अगर आपकी डाइट में अंडा रोजाना शामिल है, तो आने वाले दिनों में इसका सीधा असर आपकी जेब पर भी पड़ सकता है। देश के कई हिस्सों में अंडों की कीमत लगातार बढ़ रही है और खुदरा बाजार में एक अंडा 8.5 से 9 रुपये तक बिक रहा है। पोल्ट्री उद्योग (Poultry Industry) का कहना है कि मुर्गियों के चारे (पोल्ट्री फीड) की बढ़ती लागत ने उत्पादन खर्च को काफी बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर अब बाजार की कीमतों पर दिख रहा है।
पोल्ट्री फीड महंगा होने से बढ़ी उत्पादन लागत
पोल्ट्री कंपनियों के मुताबिक, मुर्गियों के चारे में इस्तेमाल होने वाले मक्का, सोयाबीन खली और अन्य जरूरी आयातित फीड सामग्री के दाम पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़े हैं। पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कई कच्चे माल की उपलब्धता घट गई है और लागत में भारी उछाल आया है।
मक्का और सोयाबीन की कीमतों में भारी तेजी
नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के आंकड़ों के अनुसार, हैदराबाद में अंडों की एक्स-फार्म कीमत पिछले एक महीने में करीब 15% और पिछले साल की तुलना में लगभग 40% बढ़ गई है। उद्योग के अनुसार, मुर्गियों के चारे का करीब 55% हिस्सा मक्का होता है, जिसकी कीमत मार्च के बाद से 35% से अधिक बढ़ चुकी है। वहीं, लगभग 22% हिस्सेदारी रखने वाली सोयाबीन खली 64% से ज्यादा महंगी हो गई है। इसके अलावा, फीड में इस्तेमाल होने वाले आवश्यक एमिनो एसिड की कीमतें भी मार्च के बाद लगभग 3.5 गुना तक बढ़ चुकी हैं।
एथेनॉल उत्पादन और खराब मानसून ने बढ़ाई चिंता
विशेषज्ञों के मुताबिक, मक्का की मांग अब केवल पोल्ट्री सेक्टर तक सीमित नहीं रह गई है। एथेनॉल (Ethanol) उत्पादन में मक्के की बढ़ती खपत के कारण भी इसकी कीमतों में तेजी आई है। दूसरी ओर, अनियमित मानसून ने खरीफ और रबी फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सोयाबीन की कीमतों पर भी पिछले साल के कमजोर उत्पादन का असर दिख रहा है। उद्योग का अनुमान है कि बीते वर्ष भारत में सोयाबीन उत्पादन करीब 20% कम रहा था। यदि इस बार भी मानसून उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो फीड की लागत और बढ़ सकती है।
चिकन भी हुआ महंगा, सावन में मिल सकती है थोड़ी राहत
तेज गर्मी का असर ब्रॉयलर चिकन के उत्पादन पर भी पड़ा है। उत्पादन घटने से कई शहरों में चिकन का खुदरा भाव 250 से 260 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। हालांकि, पोल्ट्री उद्योग को उम्मीद है कि जुलाई के आखिर से अंडों और चिकन की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। सावन (Sawan) के महीने के दौरान उत्तर भारत में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक कारणों से अंडा और मांस का सेवन कम कर देते हैं, जिससे मांग घट सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन, यदि मानसून सामान्य नहीं रहा और मक्का-सोयाबीन की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में महंगाई का यह झटका फिर लग सकता है।
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