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Amroha Three Sisters Marriage Law: अमरोहा में 3 बहनों से शादी का मामला; जानिए हिंदू मैरिज एक्ट और BNS धारा 82 के तहत यह शादी वैध है या अवैध?

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अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र में तीन सगी बहनों और एक ही युवक (कैमरामैन विकास) की शादी का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। जहां एक तरफ बाल कल्याण समिति (CWC) नाबालिग होने की आशंका को लेकर मामले की सघन जांच करा रही है, वहीं दूसरी तरफ इस शादी की वैधानिक स्थिति (Legal Status) को लेकर भी बड़े कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के वकील इशु जैन के मुताबिक, भारतीय कानून में इस तरह के विवाह के लिए कोई जगह नहीं है और यह पूरी तरह अवैध (Void) है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हिंदू पर्सनल लॉ में एक समय में एक ही जीवित जीवनसाथी रखने का स्पष्ट प्रावधान है। दिल्ली हाईकोर्ट के वकील इशु जैन ने बताया कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार, पहली पत्नी के जीवित रहते हुए और बिना कानूनी तलाक के दूसरी या तीसरी शादी करना पूरी तरह गैर-कानूनी है। यदि तीनों बहनें अपनी स्वेच्छा से साथ रहना चाहती हैं और किसी को कोई शिकायत नहीं है, तब भी कानून की नजर में दूसरी और तीसरी शादी की कोई कानूनी मान्यता नहीं होगी। दूसरी और तीसरी महिला को कभी भी वैध पत्नी का अधिकार या दर्जा नहीं मिल सकता।

⚖️ BNS की धारा 82: द्विविवाह (Bigamy) पर 7 से 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माना

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82 में द्विविवाह (Bigamy) को लेकर सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। पहले पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी बार विवाह करने पर वह विवाह स्वतः अमान्य हो जाता है। इस अपराध के लिए दोषी को 7 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। यदि नया विवाह पहले विवाह के तथ्य को छिपाकर किया जाता है, तो सजा की अवधि बढ़कर 10 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकती है। कानून में केवल दो ही अपवाद हैं—या तो पहला विवाह अदालत द्वारा शून्य घोषित कर दिया गया हो, या पहला जीवनसाथी लगातार 7 वर्षों से लापता हो।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘इंद्रा शर्मा बनाम वी.के.वी. शर्मा’ का हवाला

उच्चतम न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसलों से भी इस मामले की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होती है। Indra Sarma vs V.K.V. Sarma (2013) केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि पुरुष पहले से कानूनी रूप से विवाहित है, तो किसी अन्य महिला के साथ उसका संबंध “Relationship in the nature of marriage” (विवाह की प्रकृति का संबंध) नहीं माना जाएगा।

इसके अलावा, घरेलु हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act, 2005) की धारा 2(f) के तहत लिव-इन रिलेशनशिप को कुछ हद तक सुरक्षा मिलती है, लेकिन शादीशुदा पुरुष के साथ रहने वाली दूसरी या तीसरी महिला को यह राहत स्वतः नहीं मिलती; इसके लिए अदालत मामले के विशिष्ट तथ्यों पर विचार करती है।

🚔 क्या बिना शिकायत के भी पुलिस कर सकती है कार्रवाई? जानें कानूनी सच्चाई

अक्सर आम जनता में यह माना जाता है कि बिना शिकायत के पुलिस कार्रवाई नहीं करती, लेकिन कानूनी सच्चाई इससे अलग है। हालांकि व्यवहार में द्विविवाह (Bigamy) के मामलों में पहली पत्नी या प्रभावित परिजनों की शिकायत पर ही केस दर्ज होता है, परंतु यदि यह मामला पुलिस या अदालत के संज्ञान में आता है और इसमें कोई गैर-कानूनी, बाल विवाह या आपराधिक तथ्य पाए जाते हैं, तो राज्य प्रशासन अपनी ओर से भी स्वतः संज्ञान लेकर न्यायसंगत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

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