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Tripura Sundari Temple Jabalpur: जबलपुर की शक्तिपीठ जहाँ मां के तीन रूपों के होते हैं दर्शन, जानें कलचुरी वंश और मां त्रिपुर सुंदरी का गहरा नाता

जबलपुर: शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर तेवर में त्रिपुर सुंदरी मंदिर है. यहां पर माता दुर्गा की तीन मुख वाली मूर्ति है. यह मंदिर कलचुरी कालीन है. कलचुरी राजाओं की राजधानी त्रिपुरी थी. जिसे अब तेवर के नाम से जाना जाता है. कलचुरी राजाओं के समय से ही इस मंदिर में पूजा-अर्चना चला आ रहा है. आज भी चैत्र नवरात्र में यहां लाखों लोग माता के दर्शन करने और पूजा करने के लिए पहुंचते हैं.

त्रिपुरी था कलचुरी राजाओं की राजधानी

इतिहासकार आनंद राणा बताते हैं कि “जबलपुर मध्य क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शहर है. यह शहर दो बार पूरे मध्य भारत की राजधानी रह चुका है. एक बार गोंडवाना काल में और उसके पहले कलचुरी राजाओं के काल में. कलचुरी राजा जबलपुर में लगभग 1000 साल पहले हुए हैं. जबलपुर के वर्तमान में तेवर गांव जिसे पहले त्रिपुरी के नाम से जाना जाता था, यहीं पर कलचुरी राजाओं की राजधानी थी. इस पूरे गांव में आज भी कलचुरी शासन के कई अवशेष मिलते हैं. कलचुरी राजाओं के समय के ज्यादातर निर्माण टूट गए हैं, लेकिन उस जमाने के कुछ मंदिर आज भी श्रद्धा का केंद्र है.”

तीन मुख वाली त्रिपुरी सुंदरी माता की प्रतिमा

जबलपुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर तेवर गांव के ठीक बाजू में त्रिपुर सुंदरी माता का मंदिर है. यहां एक काले पत्थर की बनी बेहद आकर्षक तीन मुख वाली बड़ी मूर्ति विराजमान है. ऐसा माना जाता है कि त्रिपुरी का नाम ही त्रिपुर सुंदरी माता की वजह से पड़ा था और उस जमाने से ही इस मंदिर में पूजा-अर्चना का सिलसिला चला आ रहा है. आज भी त्रिपुर सुंदरी माता की जबलपुर के आसपास बहुत मान्यता है और बड़ी तादाद में लोग यहां पर चैत्र नवरात्र में पहुंचते हैं.

चैत्र नवरात्र में मंदिर खुलने-बंद और पूजा-आरती का समय

त्रिपुर सुंदरी माता के मंदिर के पुजारी गोपाल ने बताया कि “चैत्र नवरात्र में बड़ी तादाद में भक्त यहां पहुंचते हैं. इसलिए मंदिर सुबह 4:00 बजे ही खुल जाता है और सुबह 4:00 बजे से लेकर सुबह 6:00 बजे तक लोग जल अर्पण करने के लिए आते हैं. इसके बाद सुबह 6:30 पर महाअभिषेक होता है और 8:00 बजे आरती होती है. इसके बाद बीच-बीच में प्रसाद वितरण होता है और रात 12:00 बजे तक पट खुले रहते हैं. दूर-दूर से आने वाले लोग लंबी कतारों में खड़े होकर घंटे अपनी बारी का इंतजार करते हैं. सामान्य दिनों में मंदिर 9:00 बजे बंद हो जाता है, लेकिन नवरात्रि में हम मंदिर को 12:00 तक खोल रखते हैं ताकि लोग माता का आशीर्वाद ले सकें.

नवरात्रि में निकलती है 10 किमी पैदल यात्रा

जबलपुर के श्रद्धालु अतुल मिश्रा ने बताया कि “हम सैकड़ों लोग जबलपुर शहर से नवरात्रि में 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा निकालते हैं और शहर से इकट्ठा होकर माता त्रिपुर सुंदरी तक जाते हैं. यह सिलसिला कई सालों से चला रहा है. त्रिपुर सुंदरी माता की जबलपुर के आसपास बड़ी मान्यता है. इस मंदिर का प्रबंध भी शासन की देखरेख में चलता है. हालांकि मंदिर में एक कमेटी है, जो मंदिर के कामकाज को देखते हैं, लेकिन पुरातत्व महत्व के इस मंदिर में शासन का दखल भी होता है. यहां इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि हजार साल पुरानी यह मूर्ति का अपना स्वरूप बना रहे, इसलिए लोगों को मूर्ति के केवल दर्शन करने दिए जाते हैं.

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