Local & National News in Hindi

Dhamtari News: धमतरी में 63 जोड़ों का सामूहिक विवाह, CM के न आने पर अरविंद नेताम बोले- अंगारमोती माता से लगाएंगे अर्जी

7

धमतरी: जिले में गंगरेल बांध स्थित माता अंगार मोती प्रांगण में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत भव्य सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया. इस दौरान कार्यक्रम में CM साय के नहीं पहुंचने पर आदिवासी नेता अरविंद नेताम ने इसे गलत बताया और कहा कि यह ठीक बात नहीं है. विश्वास में रखकर नहीं आना गलत है.

63 जोड़ों का विवाह

दो दिवसीय इस आयोजन में 63 जोड़ों ने एक साथ रीति-रिवाजों और आदिवासी परंपराओं के अनुसार फेरे लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत की. कार्यक्रम के पहले दिन आदिवासी समाज की परंपरा के अनुसार पारंपरिक रूढ़ीजन्य गोंडी रीति-रिवाज “पेन” पद्धति के अनुसार विधिवत की गई. इसके बाद 63 मंडप एक साथ सजाए गए, जहां दूसरे दिन सभी जोड़ों ने एक ही समय पर विवाह की रस्में पूरी कीं. इस आयोजन में धमतरी, कांकेर, बालोद, गरियाबंद सहित कुल 5 जिलों के दूल्हा-दुल्हन शामिल हुए.

क्या कहा अरविंद नेताम ने?

कार्यक्रम में पहुंचे सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने पर मंच से माता अंगार मोती की ओर इशारा करते हुए कहा, यह दूसरी बार है, हम अर्जी लगाएंगे, यह ठीक बात नहीं है. नहीं आना है तो मत आओ, लेकिन यह कहकर कि हम आएंगे और मुख्य अतिथि हैं फिर नहीं आना ये गलत है.

किसी के आने या नहीं आने से कार्यक्रम पर कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो ही रहा है. ये पहल गरीब समाज के लिए बड़ी राहत है– अरविंद नेताम, आदिवासी नेता

शादी का खर्च हुआ कम

इस सामूहिक विवाह को सभी ने सराहनीय पहल बताया. उनका कहना था कि इससे शादी का खर्च काफी कम हो जाता है और समाज तथा शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ भी मिलता है. कई जोड़ों ने कहा कि घर पर विवाह कराना संभव नहीं था, ऐसे में सामूहिक विवाह उनके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हुआ.

पूरे विधि-विधान से हुआ सामूहिक विवाह

आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जीवराखन लाल मराई ने बताया कि समाज आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण विवाह में अत्यधिक खर्च एक बड़ी समस्या थी. इसे ध्यान में रखते हुए सामूहिक विवाह की परंपरा को बढ़ावा दिया गया, जिसमें गोत्र व्यवस्था और पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए विवाह संपन्न कराया गया. उन्होंने बताया कि 63 जोड़ों में से 55 जोड़े आदिवासी ध्रुव गोड़ समाज के थे, जबकि अन्य कंवर और साहू समाज से भी शामिल हुए.

यह आयोजन न सिर्फ सामाजिक एकता का उदाहरण बना, बल्कि कम खर्च में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न कराने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल भी साबित हुआ.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.