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Durg News: 1000 एकड़ खेती पर संकट! गुस्साए किसानों ने किया PWD कार्यालय का घेराव, लगाया ये बड़ा आरोप

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दुर्ग: बोरीगारका-कातरो मार्ग के निर्माण में लोक निर्माण विभाग पर लापरवाही और तकनीकी त्रुटियों का आरोप लगाते हुए किसानों ने पीडब्ल्यूडी का घेराव किया. किसानों ने आरोप लगाया कि बार बार चेतावनी देने के बाद भी पुल निर्माण नहीं किया गया जिससे खेती पर संकट आ गया है. वहां कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर के नेतृत्व में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया जिसमे पीडब्ल्यूडी पर 6 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले का सीधा आरोप लगाया गया है.

1000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई बाधित होने का आरोप

बोरीगारका के सरपंच ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के दौरान नियमों को ताक पर रखकर सिंचाई निकासी नाले की अनदेखी की गई है, जहां नियमानुसार पुल का निर्माण अनिवार्य था वहां विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए सिर्फ पाइप डालकर खानापूर्ति कर दी है. किसानों ने इसे तकनीकी रूप से गलत बताते हुए एक हजार एकड़ कृषि भूमि सिंचाई बाधित होने का आरोप लगाया. किसानों ने ये भी कहा कि पुल निर्माण नहीं होना कृषि व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती है.

पीडब्ल्यूडी ने बोरीगारका-कातरो मार्ग पर पुल निर्माण की जगह पाइप डाल दिया गया है. हमारी मांग है कि वहां पुल निर्माण होना चाहिए, तभी हम अपने खेतों की सिंचाई कर पाएंगे. हमारी मांग है कि वहां पुल निर्माण हो –चुमन यादव, सरपंच और किसान

लोक निर्माण विभाग की लापरवाही

लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता एके आशीष भट्टाचार्य ने किसानों के प्रदर्शन और विभाग पर लगे आरोपों पर जवाब दिया. उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मांग थी कि एरिगेशन के स्ट्रक्चर को स्लैब में कनवर्ट किया जाए. इसके लिए नवंबर माह में संबंधित विभाग एरिगेशन को पत्र लिखा गया था, लेकिन वहां से अनुमति मिलने में देरी हुई. जिससे सड़क का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया. भट्टाचार्य ने कहा कि 27 मार्च को एरिगेशन विभाग से पत्र आया है कि वहां पर पुलिया बनाना है. अब नए पुल के निर्माण की तैयारी जारी है.

चौंकाने वाली बात यह है कि क्षेत्र के किसानों ने 18 और 25 मार्च 2026 को लिखित आवेदन देकर विभाग को इस समस्या के प्रति सचेत किया था. यहां तक कि जल संसाधन विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में पुल निर्माण की आवश्यकता को अनिवार्य बताया था, लेकिन प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने इन चेतावनियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया. जनहित की इस अनदेखी से स्थानीय ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है.

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