमाने वाला एक अच्छा मॉडल बना दिया. आज वह लाखों रुपए कमा रहा है.

3 मास्टर डिग्री करने वाले युवा का कमाल

शहडोल जिले के टेंघा गांव के रहने वाले हैं पारसमणी सिंह, जिनकी उम्र 36 साल है और इन्होंने एक नहीं दो नहीं बल्कि तीन मास्टर डिग्री भी हासिल की हैं. ये अभी भी पढ़ाई कर रहे हैं. अब एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई कर ही रहे और इस पर वो मुस्कुराते हुए कहते हैं की डिग्री लेते रहनी चाहिए, पढ़ाई व्यर्थ नहीं जाती.

पारसमणी सिंह भले ही आदिवासी युवा हैं, लेकिन हमेशा से उनके अंदर कुछ अलग करने का जुनून था. पारसमणी सिंह कहते हैं कि उन्होंने 12वीं तक के स्कूल में करीब 10 से 15 साल तक अतिथि शिक्षक के तौर पर अंग्रेजी सब्जेक्ट भी पढ़ाया है, लेकिन वो नौकरी करना नहीं चाहते थे. खुद का कुछ करना चाहते थे, जिसके बाद उन्होंने अपने गांव में खेती का नया मॉडल तैयार किया है. अब वो लाखों रुपए कमा रहे हैं और अपने इस काम से खुश भी हैं. पारसमणी सिंह जूलॉजी में मास्टर डिग्री कर चुके हैं, इंग्लिश में मास्टर डिग्री कर चुके हैं और कंप्यूटर साइंस में भी मास्टर डिग्री कर चुके हैं.

कितनों को नौकरी, कितनी कमाई

पारसमणी सिंह कहते हैं कि उन्हें इस बात की बड़ी खुशी होती है कि उन्होंने 25 से 30 लोगों को नौकरी भी दे रखी है, क्योंकि उनके इस खेती के मॉडल में काम करने वाले लोग ही इतने लग जाते हैं. सब्जी लगाने से लेकर सब्जी तोड़ने तक उसे बाजार में ले जाने तक लोगों की जरूरत पड़ती है और कहीं ना कहीं वो लोगों के काम आ रहे हैं. पारसमणी कहते हैं कि वैसे तो उनके पास पर्याप्त जमीन है लेकिन अभी वो 15 से 20 एकड़ में व्यावसायिक खेती कर रहे हैं. धीरे-धीरे रकबा बढ़ते ही जा रहे है, जिससे वो सालाना 20 से 25 लाख का कारोबार करते हैं. सब कुछ खर्च और लेबर चार्ज छोड़ दें तो साल भर में 10 से 15 लख रुपए कमा भी लेते हैं.

क्या-क्या लगाया, मार्केट कैसे बनाया

पारसमणी सिंह कहते हैं कि वो हर तरह की सब्जियों की खेती करते हैं. टमाटर, शिमला मिर्च, बैगन, खीरा, भिंडी, बरबटी, गोभी, लौकी, तरोई, कद्दू, नींबू के भी कुछ पेड़ लगा रखे हैं. इसके अलावा उन्होंने सब्जियों की फसल के शुरुआत में ही गेंदा का फूल भी लगा रखा है, जिससे दोहरा फायदा भी मिलता है. गेंदा का फूल भी बेच लेते हैं, और ये कीटों को कंट्रोल करने में भी मदद करता है.

किसी भी बड़े किसान के लिए सब्जी उगा लेने तक तो ठीक है लेकिन इसके लिए मार्केट बनाना भी एक चुनौती है, पारसमणी सिंह कहते हैं की शुरुआत में तो वह लोकल सब्जी मंडियों में ही अपनी सब्जी लेकर जाया करते थे, लेकिन धीरे-धीरे जब पैदावार ज्यादा बढ़ी तो अब उनकी सब्जी बिलासपुर, अंबिकापुर, रायपुर सहित छत्तीसगढ़ की मंडियों में भी जाती है. क्योंकि ये सब यहां से लगे हुए इलाके हैं. इसके अलावा अनूपपुर मंडी में भी सब्जी वह बेचते हैं. अब उनका मार्केट बन गया है और उन्हें अच्छे दाम भी मिल जाते हैं.

