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Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा एक्शन, परिजनों की सीएम से मुलाकात के बाद SDPO और SDO हटाए गए

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बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मामले में लगातार उठ रहे सवालों और अधिकारियों की कथित संदिग्ध भूमिका को देखते हुए सरकार ने तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) संजीत कुमार को उनके पदों से हटा दिया है। यह कार्रवाई भरत तिवारी के परिजनों की मुख्यमंत्री से मुलाकात के एक दिन बाद हुई है।

🚔 तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा को हटाया गया, पुलिस मुख्यालय में वेटिंग फॉर पोस्टिंग रखा

गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, एनकाउंटर के समय जगदीशपुर के एसडीपीओ रहे पुलिस उपाधीक्षक राजेश कुमार शर्मा को हाल ही में मद्य निषेध विभाग में पदस्थापित किया गया था। अब उन्हें वहां से भी हटा दिया गया है और पुलिस मुख्यालय में पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है। अब उनके पास किसी भी तरह का प्रशासनिक प्रभार नहीं है।

🏛️ तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) संजीत कुमार भी पद से मुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग में भेजा

वहीं, इस मामले में कथित रूप से संदिग्ध भूमिका के घेरे में आए जगदीशपुर के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) संजीत कुमार को भी उनके पद से हटा दिया गया है। सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान देने का निर्देश जारी किया है। इस फैसले के बाद दोनों अधिकारियों को उनके मौजूदा दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है।

👨‍👩‍👧‍👦 परिजनों ने मुख्यमंत्री से की थी मुलाकात, निष्पक्ष जांच और न्याय की उठाई थी मांग

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और परिजन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। बुधवार को भरत तिवारी के परिजनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी और न्याय की मांग की थी। इसके अगले ही दिन सरकार द्वारा दोनों अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया।

🔍 एनकाउंटर प्रकरण में जांच तेज, आगे भी हो सकती है कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई

वहीं सरकार की ओर से जारी आदेश में अधिकारियों को हटाने के पीछे विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इस कार्रवाई को एनकाउंटर प्रकरण में उठे विवाद और जांच प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मामले की जांच में आगे क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या इस प्रकरण में आगे भी प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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