Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
‘गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत के बाद पंजाब में गैंगस्टरों से संबंधित हत्याओं में भारी कमी, गोलीबारी ... मुख्य मंत्री ने हॉलैंड के महान हॉकी खिलाड़ी फ्लोरिस जान बोवेलैंडर से की मुलाकात, पंजाब के खिलाड़ियों... Road Accident: जिस घर से उठनी थी बेटे की बारात, वहां से उठी पिता की अर्थी; शादी के कार्ड बांटने निकल... Indore Viral News: गले में वरमाला और शादी का जोड़ा पहन DM ऑफिस पहुंचा दूल्हा, बोला- 'दुल्हन कैसे लाऊ... Bihar Bridge Collapse: तीन बार गिरे सुल्तानगंज पुल में 'वास्तु दोष'? निर्माण कंपनी अब करवा रही चंडी ... Kolkata Hospital Fire: कोलकाता के आनंदलोक अस्पताल में भीषण आग, खिड़कियां तोड़कर निकाले गए मरीज; पूरे... Kota British Cemetery: कोटा में हटेगा 168 साल पुराना 'विवादित' शिलालेख, भारतीय सैनिकों को बताया था '... Novak Djokovic Virat Kohli Friendship: विराट कोहली के लिए नोवाक जोकोविच का खास प्लान, भारत आकर साथ म... Salman Khan Vamshi Film Update: वामशी की फिल्म में सलमान खान का डबल रोल? हीरो के साथ विलेन बनकर भी म... Crude Oil Supply: भारत के लिए खुशखबरी! इराक और सीरिया का 15 साल से बंद बॉर्डर खुला, क्या अब और सस्ता...

किस्मत को दी मात! पिता फुटपाथ पर बनाते हैं घड़ियां, बेटा मेडिकल शॉप में करता था काम; अब बना बिहार बोर्ड इंटर टॉपर, रुला देगी लक्की की दास्तां

हौसला बुलंद हो तो गरीबी भी पढ़ाई के आगे हार मान लेती है. ऐसी ही कुछ बिहार के पूर्णिया जिले से सामने आया है, जहां के लाल लक्की अंसारी ने बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा (आर्ट्स) में पूरे बिहार में द्वितीय स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन कर दिया है. लक्की को 500 में से 478 अंक (95.60 प्रतिशत) मिले हैं.

शहर के खजांची हाट, वार्ड संख्या 27 निवासी लक्की के पिता मो. इम्तियाज भट्टा बाजार में सड़क किनारे फुटपाथ पर घड़ी मरम्मत का काम करते हैं, जबकि उनकी माता पम्मी बेगम स्कूल में खाना बनाने का कार्य कर परिवार चलाने में सहयोग करती हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद दोनों पति-पत्नी अपने तीनों बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं. पिता मो. इम्तियाज अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए खुद की जरूरतों को त्यागते हुए हर संभव प्रयास करते रहे.

मेडिकल शॉप पर किया काम

सीमित संसाधनों के बीच लक्की ने हार नहीं मानी और यूट्यूब की मदद से रोजाना 6 से 7 घंटे पढ़ाई की. अपनी पढ़ाई का खर्च कम करने और पिता पर बोझ न बनने के लिए लक्की एक मेडिकल शॉप में काम भी करता था. काम के बाद देर रात तक पढ़ाई जारी रखता था. लक्की का कहना है कि यदि वह नौकरी नहीं करता तो और अधिक मेहनत करता और शायद बिहार टॉपर बनता. उसका सपना आगे चलकर शिक्षक बनकर समाज को शिक्षा देना है.

पूर्णिया लक्की ने किया टॉप

जैसे ही लक्की के स्टेट टॉपर बनने की खबर इलाके में फैली, उसके घर बधाई देने वालों का तांता लग गया. माता-पिता अपने बेटे की सफलता पर खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं. आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार का पूरा जीवन एक ही कमरे में गुजरता है, लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद इस गुदड़ी के लाल ने पूर्णिया का नाम पूरे बिहार में ऊंचा कर दिया. लक्की की सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.