कैसे बना लखपति मॉडल ?

पारसमणी सिंह कहते हैं ऐसा नहीं है कि उन्हें शुरुआत से ही सफलता मिली. जब उन्होंने सब्जी की खेती की शुरूआत की तो उन्होंने अपने खाली पड़े प्लॉट में इसकी तैयारी की थी और लगभग 2 साल तक उन्होंने ऐसे ही खेती की है, लेकिन उन्हें फायदा नहीं मिल रहा था. इसके बाद जब कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से एडवाइस लेना शुरू किया तो कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने उन्हें बाहर के बड़े-बड़े किसानों का टूर भी कराया जिसे देखकर उन्होंने मल्चिंग और ड्रिप के जरिए वैज्ञानिक तरीके से खेती करना किया.

सालाना 10 से 15 लख रुपए तक की बचत

अब उनके लिए ये लाभ का सौदा बन गया है और वो तीन से चार साल से वैज्ञानिक हाईटेक अंदाज में खेती कर रहे हैं. जिसे लेकर वह काफी खुश हैं. किसान पारसमणी सिंह बताते हैं कि वो जितनी हाईटेक खेती कर रहे हैं, उसमें 4 से 5 लाख रुपए तक की लागत लग जाती है, क्योंकि वो नर्सरी बाहर से भी मंगवाते हैं जिसमें रायपुर अंबिकापुर जैसी जगहों से भी वह नर्सरी लेकर आते हैं. इस तरह से सारे लागत खर्च काट दिए जाए तो सालाना 10 से 15 लख रुपए तक की बचत कर लेते हैं.

जंगल में हाईटेक हॉर्टिकल्चर !

टेंघा गांव शहडोल जिले के अंतिम छोर में स्थित है. यह जंगलों से भरा हुआ इलाका है, यहां जंगल ही जंगल हैं और ऐसी जगह पर पारसमणी सिंह ने खेती का ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसे जंगल में हाईटेक हॉर्टिकल्चर भी कर सकते हैं. यहां पर अत्यधिक तरीके से खेती की जाती है. ड्रिप मल्चिंग सब कुछ इस्तेमाल किया जाता है. पारसमणी सिंह कहते हैं कि अब तो वह अपना रकबा और बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं, क्योंकि व्यावसायिक खेती करने से मुनाफा बहुत ज्यादा है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. मृगेंद्र सिंह कहते हैं की सबसे पहली बात तो यह है कि टेंघा गांव में खेती कर रहा ये युवा आदिवासी है, जो कि एक बड़ी विशेषता है. शहडोल जिला मुख्यालय से तकरीबन 70 से 80 किलोमीटर दूर है ये गांव. पहुंच विहीन क्षेत्र है जंगलों के बीच में है और इतने साधन सुविधा भी वहां नहीं है. आवागमन की सुविधा भी बहुत कम है. ऐसे इंटीरियर प्लेस पर और इतनी अच्छी तरीके से वैज्ञानिक और आधुनिक हाईटेक खेती करना अपने आप में बहुत बड़ा अचीवमेंट है. वह सब्जी की खेती कर रहा है, इसकी मार्केटिंग छत्तीसगढ़ के रायपुर बिलासपुर तक करता है यह सबसे बड़ी बात है. जंगल के बीच में जितने आधुनिक संसाधन हैं, खेती में उन सब का उपयोग करता है. तो एक तरह से कह सकते हैं कि यह आदिवासी युवा किसान जंगल में हाईटेक हॉर्टिकल्चर कर रहा है.”

Related Articles

Back to top button