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Kanha National Park: कान्हा में बाघों की मौत का ‘खूनी’ रहस्य! अब बाघिन T-122 का मिला शव, वन विभाग में मचा हड़कंप

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मंडला: मध्य प्रदेश के घने जंगलों में बसे कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है. जहां जंगल का राजा ही अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ता नजर आ रहा है. रविवार को कान्हा रेंज की कनहरी बीट में गश्ती के दौरान वन अमले को एक बाघिन का शव मिला. जिससे पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया. आपसी संघर्ष में मौत की आशंका जताई है.

जंगल में मिला बाघिन का शव
इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए कान्हा के डायरेक्टर रवींद्र त्रिपाठी ने बताया कि, ”मृत बाघिन की पहचान T-122 के रूप में हुई है. जिसकी उम्र करीब 10 साल आंकी गई है. घटना की सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के तय प्रोटोकॉल के तहत जांच शुरू कर दी गई. इतना ही नहीं, सच्चाई तक पहुंचने के लिए डॉग स्क्वॉड की मदद भी ली जा रही है. प्राथमिक जांच में जो तस्वीर सामने आई है, वो और भी चौंकाने वाली है.

बाघिन के शरीर पर गहरे घाव और खरोंच के निशान मिले हैं जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि उसकी मौत आपसी संघर्ष का परिणाम हो सकती है. हालांकि राहत की बात यह रही कि जांच में बाघिन के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे किसी प्रकार की शिकार या अवैध गतिविधि से इनकार किया जा रहा है.”

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है, कि क्या कान्हा के जंगल अब बाघों के लिए सुरक्षित नहीं रहे? लगातार सामने आ रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल, पोस्टमार्टम के बाद बाघिन का अंतिम संस्कार नियमानुसार कर दिया गया है. लेकिन जंगल की खामोशी अब एक बड़ी कहानी बयां कर रही है. क्या ये सिर्फ संघर्ष है,या फिर संरक्षण व्यवस्था पर एक गंभीर संकेत?

शरीर के सभी अंग सुरक्षित मिले
घटना की जानकारी मिलते ही प्रबंधन ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी, नई दिल्ली एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक कार्यालय, भोपाल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तत्काल कार्रवाई की है. मौके को सुरक्षित कर डॉग स्क्वाड की मदद से आसपास के क्षेत्र में गहन तलाशी अभियान चलाया गया. डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. आर.एम. मुरमूदे एवं डॉ. सुनील गोयल ने पोस्टमार्टम किया. पीएम के दौरान जांच में बाघ के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए, हालांकि शरीर पर चोट और संघर्ष के निशान मिले हैं.

कान्हा में टाइगर्स की मौत ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे मामले में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 3036/11 दर्ज कर आगे की जांच जारी है. कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों के बढ़ते कुनबे के बाद से इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आई हैं, जिसमें आपसी संघर्ष में वन्यजीवों को अपनी जान तक से हाथ गंवाना पड़ा है. हालांकि ये ही जंगल का कानून है, यहां वही राज करेगा जिसके बाजुओं में ताकत है, यहां अगर जीना है तो लड़ना होगा और जीतना भी होगा, वरना समझो जीवन समाप्त.

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