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जातिगत जनगणना के प्रारूप पर कांग्रेस का बड़ा हमला: नाना पटोले ने बताया पूरी तरह दोषपूर्ण

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रायपुर (छत्तीसगढ़): जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।

रायपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष नाना भाऊ पटोले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जातिगत जनगणना के मौजूदा ढांचे को गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण करार दिया। उन्होंने इसे तत्काल रद्द कर नए सिरे से तैयार करने की मांग उठाई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की मौजूदगी में मीडिया से मुखातिब होते हुए पटोले ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था से जातियों की सटीक गिनती और आंकड़े कभी सामने नहीं आ सकेंगे। उन्होंने दो टूक कहा— “जब गिनती ही गलत होगी, तो हिस्सेदारी कैसे सही होगी? आंकड़े ही गलत होंगे, तो सामाजिक न्याय कैसे मिलेगा? सही गिनती होगी, तभी सही आंकड़े आएंगे और तभी वास्तविक सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा।”

📋 सवाल नंबर 10 पर सबसे बड़ा ऐतराज: ‘ओपन-एंडेड व्यवस्था आंकड़ों में करेगी बड़ा खेल’

प्रश्नावली और प्रक्रियागत खामियों पर सवाल:

  • सवाल नंबर 10 पर विवाद: कांग्रेस के अनुसार, आगामी जनगणना के लिए अधिसूचित 40 प्रश्नों में से 10वां सवाल सबसे ज्यादा संदेहास्पद है, जिसमें जाति की प्रविष्टि के लिए ओपन-एंडेड विकल्प रखा गया है। यानी नागरिक जो भी नाम बताएगा, प्रगणक (Enumerator) उसे हूबहू दर्ज कर देगा।

  • ड्रॉपडाउन लिस्ट की मांग: पार्टी का तर्क है कि जब केंद्र और राज्यों के पास प्रमाणित जातियों की विस्तृत सूचियां उपलब्ध हैं, तो फिर डिजिटल ड्रॉपडाउन विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा? ड्रॉपडाउन व्यवस्था से डेटा मानकीकृत और तुलनीय रहता है।

  • वर्तनी और उपनामों से भ्रम: ओपन-एंडेड फॉर्मेट से एक ही जाति के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय नाम, उपजातियां और वर्तनी (Spelling) के अंतर के कारण एक समुदाय कई टुकड़ों में बंट जाएगा, जिससे जातियों की संख्या कागजों पर कृत्रिम रूप से बढ़ जाएगी और नीति-निर्माण निरर्थक हो जाएगा।

📉 OBC-EBC के अधिकारों पर सीधा प्रहार: आरक्षण और हिस्सेदारी होगी प्रभावित

सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं पर प्रभाव:

  • ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द ही नदारद: कांग्रेस ने दावा किया कि वर्तमान प्रारूप में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द तक शामिल नहीं किया गया है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) को उठाना पड़ेगा।

  • हिस्सेदारी का पैमाना गायब: यदि वास्तविक आबादी के पुख्ता आंकड़े नहीं होंगे, तो ‘जितनी आबादी, उतना हक’ का सिद्धांत कमजोर पड़ जाएगा। इससे यह तय करना असंभव हो जाएगा कि किस वर्ग को कितने आरक्षण और योजनाओं के लाभ की आवश्यकता है।

  • प्रतिनिधित्व का मूल्यांकन असंभव: प्रामाणिक डेटा के अभाव में विधानसभा, संसद, उच्च न्यायपालिका, प्रशासनिक सेवाओं और कॉरपोरेट क्षेत्र में वंचित वर्गों की वास्तविक भागीदारी का आकलन नहीं हो सकेगा। पटोले ने इसे केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर कुठाराघात बताया।

⚖️ 4,200 जातियों की सूची और सुप्रीम कोर्ट का हलफनामा: कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल

दस्तावेजों और पूर्व बयानों के आधार पर घेराव:

  • तैयार सूचियों की अनदेखी: कांग्रेस के अनुसार, देश में लगभग 4,200 जातियां हैं और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) सहित मंत्रालयों के पास इनकी प्रमाणित सूची है। इसके बावजूद ड्रॉपडाउन सूची का प्रयोग न करना केंद्र की मंशा पर संदेह पैदा करता है।

  • 2021 के हलफनामे का हवाला: 21 सितंबर 2021 को केंद्र सरकार ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर स्वीकार किया था कि जातिगत गणना के लिए पूर्व-निर्धारित ड्रॉपडाउन सूची आवश्यक है। अब सरकार अपने ही रुख से पीछे क्यों हट रही है?

  • बिहार-तेलंगाना मॉडल अपनाने की मांग: कांग्रेस ने मांग की है कि तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पारदर्शी पद्धति की तर्ज पर प्रमाणित जातियों की सूची तैयार की जाए।

⏱️ ‘सरकार के पास सुधार का समय’: राहुल गांधी के संघर्ष और यूटर्न पर पलटवार

पार्टी की पृष्ठभूमि और आगामी रणनीति:

  • लगातार संघर्ष: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी वर्ष 2023 से लगातार जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं और प्रधानमंत्री को कई बार पत्र भी लिख चुके हैं।

  • यू-टर्न का आरोप: कांग्रेस ने याद दिलाया कि पहले इस मांग को ‘अर्बन नक्सल’ सोच बताया गया था, लेकिन दबाव के बाद सरकार को 2027 से जातिगत जनगणना कराने की घोषणा करनी पड़ी।

  • सुधार की अपील: चूंकि वर्तमान में यह कार्य केवल कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में पायलट स्तर पर शुरू हुआ है और देशभर में इसका मुख्य विस्तार फरवरी 2027 से होना है, इसलिए सरकार के पास प्रश्नावली और प्रारूप को सुधारने का पर्याप्त अवसर है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह पिछड़ों, दलितों और शोषितों के अधिकारों के लिए इस लड़ाई को आगे भी जारी रखेगी।

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